राजावादियों को निष्क्रिय करने के लिए संविधान में ‘हिंदू गणतंत्र’ लिखने की राष्ट्रीय एकता अभियान की मांग
काठमांडू। राष्ट्रीय एकता अभियान ने हाल के दिनों में देश में राजावादियों के बढ़ते मनोबल पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि सनातनी हिंदू धर्म को राजनीतिक स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करते हुए राजावादी गणतंत्र को समाप्त करने की कोशिश में जुटे हैं।
राष्ट्रीय एकता अभियान के अध्यक्ष विनय यादव ने एक विज्ञप्ति जारी कर कहा कि हिंदू धर्म के नाम पर राजावादी गणतंत्र को खत्म करने की साजिश रच रहे हैं। इस साजिश को नाकाम करने के लिए नेपाल के संविधान की प्रस्तावना में ही ‘संघीय हिंदू गणतंत्र नेपाल’ का उल्लेख किया जाना चाहिए।
विज्ञप्ति में यादव ने कहा, “राजावादी हिंदुत्व और हिंदू धर्म का सहारा लेकर राजशाही को वापस लाने की चाल चल रहे हैं। राजावादियों का हिंदुत्व से कोई लेना-देना नहीं है। वे हिंदुत्व और राजतंत्र की बहाली के नाम पर स्वार्थी राजनीति कर रहे हैं। अगर संविधान में ही हिंदू गणतंत्र की स्थापना हो जाए, तो हिंदू धर्म के नाम पर गणतंत्र विरोधी साजिश करने वाले निष्क्रिय हो जाएंगे।”
उन्होंने यह भी दावा किया कि राजावादियों को निष्क्रिय करने और गणतंत्र को संस्थागत करने के लिए संघीय लोकतांत्रिक हिंदू गणतंत्र व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। अगर देश के सभी दल इस एजेंडे पर सहमत हो जाएं, तो हिंदू राष्ट्र का गौरव भी लौटेगा और हिंदुत्व के नाम पर लोकतंत्र को खत्म करने का बहाना भी किसी को नहीं मिलेगा।
यादव ने विज्ञप्ति में यह भी उल्लेख किया कि देश में बढ़ती अव्यवस्था, आर्थिक संकट, बेरोजगारी, महंगाई और विदेश पलायन की स्थिति में राजनीतिक दलों के डिलीवरी न दे पाने के कारण जनता में पैदा हुए आक्रोश और निराशा का फायदा राजावादी उठा रहे हैं। उन्होंने कहा, “देश में मौजूदा अव्यवस्था को लेकर सभी दलों को गंभीर होना चाहिए और विधि के शासन को अपनाना चाहिए। जनता के प्रति जवाबदेह शासन जरूरी है।”
उन्होंने यह भी कहा कि दल और नेता लोकतंत्र का राग तो अलापते हैं, लेकिन लोकतांत्रिक चरित्र को अपनाने में नाकाम रहे हैं, जिसके कारण समस्याएं पैदा हुई हैं। अध्यक्ष यादव ने मांग की कि दलों को लोकतांत्रिक चरित्र दिखाना चाहिए, सिंडिकेट व्यवस्था का अंत करना चाहिए और सभी लोकतांत्रिक शक्तियों के बीच सहयोग होना चाहिए।
राष्ट्रीय एकता अभियान के अध्यक्ष विनय यादव ने एक विज्ञप्ति जारी कर कहा कि हिंदू धर्म के नाम पर राजावादी गणतंत्र को खत्म करने की साजिश रच रहे हैं। इस साजिश को नाकाम करने के लिए नेपाल के संविधान की प्रस्तावना में ही ‘संघीय हिंदू गणतंत्र नेपाल’ का उल्लेख किया जाना चाहिए।
विज्ञप्ति में यादव ने कहा, “राजावादी हिंदुत्व और हिंदू धर्म का सहारा लेकर राजशाही को वापस लाने की चाल चल रहे हैं। राजावादियों का हिंदुत्व से कोई लेना-देना नहीं है। वे हिंदुत्व और राजतंत्र की बहाली के नाम पर स्वार्थी राजनीति कर रहे हैं। अगर संविधान में ही हिंदू गणतंत्र की स्थापना हो जाए, तो हिंदू धर्म के नाम पर गणतंत्र विरोधी साजिश करने वाले निष्क्रिय हो जाएंगे।”
उन्होंने यह भी दावा किया कि राजावादियों को निष्क्रिय करने और गणतंत्र को संस्थागत करने के लिए संघीय लोकतांत्रिक हिंदू गणतंत्र व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। अगर देश के सभी दल इस एजेंडे पर सहमत हो जाएं, तो हिंदू राष्ट्र का गौरव भी लौटेगा और हिंदुत्व के नाम पर लोकतंत्र को खत्म करने का बहाना भी किसी को नहीं मिलेगा।
यादव ने विज्ञप्ति में यह भी उल्लेख किया कि देश में बढ़ती अव्यवस्था, आर्थिक संकट, बेरोजगारी, महंगाई और विदेश पलायन की स्थिति में राजनीतिक दलों के डिलीवरी न दे पाने के कारण जनता में पैदा हुए आक्रोश और निराशा का फायदा राजावादी उठा रहे हैं। उन्होंने कहा, “देश में मौजूदा अव्यवस्था को लेकर सभी दलों को गंभीर होना चाहिए और विधि के शासन को अपनाना चाहिए। जनता के प्रति जवाबदेह शासन जरूरी है।”
उन्होंने यह भी कहा कि दल और नेता लोकतंत्र का राग तो अलापते हैं, लेकिन लोकतांत्रिक चरित्र को अपनाने में नाकाम रहे हैं, जिसके कारण समस्याएं पैदा हुई हैं। अध्यक्ष यादव ने मांग की कि दलों को लोकतांत्रिक चरित्र दिखाना चाहिए, सिंडिकेट व्यवस्था का अंत करना चाहिए और सभी लोकतांत्रिक शक्तियों के बीच सहयोग होना चाहिए।


