Wed. Sep 2nd, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

नेपाल में भारत के प्रभाव को समाप्त करने हेतु अमेरिका और चीन सक्रिय- राजेश अंजाना

 

राजेश अंजना, हिमालिनी अंक मार्च 025 । नेपाल में भारत के प्रभाव को समाप्त करने के लिए चीन और अमेरिका दोनो अपनी अपनी चाल चल रहे हैं । एक तरफ जहां चीन नेपाल के मधेश से लेकर पहाड़ तक भारत के प्रभाव को खत्म करने हेतु नेपाल के व्यापार से लेकर सोशल एक्टिविटी, किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के दृष्टिकोण से किसानी का खेत लीज पर लेने सहित विभिन्न तरह के योजनाओं में पैसा लगाकर अपना प्रभाव जमा रहे वहीं दूसरी तरफ अमेरिका भी नेपाल अपना पांव जमाने किए अब राजा कार्ड खेलना शुरू कर दिया हैं । जिसको लेकर नेपाल के वीरगंज सहित विभिन्न स्थानों पर नेपाल के पूर्व नरेश के पक्ष में आंदोलन शुरू हो गया है ।
अमेरिका द्वारा नेपाल में राजा कार्ड खेला जा रहा है और बदनाम भारत को किया जा रहा है । नेपाल में स्थिर सरकार नहीं होने के के कारण लोगों का भी झुकाव राजा और राजतंत्र के तरफ बढ़ता रहा है । जिसके परिणाम स्वरूप काठमांडू से लेकर वीरगंज तक आंदोलन तेज हो गया है । जिस कारण सत्ताधारी दल और विपक्ष सकते में है । इस आंदोलन में लोगों के उमड़ रहे जनसैलाब से सरकार हिल गई है । इस तरह दोनों देशों के द्वारा राजनीतिक खेल जारी हो गया है ।

पिछले दिनों में नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली के चीन भ्रमण के दौरान चीन द्वारा बीआरआई प्रोजेक्ट क्रियान्वयन करने पर जोर दिया गया । जिस पर ओली द्वारा सकारात्मक आश्वासन दिया गया । इसके साथ ही चीन द्वारा सभी वैसे कम्युनिस्ट पार्टी जो चीन समर्थक है जैसे नेकपा माओवादी केंद्र के सुप्रीमो सह पूर्व पीएम पुष्प कमल दहाल उर्फ प्रचंड को भी साथ लेकर चलने का दबाव दिया गया । ताकि चीन का भी दबदबा सरकार में बना रहे । इसके साथ ही कालांतर में नेपाल में बढ़ते चीनी दखलंदाजी से न केवल भारत अपितु नेपाल का भविष्य भी खतरा में पड़ता दिख रहा है । बल्कि भारत से अधिक परेशानी नेपाल और नेपाली जनता को भुगतना पड़ सकता है । नेपाल के पोखरा में चीन द्वारा निर्मित हवाई अड्डा निर्माण से लेकर चीन अधिकृत तिब्बत के तरह नेपाली भूमि के अधिग्रहण का मसला तो है ही । इसके अतिरिक्त जिस देश के सत्ता प्रतिष्ठान से लेकर मीडिया माध्यमों तक मे नेपाल चीन मैत्री और भारत की मुखालफत भरी रहती थी । इसकी शुरुआत जुलाई २०१९ में नेपाल के गोरखा जिले के रुई गाँव के भूमि पर चीन के कब्जे की खबर आने के साथ हुआ था ।

यह भी पढें   ‘शोक और पीड़ा के इस समय में किसी तरह की कोई राजनीति नहीं करें – ओली

 

