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भविष्य के नेतृत्व पर केंद्रित हुई एमाले की बैठक, आंतरिक असहमति भी उभरकर आई

 

काठमांडू, ५ साउन: । नेकपा एमाले की नवौं केन्द्रीय समिति की बैठक का पहला दिन पार्टी के भावी नेतृत्व के मुद्दे पर केंद्रित रहा। हालांकि बैठक का उद्देश्य आगामी विधान महाधिवेशन के लिए नीतिगत एवं सैद्धांतिक मसौदा तैयार करना था, लेकिन अधिकांश नेताओं की चर्चा अध्यक्ष केपी शर्मा ओली के इर्द-गिर्द ही घूमती रही।

बैठक में धारणा रखने वाले ४९ में से लगभग सभी नेताओं ने नेतृत्व को ही मुख्य विषय बनाया। यह प्रवृत्ति स्वयं अध्यक्ष ओली द्वारा पूर्व राष्ट्रपति विद्या भण्डारी के पार्टी सदस्यता प्रसंग को उठाए जाने के बाद और स्पष्ट हो गई। ओली ने अप्रत्यक्ष रूप से भण्डारी के राजनीतिक व्यवहार पर सवाल उठाते हुए चेतावनी भरे शब्दों का प्रयोग किया।

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बैठक में उपाध्यक्ष विष्णु पौडेल द्वारा प्रस्तुत संविधान संशोधन का मसौदा और महासचिव शंकर पोखरेल द्वारा रखी गई संगठनात्मक रिपोर्ट पृष्ठभूमि में चली गई। बहस नोट समिति के सदस्य विष्णु रिजाल का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियाँ नेताओं को नेतृत्व पर राय रखने के लिए प्रेरित करती हैं।

कई केन्द्रीय सदस्यों ने ओली के पक्ष में समर्थन व्यक्त किया, तो कुछ ने अध्यक्ष के रूप में उनकी निरंतरता की औपचारिक घोषणा की मांग की। पूर्व युवा संघ अध्यक्ष राजीव पहारी ने यहां तक कहा कि वर्तमान बैठक से ही ओली को तीसरी बार अध्यक्ष घोषित किया जाना चाहिए।

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हालांकि, इस बार पहली बार कुछ नेताओं ने नेतृत्व परिवर्तन की मांग भी उठाई। गण्डकी, मधेश और सम्पर्क समन्वय क्षेत्र के प्रतिनिधियों सहित कई सदस्यों ने पार्टी में लंबे समय से कायम एक ही नेतृत्व पर सवाल उठाए। सचिवालय बैठक में वरिष्ठ उपाध्यक्ष ईश्वर पोखरेल ने ओली से नेतृत्व छोड़ने की सलाह दी थी। साथ ही, कुछ पदाधिकारियों ने पार्टी विधान में निर्धारित ७० वर्ष की आयु सीमा और अधिकतम दो कार्यकाल की सीमा को न हटाने की मांग की।

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बैठक के दौरान केन्द्रीय सदस्य रचना खड्का, दिवाकर देवकोटा, अरबिन्द सिंह आदि ने साफ शब्दों में कहा कि व्यक्ति विशेष को ध्यान में रखकर नियम बनाना या बदलना उचित नहीं है। सिंह ने तो यह भी कहा कि बैठक को विधिपूर्वक चलाया जाए और नेतृत्व को भी उसी में चलना चाहिए।

हालांकि अधिकांश नेताओं को केवल ३ मिनट का समय मिला, लेकिन कई सदस्य केपी ओली की प्रशंसा करते हुए ही अपना समय समाप्त कर रहे थे ।

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