पाठक के विरुद्ध जारी गिरफ्तारी वारंट को लेकर संपादकों ने वारंट रद्द करने की मांग की
काठमांडू, जेठ ३१ – विभिन्न संचार माध्यम के सम्पादकों ने पत्रकार दिलभूषण पाठक के विरुद्ध जारी गिरफ्तारी वारंट को रद्द करने की मांग की है । शनिवार (जेठ ३१) संयुक्त विज्ञप्ति जारी करते हुए उन्होंने विद्युतीय कारोबार ऐन जैसे भिन्न उद्देश्य से बनाए गए कानून का प्रयोग कर गिरफ्तारी वारंट जारी करने को लेकर अपनी आपत्ति जताई है ।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि “भिन्न उद्देश्य से बनाए गए कानून की धाराओं का दुरुपयोग कर सत्ता के प्रभाव में पुलिस को सक्रिय करते हुए पत्रकार को गिरफ्तार करने की कोशिश निंदनीय है। इससे पहले भी कानून का ऐसा दुरुपयोग होता रहा है।”
संपादकों ने यह भी स्पष्ट किया है कि पत्रकारों को अपने द्वारा प्रकाशित या प्रसारित सामग्री की पूरी जवाबदेही वहन करनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “इसलिए हम राज्य का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हैं कि विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में सम्बन्धित कानूनों के प्रावधानों का सम्मान किया जाए और पत्रकार दिलभूषण पाठक के विरुद्ध जारी गिरफ्तारी वारंट को रद्द किया जाए।”
विज्ञप्ति में आगे लिखा गया है कि – साथ ही हम सरकार और संसद का ध्यान इस ओर भी आकर्षित करना चाहते हैं कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकार को सीमित करने वाले विद्युत कारोबार ऐन में निहित गलत प्रावधानों को संशोधन की प्रक्रिया में लाया जाए।”
इसके साथ ही सम्पादकों ने बिजमाण्डू और नेपालखबर डटकम सहित के ऑनलाइन न्यूज पोर्टल में प्रकाशित समाचार के विषय में भी काठमांडू जिला अदालत ने जो आदेश दिया है उस आदेश प्रति असहमति व्यक्त की है । जारी विज्ञप्ति में प्राय सभी संचार माध्यम के सम्पादकों के हरुताक्षर हैं ।
काठमांडू के नक्साल स्थित होटल हिल्टन में नेपाली कांग्रेस के सभापति शेरबहादुर देउवा और परराष्ट्रमंत्री आरजु राणा दम्पती पुत्र जयवीर की लगानी है । पाठक ने अपने ‘रिपोर्ट’ में अपने चैनल यूट्यूब में प्रसारित की थी । इसके बाद जयवीर की शिकायत के आधार पर पुलिस ने पाठक को गिरफ्तार करने के लिए काठमांडू जिला अदालत से अनुमति प्राप्त की।
इसी तरह नेपाल धितोपत्र बोर्ड के अध्यक्ष सन्तोष नारायण श्रेष्ठ द्वारा दायर किए गए मुद्दें में अदालत ने बिजमांडू और नेपालखबर में प्रकाशित समाचार को ‘डिलीट’ करने का आदेश दिया था ।

