जनता की पीड़ा में बीमा कम्पनियां उनके साथ हैं : कविता दास


जिन्दगी का नाम है, चाहतों और उम्मीदों के साथ जीना और इसलिए इंसान अपनी जिन्दगी में बहुत कुछ करना चाहता है । अपना एक आशियाना, सुखी परिवार और हँसती खेलती जिन्दगी, कमोवेश यही तो चाहत होती है एक आम इंसान की । वह इसी में अपने सुख को खोजता है और पाकर सुखी होता है । किन्तु कौन जानता है कि कब किसकी नजर लग जाय और हँसता खेलता परिवार बिखर जाय । सब कुछ होते हुए भी कुदरत के आगे हम सब बेबस हो जाते हैं, यही हुआ २५ अप्रैल २०१५ सुबह ११.५६ में जब महाभूकम्प ने नेपाल में दस्तक दी वह भी ७.९ रेक्टर का, पूरे नेपाल में महाभूकम्प ने तबाही मचा दी , हजारों लोग मारे गए । प्राचीन धरोहरें नष्ट हो गयीं, कितनों के घर उजड़ गए, नजरों के सामने संचित धन से बनाया घर मलबे में परिणत हो गया, करोड़ों रुपए की संपत्ति नष्ट हुई है । देखते ही देखते क्षण में सब नष्ट हो गया । गाँव के गाँव उजड़ गए । बस्तियाँ वीरान पड़ी हैं । पथराई आँखें जिन्दगी को तलाश रही हैं । ऐसे में अभी सबसे बड़ी जिम्मेदारी बीमा कम्पनियों पर आ गई है ।
महाभूकम्प के कारण नेपाल के सभी जिला में भौतिक और मानवीय क्षति होने पर बीमा कंपनी के ऊपर बहुत बड़ा दबाब आया है । बड़े पैमाने मे क्षति से क्षतिपूर्ति में असहजता महसूस हो रही है । नेपाल में करीब १०० सर्वेयर है जो बहुत कम हैं । बहुत से जगहों पर उनका पहँुचना और क्षति आँकलन करना मुश्किल हो रहा है । अभी सभी बीमा कंपनी पीडि़त को मद्दत करने में अपनी अपनी रणनीति बनाने में जुटी हुई है । बीमा समिति द्वारा दिए गये निर्देशन के अनुसार जल्द से जल्द दावा किए गए राशियों का वितरण किया जायेगा ।
नेपाल में २ करोड़ की आबादी में हालांकि ८००० से अधिक लोगो की मरने की संख्या बताई जाती है, जिसमें बस ५ फीसदी ने ही जीवन बीमा करवाया है । भौतिक क्षति बीमा, दुर्घटना बीमा, सवारी साधन बीमा पर ज्यादा दावी हो सकता है । कंपनियों के लिए भी स्थिति चिंताजनक नहीं है ।
राष्ट्रीय बीमा संस्था के कार्यकारी निर्देशक अश्विनी कुमार ठाकुर ने बताया है कि नेपाल में आये महाभूकम्प से जो क्षति हुई है उसमे उनकी संस्थान का सामजिक दायित्व विपत्ति में रहे परिवार का सहयोग करना, राहत देना है । ठाकुर ने यह भी बताया उनकी संस्था ने अभी ३०,००० किलो चावल वितरण किया है । यह ५ जिले में दिया गया सिन्धुपाल्चोक, नुवाकोट, भक्तपुर, गोरखा और पाटन सिंधुपालचौक में सबसे पहले राष्ट्रीय बीमा संस्थान के द्वारा राहत प्रदान किया गया था । ठाकुर ने कहा कि इस महाभूकम्प में जो जन–धन का नुकसान हुआ है उसमे राष्ट्रीय बीमा संस्था पूरी तरह से आहत और पीडि़त जनता के साथ है ।
अश्विनी कुमार ठाकुर ने बीमा संस्थान की भूमिका पर खुल कर कहा कि पहले वह पीडि़त को राहत सामग्री जल्द पहुँचाना चाहते हंै उसके बाद जिस पीडि़त का घर भूकम्प से क्षतिग्रस्त हो गया है और बीमाकृत किया गया है और वह दावा करता है तो उन्हें जल्द भुक्तानी किया जाएगा । ठाकुर ने यह भी कहा कि मृत्यु बीमा की लम्बी प्रकिया है और औपचारिकता भी ज्यादा है पर अभी इस महाभूकम्प से जिन लोगों की मृत्यु हुई है और उनके परिवारजन बीमा दावी करने आते हैं तो उन्हें कुछ न्यूनतम दस्तावेजÞ रखकर जल्द भुक्तानी मिलेगा । ठाकुर ने कहा कि हमारे उपर सामाजिक दायित्व ज्यादा है और हमारा संस्थान सक्रिय भी है दायित्व पूरा करने के लिए ।
नेपाल अभी बहुत बुरे वक्त से गुजर रहा है इसमें अभी कोई भी बीमा दावा के लिए नहीं आया है पर १० ÷१ ५ दिन में हो सकता है कि लोग दावा करने के लिए आएँ, हम उनका पूरी तरह से सहयोग करेंगे ।
अंत में अश्विनी कुमार ठाकुर ने कहा कि हम सभी नेपाली जनता जो महाभूकम्प से पीडि़त हैं, उनकी पीड़ा तो नहीं मिटा सकते हैं, पर उनकी पीड़ा से हम भी पीडि़त हैं और जो भी सहयोग हो सकता है वह हम पूरी तरह से देंगे ।
२५ अप्रैल का दर्द और पीड़ा जो नेपाल जनता भोग रही है, उसमें सबको साथ मिलकर आगे बढ़ना होगा । सभी संघ संस्था को पूरी तरह से मदद करनी होगी–
जिन्दगी गुजर जाती है
एक मकान बनाने में
और कुदरत उपÞm तक नहीं करती
बस्तियाँ गिराने में
न उजाड़ ये खुदा
किसी के आशियाने को
वक्त बहुत लगता है
एक छोटा सा घर बनाने में ।
(साभार ः फेसबुक)

