एक साल, एक संसद और दो सत्ताधारी—ओली बनाम प्रचण्ड
काठमांडू, 15 जुलाई 2025 – नेपाल में कांग्रेस-एमाले गठबंधन सरकार के एक वर्ष पूरा होने के अवसर पर प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और माओवादी अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचण्ड’ के बीच संसद में तीखी बहस देखने को मिली। प्रधानमंत्री ओली ने अपने कार्यकाल को सफल बताया, जबकि दाहाल ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
प्रधानमंत्री ओली का दावा: “सरकार की उपलब्धियाँ ठोस और पारदर्शी”
प्रधानमंत्री ओली ने सुबह सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा:
- “एक वर्ष के भीतर आर्थिक संकेतक सकारात्मक हुए हैं।”
- “विकास योजनाओं की गति तेज हुई है।”
- “ऑनलाइन सेवाओं और कानून संशोधन से नागरिकों को राहत मिली है।”
ओली ने टाइमलाइन आधारित कार्यसंस्कृति को नया चलन बताया और कहा कि अब ‘लाइन में नहीं, ऑनलाइन’ सेवाओं का युग शुरू हुआ है।
प्रचण्ड का हमला: “सरकार बिचौलियों की कठपुतली बन चुकी है”
दोपहर संसद में बोलते हुए माओवादी अध्यक्ष प्रचण्ड ने सरकार की तीखी आलोचना की:
- “संसद और समितियाँ अब बिचौलियों का खेल मैदान बन गई हैं।”
- “शिक्षा विधेयक से लेकर संवैधानिक निकायों तक में सत्ता पक्ष ने अपने स्वार्थ साधे हैं।”
- “सरकार ने दलित, महिला, मधेश और सुदूरपश्चिम के कार्यक्रमों को काटकर भव्य आयोजन और भवन निर्माण में फिजूल खर्च किया है।”
उन्होंने सरकार पर भ्रष्टाचार, राजनीतिक हस्तक्षेप, और संस्थानों को कमजोर करने का भी आरोप लगाया।
क्रिकेट स्टेडियम से लेकर भिजिट वीजा घोटाले तक सवालों की बौछार
प्रचण्ड ने कहा कि कीर्तिपुर क्रिकेट रंगशाला का काम ओली सरकार के समय ठप हुआ। फ्लडलाइट और प्यारापिट आज भी अधूरे हैं।
जवाब में ओली बोले—”मैदान जाकर खुद देखिए, काम हो रहा है। फर्क इतना है कि मैंने टाइमलाइन के साथ काम किया, आपके पास न कोई संकल्प था, न नतीजा।”
भिजिट वीजा कांड और सुरक्षा खरीद की बहस
दाहाल ने सरकार पर भिजिट वीजा प्रकरण की निष्पक्ष जांच से पीछे हटने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को प्रशासनिक भूल बताना एक राष्ट्रीय जांच को दबाने की कोशिश है।
साथ ही, पुराने समय में रोक दी गई सुरक्षा सामग्री खरीद प्रक्रिया को फिर से शुरू करने पर भी सवाल उठाया।
संविधान संशोधन पर भी प्रचण्ड की नाराजगी
प्रचण्ड ने कहा कि सरकार का संविधान संशोधन केवल सत्ता के लिए किया गया स्वार्थ आधारित कदम था, जिसमें जनता के साथ छल किया गया।
सरकार के एक वर्ष पूरा होने पर प्रधानमंत्री और पूर्व प्रधानमंत्री के बीच संसद में जिस तरह के आरोप–प्रत्यारोप हुए, उससे यह स्पष्ट है कि नेपाली राजनीति में सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव और भी तेज हो सकता है। एक ओर ओली सरकार अपनी प्रगति का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर पूर्व सहयोगी रहे प्रचण्ड उसे जनविरोधी, पक्षपाती और भ्रष्ट बता रहे हैं। स्रोत: कान्तिपुर दैनिक


