चारदीवारी से बाहर आने में समय तो लगेगा ही
राजविराज नगरपालिका वार्ड नम्बर- ८ की मिथिला चौधरी विगत तीस साल से राजनीति से जुडी हइ हैं । लेकिन वे जिस पार्टी आबद्ध हैं, वह आकार में बहुत छोटी है । शायद इसलिए वह कभी चर्चा में भी नहीं रहीं । खासकर मधेश में हुए आन्दोलन के बाद मधेश के बहुत से नेता पार्टी दल कर मधेशवादी दल में शामिल हुए । लेकिन मिथिला चौधरी का विश्वास नहीं डगमगाया । वह तो पति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलती रहीं । संविधानसभा के दूसरे निर्वाचन में उनकी पार्टी नेपाल कम्युनिष्ट पार्टसंयुक्त) ने उनको समानुपातिक की ओर से सभासद् के लिए चयन किया और भारत मधुबनी की बेटी पहँुंच गयी संविधान सभा भवन तक । एक लम्बी यात्रा के बाद आज वो इस मुकाम पर पहुँची हैं । उनकी तीन दशक लम्बी राजनीतिक यात्रा के संबंध में हिमालिनी प्रतिनिधि कञ्चना झा से हर्ुइ बातचीत के कुछ अंश –
० जिम्मेवारी बहुत महत्त्वपण्ा है, लेकिन आप जिस दल का प्रतिनिधित्व कर रही हैं, वह बहुत छोटी है । कैसा अनुभव कर रही हैं आप –
– सबसे बडÞी बात तो पार्टर्ीीोई छोटी या बडÞी नहीं होती । हर विचार की अपनी अहमियत होती है । संख्या के हिसाब से संविधानसभा में छोटा दल होने के बाबजूद मैं अपने विचार को बिना हिचक रख देती हूँ । तीन दशक की राजनीतिक यात्रा के बाद एक मुकाम पर पहुँची हूँ, अच्छा तो लग ही रहा है ।
० संविधान निर्माण में आपकी क्या भूमिका है –

– संविधान तो राष्ट्र का मेरुदण्ड होता है और मैं भी चाहती हूँ जितना जल्दी हो सकता है संविधान आये । एक ऐसा संविधान जो सभी का हो । जिसमें हर नागरिक को समान अधिकार मिला हो । इसके लिए अपनी तरफ से मैं भी प्रयासरत हूँ ।
० आपकी भावना को बड दल कैसे लेते हैं –
– मैने पहले भी कहा कि कोई दल बडा या छोटा नहीं । संख्या से भी ज्यादा यह देखा जाता है कि दल के नेतागण काम कैसे कर रहे हैं । हाँ, संविधानसभा में संख्या की बात की जाय तो कुछ दल के पास ज्यादा संख्या है और संख्या का लाभ लेते हुए वे लोग बडقी-बडقी बात करते हैं । वो मुझे तवज्जो दें न दें, मुझे अपना काम करना है और मैं हर हाल में क؟ँगी ही । मुझे कोई र्फक नहीं पडقता कि बड दल के लोग मेरी भावना को कैसे लेते हैं ।
० अब यह बताइये कि सिर्फडेढÞ महीना बांकी है, माघ ८ आने में, क्या जनता को नया संविधान मिलेगा –
– माघ- ८ में ही संविधान आये इसके लिए सभी दल और सभी नेता प्रयासरत हैं । लेकिन कुछ दल के हठ के कारण बहुत सी बातों में सहमति नहीं बन पायी है । ऐसे मंे मुझे नहीं लगता है जनता को समय में संविधान मिल पाएगा ।
० माघ ८ में संविधान नहीं आता है तो इसके लिए कौन जिम्मेवार है –
– ये तो किसी से नहीं छिपा है कि अपने आपको बडेق दल कहने वाले कुछ नेता व्यक्तिगत स्वार्थ के कारण सहमति होने नहीं दे रहे हैं । वे लोग बाहर कुछ बोलते हैं लेकिन अन्दर से वे संविधान बनाने के पक्ष में नहीं हैं । अगर संविधान नहीं मिला तो इसके लिए पूरी तरह से बडقे दल के नेता ही जिम्मेवार होंगे ।
० अब कुछ बातें देश की महिलाओं के बारे में, तो इनकी अवस्था को लेकर आप क्या सोचती हैं –
– नेपाल में महिलाओं को सदियों से दबा कर रखा गया है । चारदीवारी से बाहर आने में समय तो लगेगा ही । पिछले कुछ दशक से महिला बाहर आने लगी हैं लेकिन इतना ही पर्याप्त नहीं । ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को बाहर आना होगा । तभी जाकर महिलाओं की स्थिति में परिवर्तन होगा । महिला की अवस्था अभी भी दयनीय ही है ।
० आपने कहा कि अवस्था अभी भी दयनीय है तो इसकी जड क्या है –
– सबसे बडा कारण तो अशिक्षा ही है । शिक्षा मनुष्य को चेतना देती है और चेतनशील होने के बाद लोगों में आत्मविश्वास आता है । इसलिए शिक्षा पर ही जोर देना होगा ।
० अच्छा आप तो मधेश से हैं उसमें भी सप्तरी से तो वहाँ की महिलाओं की अवस्था कैसी है –
– बहुत खराब, घरेलू हिंसा दिन-ब-दिन बढقती ही जा रही हैं । महिलाओं के साथ यौन दर्ुर्व्यवहार बढق गया है लेकिन घर और समाज के डقर के कारण वो बोल नहीं पा रही हैं । गाँव की स्थिति तो और भी भयावह है ।
० अब तो आप एक जगह पर हैं जहाँ से आप चाहें तो बहुत कुछ कर सकती हैं । तो अभी तक आपने इस समस्या के समाधान के लिए क्या किया है –
-सबसे पहले तो आवश्यक है आवाज उठाना और मैं निरन्तर महिलाओं के लिए आवाज उठाती रही हूँ । मैं तो कहती हूँ कि अगर देश का प्रधानमंत्री पुरुष है तो उप प्रधानमंत्री महिला को और गर जो राष्ट्रपति पुरुष हो तो उपराष्ट्रपति महिला को होना चाहिए ।
० मधेशी महिला की अवस्था को सुदृढÞ बनाने के लिए आगामी योजना क्या है –
– वैसे तो शुरु से ही मैं महिलाओं के प्रति गंभीर रही हूँ और मुझे ये भी लगता है कि अपनी जगह की महिलाओं की समस्या को जितने अच्छे तरीके से मैं समझ सकती हूँ उतना और कोई नहीं । विकास की योजनाओं पर काम करना चाहती हूँ और इसके लिए सदन में अपनी बात रख रही हूँ । महिलाओं की समस्या है- दहेज, नागरिकता, डायन के नाम पर अत्याचार, बाल विवाह, बहुविवाह आदि । इसके विरुद्ध जोरदार तरीके से लगना चाहती हूँ । लेकिन अभी संविधान निर्माण प्रक्रिया में सारा देश लगा हुआ है, इसलिए मेरा भी ज्यादा ध्यान संविधान निर्माण की तरफ ही है ।

