Fri. May 22nd, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें
 
रीता_मिश्रा_तिवारी
*****
तर्जनी से तीन बार नाक को सहलाया फिर मन को कहा.. “इतने सारे लोग यहां इकठ्ठा…! जरा देखूं बात क्या है..?”
गाड़ी का गेट खोलकर बाहर निकल एकत्रित लोगों में से एक बुजुर्ग भलमानस से सवाल किया..”क्या हो रहा है यहां..? कोई करतब या एक्सिडेंट हुआ है क्या..?”
वो पूछता रहा पर किसी के पास उसके सवालों का उत्तर नहीं था।
वो हर किसी की आँखों में जवाब ढूंढता रहा।
उचक कर देखने की कोशिश तो कभी बाजू को पकड़ कर साइड करता वो आगे बढ़ता जा रहा था कि तभी मिले जुले शब्द उसके कानों से टकराए..!
“भीख मांगने का नया तरीका अपनाया है बेशरम ने।”
“शायद कोई मजबूरी हो भाई साहब..नहीं तो अपनी इज्ज़त का तमाशा थोड़े कोई ऐसे बनाएगा..!”
“हो सकता है इसके साथ कुछ बुरा हुआ हो..!”
सुनकर युवक हतप्रभ था। पर माजरा समझने से पहले उसका फ़ोन बज गया। न चाहते हुए भी लगातार बजते फोन ने उठाने पर विवश किया..
“कहां हो..? और कितनी देर..? समय निकला जा रहा है। तुम्हीं बताओ और कितना वक्त लगेगा आने में..?अधिर हुए जा रहे हैं सब..! जल्दी आओ..।”
सवालों के बौछार का उसने मुस्कुरा कर कहा..
“मां..! इंतजार का फल मीठा होता है बस कुछ ही समय…!”
मोबाइल जींसपैंट में बने पॉकेट के हवाले कर आगे बढ़ा वो।
आँखें फट कर चौड़ी हो गई चेहरा पीला पड़ गया उसका..!
तेज़ कदमों से नजदीक गया कोट उतार कर ढक दिया उसे..!
घुटने में छुपा चेहरा “नहींहींहीं…” की चीख के साथ ऊपर उठा..
 “डरो नहीं”
सुनकर दोनों हाथ स्वतः जुड़ गए और आँखें पथरा गई उसकी।
क्रोध से उस युवक की आँखें दहक रही थी जैसे आग का गोला हो..जोर से ताली बजाते बोला..
“वाह भई वाह आप तमाशविनों को क्या ही कहें..!
कुछ बचा ही नहीं बस इतना जान लीजिए की गर आपकी बेटी बहु होती तो क्या ऐसे ही बुत बने अनाप शनाप बकते रहते।
ओह ये मैं किससे क्या कह रहा हूं जिनकी इंसानियत ही मर गई है..!”
कंधों को पकड़ कर पीड़िता को उठाया। खून से रंगी जमीन सूखी पड़ी थी।
सप्ताह बाद उस यूवक ने उसे हॉस्पिटल से घर लेकर आ गया।
सवाल की उम्मीद में वो घरवालों की आँखों में झांका पर वहां तो उसे सहानुभूति और प्यार दिखा।
संतोष का निःस्वांस अंदर भरा और उसे माँ के कहने पर कमरे में छोड़ आया।
कहते हैं समय पंख लगा कर चलता है।
सही है..
पता नहीं चला कब संभाल ली वो खुद को और कब सबके दिलों में बस गई।
लोग बोलते हैं और बोलेंगे ही.. आज सुबह दरवाजे पर वैसे ही उसी दिन की तरह लोग इक्कठे जुबान से आग उगल रहे थे..
“न जाने कहां से मुह काला करके आई है..!
और आप लोगों ने इसे सर पे चढ़ा रखा है।
किस रिश्ते से रह रही है..?
मटकती रहती है आपके बेटे संग।
मुहल्ला खराब कर रखा है..!
जरा भी ख्याल है..?क्या असर पड़ेगा हमारी बहु बेटियों..?”
पिता के मुंह खोलने से पहले युवक ने इशारे से रोक दिया।
“अच्छे समय पर आए है आप लोग..बुलाने की मेहनत से बच गए हम। आगे बढ़कर युवक की माँ ने कहा..
बेटा..! माता रानी के चढ़ाए सिंदूर से इसकी मांग भरकर रिश्तों में बांध दे और भीड़ का मुंह भी बंद कर दे…!”
मां के कथन से पिता खुश थे ।
भीड़ को संबोधित करती मां बोली..” कल मेरे बेटे बहु के रिसेप्शन पार्टी में आप सभी आमंत्रित हैं। कृप्या आइएगा ज़रूर।
#रीता_मिश्रा_तिवारी
#सेवा निवृत शिक्षिका,कथाकार, कहानीकार,कवियत्री
#भागलपुर_बिहार

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *