भूमि विधेयक फिर्ता लेने की माग उठी: मधेश संवाद श्रृंखला में वक्ताओं की कड़ी आपत्ति
१७ श्रावण २०८२, काठमांडू, आलोकनगर । मधेश लाइब्रेरी एण्ड रिसर्च सेन्टर द्वारा आयोजित ‘मधेश संवाद’ श्रृंखला के २३वें संस्करण में आज “भूमि विधेयकको अन्तर्य” विषय पर एक महत्वपूर्ण अन्तरक्रिया कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह आयोजन काठमांडू के आलोकनगर स्थित मधेश लाइब्रेरी हल में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय मुक्ति पार्टी के नेता केशव झा और जनता समाजवादी पार्टी नेपाल (जसपा) के महासचिव राम कुमार शर्मा को आमंत्रित किया गया था।
कार्यक्रम के दौरान नेता केशव झा ने भूमि विधेयक की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह न तो तराई-मधेश के हित में है, न नेपाल के और न ही वैश्विक दृष्टिकोण से यह उपयुक्त है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक सुकुम्बासी और भूमिहीन लोगों के नाम पर लाया गया एक ऐसा षड्यंत्र है, जो असल में भूमाफियाओं के हित में बनाया गया है। उन्होंने इसे “महेन्द्रीय चिन्तन” से प्रेरित बताया और कहा कि इसके पीछे उद्देश्य मधेशी समुदाय को अपने ही भूमि में अल्पसंख्यक बना देना है।
नेता झा ने चेतावनी देते हुए कहा कि पहले से ही तराई-मधेश क्षेत्र में पेयजल संकट गहराता जा रहा है, और यदि यह विधेयक पास हुआ तो इस क्षेत्र को मरुभूमि में बदलने में देर नहीं लगेगी। इससे न केवल पर्यावरणीय संकट उत्पन्न होगा, बल्कि पूरे क्षेत्र की जनजीवन पर भी गंभीर खतरा उत्पन्न होगा।
जसपा महासचिव राम कुमार शर्मा ने भी विधेयक की वैधानिकता और उद्देश्य पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि इसे लागू करने से पहले सरकार को इसकी औचित्य सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने विधेयक को “त्रुटिपूर्ण” बताते हुए इसे तत्काल खारिज करने की मांग की।
इस अन्तरक्रिया कार्यक्रम का संचालन मधेश लाइब्रेरी के सदस्य शमशाद अहमद ने किया।
कार्यक्रम में वक्ताओं की स्पष्ट मांग रही कि यह विधेयक न केवल जनविरोधी है बल्कि इसके दूरगामी प्रभाव अत्यंत घातक हो सकते हैं। अतः इसे फौरन फिर्ता लिया जाना चाहिए।