इस घटना के थोड़े दिन पूर्व ही भारत द्वारा नेपाली भूमि का अतिक्रमण को मुद्दा बना कर नेपाली जनता की जनभावनाओं को यहाँ भड़काया गया था । लिपुलेख और कालापानी के मुद्दे पर आवागमन पूरे नेपाल में भारत विरोधी भावनायें उबाल पर थी ।किंतु गोरखा से हुमला जुमला तक नेपाली भूमि पर चीनी कब्जे की खबर आने के बाद भी सर्वत्र एक मौन सा छाया था । जहाँ सत्ता प्रतिष्ठान इसे झुठलाने मे लगा था । लुम्बिनी मे चीनी सहयोग से निर्माणाधीन एयरपोर्ट तक सभी गोरखा की उस घटना से लेकर पोखरा के नये हवाईअड्डा के विकास एवं भारत सीमा के लुम्बिनी में चीनी सहयोग से निर्माणाधीन एयरपोर्ट निर्माण के लिए चीन द्वारा दिए गए कर्ज के बोझ में दबा है नेपाल । बीआरआई प्रोजेक्ट पर भी नेपाल सरकार चीन के साथ समझौता कर चुकी है । चीन के ऋण जाल में नेपाल इस कदर फंस गया है कि उससे बाहर निकलना नेपाल के लिए मुश्किल होता जा रहा है । यही कारण है कि नेपाल की अर्थव्यवस्था इन दिनों काफी खराब हो गयी है । कई कल कारखाने बंद हो गए हैं । बैंक द्वारा किसी को बड़ा लोन भी नहीं मिल पा रहा है जिसका लाभ उठाकर चीन नेपाल में धीरे धीरे घुसता जा रहा है । चीनी नागरिकों द्वारा नेपाल में तरह तरह के कारोबार कर नेपाल में अपना कब्जा जमाना शुरू कर दिया है । नेपाल के सीमाई क्षेत्र वीरगंज परवानीपुर, जीतपुर में भी चीनी नागरिक तरह तरह के कारोबार कर भारत विरोधी गतिविधि तेज कर दिए हैं ।

यह भी पढें   तबाही पर चीन का 'डबल गेम': चीनी विदेश मंत्रालय ने नेपाल पर ही मढ़ा दोष, ड्रैगन द्वारा विरोधाभासी बयान?

पिछले दिनों वीरगंज से गिरफ्तार लगभग आधे दर्जन चीनी नागरिक इसका स्पष्ट प्रमाण हैं । इनके कार्यालय से भारी मात्रा में लैपटॉप, कम्प्यूटर पेनड्राइव, सहित अनेक इलेक्ट्रोनिक सामान बरामद हुआ था । जिससे सॉफ्टवेयर चोरी कर भारत की जासूसी करने का मामला भी प्रकाश में आया था । यदि समय रहते नेपाल सरकार द्वारा नेपाल में चीनी गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई गई तो नेपाल का अस्तित्व समाप्त हो सकता है । इस प्रकार अब चीनी नागरिक भी नेपाल में आसानी से प्रवेश कर फर्जी कारोबार के आड़ में भारत की जासूसी करने में लगा है । जबतक नेपाल चीन पर अपनी निर्भरता कम नहीं करेगा और उसके द्वारा दिए जाने वाला ऋण का वहिष्कार नहीं करेगा । तबतक नेपाल की अर्थव्यवस्था कमजोर होते जाएगा । जिसके परिणामस्वरूप नेपाल को एक दिन चीन का गुलाम बनाना पड़ सकता है । क्योंकि ऋण देकर नेपाल को इतना आर्थिक बोझ लाद देगा कि नेपाल जीवन भर उसे चुकता करने में लगा रहेगा । हालांकि नेपाल के साथ कई बार इस तरह की घटनाएं हो चुकी है । बावजूद इसके नेपाल चीन के आधिपत्य को स्वीकार करने से नहीं चूक रहा है । जैसा जैसा चीन कह रहा है वैसा वैसा नेपाल कर रहा है । चाहे वो नेपाल में व्यापार का मामला हो या राजनीतिक मामला, भारत विरोध का मामला हो या फिर संघ संस्था का मामला हो सभी में चीन की भूमिका अहम रहती है । नेपाल को मोहरा बनाकर चीन भारत के साथ अपना दांव साध रहा है ।

यह भी पढें   अब तक १८७ पर्यटकों को सुरक्षित निकाला गया, ४२० पर्यटक सम्पर्क से बाहर

 

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com