नेपाल में HDFC बैंक को मिली पहली प्रत्यक्ष विदेशी बैंकिंग सेवा की अनुमति, महालक्ष्मी बैंक के साथ साझेदारी में करेगा संचालन
काठमांडू, नेपाल। नेपाल राष्ट्र बैंक (NRB) ने भारत के प्रतिष्ठित निजी क्षेत्र के बैंक एचडीएफसी बैंक लिमिटेड (HDFC Bank Ltd.) को नेपाल में प्रत्यक्ष विदेशी बैंकिंग सेवा (Direct Foreign Banking Services) संचालित करने की अनुमति प्रदान की है। यह सेवा बैंक महालक्ष्मी विकास बैंक लिमिटेड के साथ साझेदारी में संचालित करेगा। इस निर्णय से नेपाल और भारत के बीच सीमा पार लेन-देन को नया आयाम मिलेगा।
नेपाल राष्ट्र बैंक की “विदेशी बैंकिंग सेवा नीति २०८२” के अंतर्गत यह पहली बार हुआ है कि किसी विदेशी बैंक को बिना शाखा खोले नेपाल में सीमा पार वित्तीय सेवा संचालन की स्वीकृति मिली है।
सेवाओं का दायरा और प्रभाव
एचडीएफसी बैंक अब नेपाल में कैश मैनेजमेंट सर्विस (CMS), ई-कैश मैनेजमेंट सर्विस (e-CMS), NEFT, RTGS, और फंड ट्रांसफर (FT) जैसी सेवाएं प्रदान कर सकेगा। इन सेवाओं के माध्यम से बैंक सीमा पार चेक संग्रह, इलेक्ट्रॉनिक भुगतान और व्यापारिक वित्तीय समाधान उपलब्ध कराएगा।
यह साझेदारी विशेष रूप से नेपाल और भारत के व्यापार, निवेश और प्रेषण (remittance) को और अधिक तेज, पारदर्शी और डिजिटल बनाएगी। नेपाली ग्राहक HDFC बैंक के माध्यम से भारत और अन्य देशों में आसानी से लेन-देन कर सकेंगे।
साझेदारी का महत्व
एचडीएफसी बैंक की नेपाल में यह सेवा महालक्ष्मी विकास बैंक के सहयोग से संचालित होगी, जो एक स्थानीय बैंक के रूप में HDFC को प्लेटफॉर्म और प्रक्रिया सहयोग प्रदान करेगा। इस मॉडल को “सेवा-आधारित संचालन” (Service-Based Operation) कहा जाता है, जहाँ विदेशी बैंक स्थानीय बैंक के माध्यम से अपनी सेवाएं प्रदान करता है।
प्रवक्ता का कथन
एचडीएफसी बैंक ने इस नई पहल के लिए “Direct Foreign Banking – Nepal Entity” नाम से विशेष सेवा शुरू की है। बैंक का कहना है कि इससे न केवल व्यापारियों और कॉर्पोरेट्स को लाभ होगा, बल्कि विदेशों में कार्यरत नेपाली नागरिकों को भी अपनी कमाई को तेज़ और सुरक्षित तरीके से नेपाल भेजने की सुविधा मिलेगी।
संक्षेप में:
एचडीएफसी बैंक को नेपाल में प्रत्यक्ष विदेशी बैंकिंग सेवा संचालन की पहली अनुमति मिली है, जो महालक्ष्मी विकास बैंक के साथ साझेदारी में कार्य करेगा। यह पहल नेपाल के वित्तीय क्षेत्र में डिजिटलीकरण, पारदर्शिता और क्षेत्रीय एकीकरण को बढ़ावा देगी।


