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पर्यावरणीय संकट पर निर्णायक हस्तक्षेप की आवश्यकता : सांसद रामअशीष यादव

 

जनकपुरधाम, १६ असार।मधेश प्रदेश के सांसद रामअशीष यादव ने कहा है कि पर्यावरणीय प्रदूषण मानव जीवन पर प्रत्यक्ष प्रभाव डाल रहा है, इसलिए इसके संरक्षण के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाने अत्यावश्यक हैं।

जनकपुरधाम में अनौपचारिक क्षेत्र सेवा केन्द्र (इन्सेक) मधेश प्रदेश द्वारा आयोजित “प्रदेश स्तरीय पर्यावरण अधिकारकर्मी क्षमता अभिवृद्धि कार्यक्रम” में बोलते हुए सांसद यादव ने जल, भूमि, वायु और ध्वनि प्रदूषण को मानव जाति के लिए एक गम्भीर खतरा करार दिया। उन्होंने कहा, “इन चारों प्रकार के प्रदूषण के स्रोतों को नियंत्रण में लाकर संरक्षण और संवर्द्धन करना आज की प्रमुख आवश्यकता है। इसके लिए सम्पूर्ण मानव जाति को स्वयं आगे आना होगा।”

डिजिटल माध्यम से अपनी प्रस्तुति देते हुए सांसद यादव ने बताया कि प्रदूषण के कारण भूमिगत जलस्तर दिन-प्रतिदिन गिरता जा रहा है, जिससे शुद्ध पानी प्राप्त करना कठिन होता जा रहा है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “अब भविष्य का युद्ध प्रदूषण के विरुद्ध होगा। इसलिए तीनों स्तर की सरकार के साथ-साथ आम नागरिकों की भी सहभागिता अनिवार्य है।”
प्लास्टिक उपयोग और भूमि प्रदूषण पर चिंता

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सांसद यादव ने प्लास्टिक, पॉलीथिन और कचरा जैसे पदार्थों के बढ़ते उपयोग से भूमि और जल प्रदूषण में वृद्धि हुई बताकर इसकी गम्भीरता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “भूमि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए युवाओं को प्लास्टिक की जगह माटी के बर्तनों का उपयोग करना चाहिए। इससे हमारी संस्कृति की रक्षा तो होगी ही, साथ ही स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।”
प्रदूषण और मानव मृत्यु के बीच सम्बन्ध

एक आँकड़ा प्रस्तुत करते हुए सांसद यादव ने बताया, “विश्व भर में वायु प्रदूषण के कारण प्रति वर्ष लगभग ४२ लाख लोगों की मृत्यु होती है। नेपाल में ही हर साल करीब ३,५०० लोगों की जान प्रदूषण के कारण जाती है। और इससे भी अधिक गम्भीर बात यह है कि नेपाल में केवल २५ प्रतिशत नागरिकों को ही स्वच्छ पेयजल की सुविधा प्राप्त है।”

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उन्होंने सुझाव दिया कि जहाँ यातायात अधिक होता है, वहाँ वायु प्रदूषण अधिक होता है—ऐसे स्थानों पर हरियाली का विस्तार और सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
चुरे दोहन और जल संकट के बीच सम्बन्ध

कार्यक्रम के एक अन्य वक्ता, वनस्पति अनुसन्धान केन्द्र के प्रमुख ताहिर हुसैन ने कहा कि चुरे क्षेत्र के अतिक्रमण और दोहन के कारण तराई-मधेश में जल संकट उत्पन्न हुआ है। उन्होंने धनुषाधाम क्षेत्र का उदाहरण देते हुए सुझाव दिया कि जहाँ जंगल नष्ट हो चुके हैं, वहाँ औषधीय एवं आर्थिक उपयोगिता वाले पौधों को रोपकर पर्यावरणीय संतुलन के साथ आर्थिक लाभ भी प्राप्त किया जा सकता है।

उन्होंने कहा, “पहले ५०–६० फीट पर ही पानी मिल जाता था, अब तो कई स्थानों पर ४५० फीट गहराई में भी पानी नहीं मिलता। यदि चुरे क्षेत्र का संरक्षण नहीं किया गया, तो भूजल स्तर और नीचे चला जाएगा।”
मानव अधिकारकर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण

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कार्यक्रम में प्रशिक्षक बुधनारायण सहनी ने पर्यावरण संरक्षण में मानव अधिकारों और मानव अधिकार रक्षकों की भूमिका पर डिजिटल प्रस्तुति दी। इसी क्रम में मिडिया काउन्सिल के पूर्व अध्यक्ष कैलाश दास ने कहा, “पर्यावरण संरक्षण हमारा न्यायिक और मानव अधिकार है। जब पर्यावरण स्वच्छ होगा, तभी मानव जीवन स्वस्थ रह सकता है।”
आठ जिलों की सहभागिता

इन्सेक मधेश प्रदेश संयोजक राजु पासवान की अध्यक्षता में आयोजित इस दो दिवसीय कार्यक्रम में मधेश प्रदेश के आठों जिलों से आए मानव अधिकारकर्मी एवं पर्यावरण क्षेत्र में कार्यरत प्रतिनिधियों की सहभागिता रही।
सभी सहभागी प्रतिनिधियों ने पर्यावरणीय संकट के विभिन्न पहलुओं पर विचार साझा करते हुए प्रभावशाली समाधान की आवश्यकता पर बल दिया।

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