दिनकर एक विहंगम दृष्टि
“शौर्य और ओज के ऋषि श्री रामधारी सिंह दिनकर” अक्टूबर ५,६ २०२५ को हिन्दी प्रचारिणी सभा, अलीगढ़ के तत्वावधान में राष्ट्रकवि दिनकर जयंती के अवसर पर डॉ दिनेश कुमार शर्मा जी के भगीरथ प्रयास से एसजेएल मेमोरियल विद्यालय के सभाकक्ष में दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का सुफल आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम का केंद्रीय विषय “दिनकर के काव्य में सांस्कृतिक नव जागरण” था। जिसमें भारत के दिल्ली, पटना, आगरा, गुरुग्राम, कासगंज, मिर्जापुर, बुलंदशहर, फर्रुखाबाद, पीलीभीत, कुरुक्षेत्र, छपरा, नेपाल के जलेश्वर से ७५ से अधिक प्रख्यात कवियों तथा शोधार्थियों के उपस्थित ने कार्यक्रम के गरिमा और महिमा को चारचाँद लगा दिया। उक्त कार्यक्रम को तीन प्रमुख सत्रों में व्यवस्थित किया गया था। अल्पाहार के बाद १०:३० बजे से १:३० बजेतक प्रथम सत्र आयोजित किया गया जिसमें अध्यक्ष के रूप में प्रो. सुनील बाबू राव कुलकर्णी थें तो वहीं मुख्य अतिथि के रूप में डॉ अनिल सुलभ, ‘ पटना ‘ शोभायमान थें। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ अजय कुमार झा नेपाल, जनकपुरधाम, डॉ पुरुषोत्तम पाटिल आगरा, श्री अनेंद्र कुमार सिंह केंद्र निदेशक आकाशवाणी आगरा, इंजीनियर राजीव शर्मा, निदेशक, डॉ नीलम शर्मा प्राचार्य: एसजेएल मेमोरियल विद्यालय, अलीगढ़, आभार ज्ञापन डॉ सुरेन्द्र कुमार गुप्ता, कासगंज और संचालक स्वयं डॉ दिनेश कुमार शर्मा जी थें।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के आसन ग्रहण, माल्यार्पण, दीप प्रज्वलन तथा डॉ दौलत राम शर्मा के द्वारा सरस्वती वंदना से किया गया। इसी तरह डॉ अखिलेश चन्द्र गौड़ जी के द्वारा स्वागत मंतव्य प्रस्तुत किया गया तो वहीं श्री नरेंद्र शर्मा नरेंद्र जी के द्वारा अद्वितीय शब्द कुसुम सहित स्वागत गान प्रस्तुत किया गया। रांची विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ जंगबहादुर पाण्डे जी ने दिनकर के जीवन वृत का इस कदर समा बांधा जैसे कुछ समय के लिए समय शून्य हो गया हो। कि हम मंत्र मुग्ध ही हो गए। कार्यक्रम का एक एक मिनट पूर्ण जिम्मेवारी और जवाबदेहिता के साथ समय के गरिमा को ध्यान में रखते हुए ठीक १:३० बजे प्रथम सत्र का समापन किया गया।
हिन्दी प्रचारिणी सभा अलीगढ़ के तत्वावधान में रविवार को स्थानीय एस जे डी मेमोरियल विद्यालय के सभागार में, राष्ट्र कवि दिनकर की 117 वीं जयंती के उपलक्ष्य में दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी आरंभ हुई। संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन पटना के यशस्वी अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कहा कि दिनकर अपने समय संदर्भों से निरंतर संवाद करने वाले साहित्य साधक हैं। वे उतर छायावाद के सर्वाधिक महत्वपूर्ण कवि हैं। उनका साहित्य जागरण का साहित्य है। उनके काव्य में जागरण एवं राष्ट बोध का भाव भरा हुआ है। उनके लिए राष्ट्र सर्वोपरि था। वे सच्चे अर्थों में एक पूर्ण तथा राष्ट-बोध से संपन्न सांस्कृतिक चेतना के कवि थे।