जब तक समानता पर आधारित व्यवस्था नहीं, लोकतांत्रिक गणराज्य का कोई अर्थ नहीं है : यादव
जनता समाजवादी पार्टी, नेपाल के अध्यक्ष उपेंद्र यादव ने कहा है कि जब तक समानता पर आधारित व्यवस्था नहीं होगी, लोकतांत्रिक गणराज्य का कोई अर्थ नहीं है।
शनिवार को काठमांडू में दलितों, पिछड़े वर्गों, थारू, मूलनिवासियों और अल्पसंख्यकों के एक राष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए, उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेशाें का ढाँचा गोल-मोल बनाया गया है।
यादव ने कहा, “जब तक संपन्न और वंचित के बीच की खाई को पाटा नहीं जाता, तब तक एक जाति, एक समुदाय और एक शासक को विशेष अवसर मिलते रहेंगे, बाकी वंचित रह जाएँगे। तब तक इस देश में न तो शांति, न स्थिरता, न विकास और न ही समृद्धि आ सकती है।” उन्होंने आगे कहा, “इसलिए, अब इस ढाँचे को ध्वस्त करना होगा, इसे समाप्त करना होगा। राजनीतिक लोकतंत्र को सामाजिक लोकतंत्र और समावेशी लोकतंत्र के मॉडल में बदलना होगा।”
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जब तक लोकतंत्र को समावेशी नहीं बनाया जाता और लैंगिक असमानता और भेदभाव को समाप्त नहीं किया जाता, तब तक देश में शांति, स्थिरता, विकास और समृद्धि प्राप्त नहीं होगी।
यादव ने कहा, ‘जब तक नेपाल में इन प्रदेशाें का स्वरूप पहचान और शक्ति पर आधारित नहीं होगा, लोकतंत्र को समावेशी नहीं बनाया जाएगा, प्रतिनिधित्व जनसंख्या पर आधारित नहीं हो सकता, जब तक सभी भाषाओं को समान रूप से मान्यता नहीं दी जाती, जब तक राज्य महिलाओं के साथ पुरुषों और महिलाओं के बीच भेदभाव करता है, राज्य उसे बनाए रखता है, जब तक राज्य लैंगिक असमानता और भेदभाव को समाप्त नहीं करता, जब तक मधेशी और गैर-मधेशी के बीच भेदभाव समाप्त नहीं होता, साथ ही दलित और गैर-दलित के बीच भेदभाव समाप्त नहीं होता, जब तक मूल निवासियों और अन्य लोगों के बीच भेदभाव समाप्त नहीं होता।’


