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दुर्गा प्रसाईं का दावा : मैं नेपाल में ही हूँ, जिंदगी की गारंटी होने पर वे सामने आएंगे

 

चैत्र 27, 2081,
काठमांडू । व्यवसायी दुर्गा प्रसाईं, जो चैत 15 को तीनकुने हिंसक प्रदर्शन के बाद से फरार थे, ने एक बार फिर दावा किया है कि वे नेपाल में ही हैं। बुधवार को सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में प्रसाईं ने कहा कि अगर मानवाधिकार कार्यकर्ता और उनके द्वारा नामित वकीलों की मौजूदगी की गारंटी दी जाए, तो वे 24 घंटे के अंदर हाजिर हो जाएंगे।
प्रसाईं ने कहा, “पुलिस को मुझे ढूंढने की जरूरत नहीं। मैं नेपाल में ही किसी जगह पर हूँ। अगर मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकीलों की मौजूदगी हो, तो मैं 24 घंटे में आ जाऊंगा।” उन्होंने यह भी खुलासा किया कि वे एक नई योजना बना रहे हैं और उनकी जिंदगी की गारंटी होने पर ही वे सामने आएंगे।
उन्होंने आरोप लगाया कि उनके आंदोलन का नेतृत्व हड़पने की साजिश रची गई है। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, माओवादी अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल और एक राजावादी नेता ने मिलकर यह षड्यंत्र रचा। हालांकि, उस राजावादी शख्स का नाम वे बाद में बताएंगे।
“मुझे जोकर बनाया गया”
प्रसाईं ने मीडिया में अपनी छवि को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “कई मीडिया हाउस ने मेरे बारे में मीम्स बनाए। मुझे जोकर बनाकर पेश किया गया। दुर्गा प्रसाईं को मुर्गा प्रसाईं कहकर मेरा मजाक उड़ाया गया। यह देखकर मुझे हैरानी हुई।”
उन्होंने पेरू के विद्रोही नेता गोन्जालो का जिक्र करते हुए कहा, “मैं गोन्जालो नहीं बनना चाहता, जिसे पकड़कर मार दिया गया और उसके बाद पेरू का जनविद्रोह खत्म हो गया। मैं नेपाल के लोगों का नेता बनना चाहता हूँ। हजार मील की यात्रा शून्य से शुरू होती है। दुर्गा प्रसाईं एक विचार है। अगर मैं रहा, तो यह जनविद्रोह सफल होगा, वरना दब जाएगा।”
मृतकों के परिवार को मुआवजा
प्रसाईं ने घोषणा की कि चैत 15 के तीनकुने प्रदर्शन में मारे गए सविन महर्जन और सुरेश रजक के परिवारों को 5-5 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। इससे पहले चैत 17 को भी उन्होंने एक वीडियो में दावा किया था कि वे काठमांडू के किसी मंदिर में हैं। हालांकि, उनकी स्कॉर्पियो गाड़ी इटहरी से पुलिस ने बरामद की थी।
राजसंस्था के लिए आंदोलन
चैत 4 को प्रसाईं के नेतृत्व में राष्ट्रीय पंचायत के पूर्व अध्यक्ष और राप्रपा नेता नवराज सुवेदी के साथ मिलकर राजसंस्था की बहाली के लिए संयुक्त जनआंदोलन समिति बनाई गई थी। सुवेदी ने प्रसाईं को इस आंदोलन का कमांडर भी घोषित किया था। लेकिन चैत 15 को सिरहा में प्रधानमंत्री ओली के कार्यक्रम के विरोध में प्रसाईं के भड़काऊ कदमों के बाद प्रदर्शन हिंसक हो गया। इस दौरान एक पत्रकार सहित दो लोगों की मौत हो गई, दर्जनों गाड़ियों में आगजनी हुई और सरकारी व निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा।

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