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा के निदेशक डा सुनील बाबूराव कुलकर्णी ने कहा कि दिनकर बहुमुखी प्रतिभा संपन्न साहित्यकार एवं राष्ट्र कवि थे। उन्होंने गद्य एवं पद्म दोनों में विपुल साहित्य का सृजन किया है। आरम्भमें बीज-वक्तव्य देते हुए रांची विश्व विद्यालय में हिन्दी के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो जंग बहादुर पांडेय ने दिनकर को राग, आग और वैराग्य का कवि बताया। नेपाल जनकपुर से आये हुए विद्वान डा अजय कुमार झा ने कहा कि दिनकर आध्यात्मिक चेतना के महाकवि थे। उनकी रचनाएं कालजई होने के कारण दिनकर हमारे लिए ऋषितुल्य हैं। आकाशवाणी अलीगढ़ के निर्देशक अनेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि दिनकर का साहित्य बहुमुखी है। केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा के प्राध्यापक डा पुरुषोत्तम पाटिल ने कहा कि दिनकर सामाजिक समरसता और प्रगतिशील चेतना के कवि रहे हैं। दिल्ली से आई हुई कवयित्री डा पूनम माटिया ने दिनकर को प्रेम और श्रृंगार का कवि बताया। नेपाल जनकपुरधाम से आई डा रेखा कुमारी राय ने दिनकर के साहित्य में नारी चित्रण शीर्षक पर शोध आलेख के जरिए नारी के कोमल भावनाओं का दिव्य और सजीव चित्रण करना उनकी दिव्यता को प्रदर्शित करता है। इस अवसर पर डा पुष्पा रानी, कुमारी मनीषा, राजीव शर्मा, डा नीलम शर्मा, अवधेश अवधेश अग्रवाल, डा दिनकर राव चतुर्वेदी, डा अनिता उपाध्याय, डा विकास चंद्र गुप्ता, डा अखिलेश चंद्र गौड़ आदि वक्ताओं ने भी अपने व्यक्त किए। आगत अतिथियों का भव्य स्वागत एवं संचालन संगोष्ठी के संकल्पक एवं संयोजक डा दिनेश कुमार शर्मा ने किया। सरस्वती वंदना डा दौलत राम शर्मा ने, स्वागत गान डा सोमवती शर्मा ने और धन्यवाद ज्ञापन डा सुरेंद्र कुमार गुप्ता ने किया।
भोजनोपरान्त ३:०० बजे से निर्धारित समय पर ही दूसरे सत्र का संचालन विद्वान प्रो. राजेश कुमार जी के द्वारा आरंभ किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ नरेंद्र मिश्र, विभागाध्यक्ष इग्नू नई दिल्ली, मुख्य वक्ता डॉ रेखा कुमारी राय नेपाल, विशिष्ट वक्ता, डॉ देवेंद्र देव मिर्जापुरी, बुलंद शहर, शोधार्थियों के द्वारा शोध पत्र प्रस्तुतीकरण के साथ ५:३० बजे अल्पाहार के लिए विश्राम दिया गया। बताते चलूं कि इस सत्र के संचालक प्रो. राजेश कुमार जी ने दिनकर के व्यक्तित्व के संग संग छांदोग्य उपनिषद् का भी सूक्ष्म विश्लेषण किया। साथ ही ६ बजे से वृहद काव्य गोष्ठी का आयोजन प्रारम्भ हुआ। कवियों की झड़ी और लड़ी ने समय शून्यता का ऐसा माहौल बनाया कि तीन घंटा जैसे तीस मिनट में बीत गया हो। एक से बढ़कर एक कवियों के छंदबद्ध रचनाओं का मधुरगान सुनकर हर किसी का हृदय गदगद हो उठा। तालियों की गूंज ने माहौल को उर्जायित करता रहा। तीसरा सत्र ६ अक्तूबर को ठीक १० बजे जलपान के साथ प्रारंभ किया गया। इस सत्र का संचालन स्वयं आयोजक महोदय डॉ दिनेश कुमार शर्मा जी ने अपनी ओज भरे वाणियों से आरंभ किया।इस सत्र के अध्यक्ष श्री ज्योति स्वरूप अग्निहोत्री, फर्रुखाबाद, मुख्य वक्ता डॉ प्रणव शास्त्री, पीलीभीत, विशिष्ट वक्ता, डॉ पुष्पा रानी, कुरुक्षेत्र, डॉ पूनम माटिया, नई दिल्ली, डॉ कुमारी मनीषा, छपरा तथा शोधार्थियों के द्वारा शोध पत्र प्रस्तुति किया गया। इस प्रकार हर सत्र की तरह इस सत्र में भी सहभागियों को सम्मान पत्र और अंग वस्त्र प्रदान करते हुए १:३० बजे राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम की पूर्णाहुति दी गई।





