एमाले के निर्णय काे कुठाराघात मानते हुए अपीलपत्र भेजने की तैयारी में भण्डारी
एमाले की पूर्व उपाध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी, एमाले महाधिवेशन के प्रतिनिधियों को एक अलग अपील पत्र भेजने की तैयारी कर रही हैं।
वह प्रतिनिधियों को यह संदेश देने की तैयारी कर रही हैं कि एमाले ने उनके विश्वास और भरोसे के साथ विश्वासघात किया है। वह लिखित रूप में कारण और उनके खिलाफ उठाए गए कदमों की व्याख्या करने की तैयारी कर रही हैं।
भंडारी के करीबी सूत्रों के अनुसार, वह प्रतिनिधियों को यह संदेश देने की कोशिश कर रही हैं कि पार्टी में किसी और को उनके जैसा हश्र नहीं सहना चाहिए।
भंडारी, पार्टी द्वारा उनकी सदस्यता रद्द करने की कार्रवाई को, अपने साथ विश्वासघात मानती हैं।
वह इसे खेदजनक मानती हैं कि पार्टी के एक विशेष निर्णय से वह राष्ट्रपति बनीं और उस जिम्मेदारी से लौटने के बाद भी पार्टी में सक्रिय रहने की कोशिश काे राेकना सही नहीं है ।
सीपीएन (यूएमएल) केंद्रीय समिति की श्रावण 5 और 6, 2082 को हुई बैठक में उनकी सदस्यता समाप्त करने का निर्णय लिया गया था।
भंडारी की शिकायत है कि उनकी सदस्यता नवीनीकरण के दौरान और उसके बाद पार्टी की बैठकें हुईं और उन बैठकों में कोई सवाल नहीं उठाया गया, लेकिन अब इस मामले को उठाकर उनके साथ अन्याय किया गया।
एमाले का महा अधिवेशन शुक्रवार से शुरू हो रहा है।


