ओली ने कहा – सेना की सुरक्षा में रहते हुए मेरा मोबाइल जब्त कर लिया गया था
काठमांडू, कार्तिक २, २०८२ । नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री एवं नेकपा (एमाले) अध्यक्ष केपी शर्मा ओली ने खुलासा किया है कि जेन-जी आंदोलन के दौरान अपने इस्तीफे के बाद जब वे नेपाल सेना की सुरक्षा में थे, उस समय उनका मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया था।
रविवार को संपादकों के साथ हुई बातचीत में ओली ने कहा —
“मैंने जब इस्तीफा दिया, तब सेना की सुरक्षा में था। मेरा मोबाइल फोन भी सीज कर दिया गया था। बाद में जब सुशीला कार्की ने प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली, तभी जाकर मुझे मोबाइल वापस मिला।”
पार्टी नेतृत्व पर बोले ओली
ओली ने कहा कि एमाले में नेतृत्व का अभाव नहीं है, पार्टी में कई आकांक्षी नेता हैं। उन्होंने खुद की आवश्यकता पार्टी में अब भी महसूस किए जाने की बात कहते हुए उम्र को मुद्दा न बनाने की दलील दी।
“अमेरिका में ८० साल के व्यक्ति नेतृत्व कर रहे हैं। भारत के प्रधानमंत्री, रूस के राष्ट्रपति पुतिन और चीन के राष्ट्रपति सी चिनफिङ तक उम्र से नहीं रुके हैं,” उन्होंने कहा।
प्रचण्ड पर झूठ बोलने का आरोप
अलग प्रसंग में ओली ने माओवादी संयोजक पुष्पकमल दहाल ‘प्रचण्ड’ पर हाल ही में भयानक झूठ बोलने का आरोप लगाया।
ओली ने कहा कि राष्ट्रपति को जब यह कठिनाई हुई कि प्रधानमंत्री की सिफारिश के बिना नया प्रधानमंत्री नियुक्त करना मुश्किल है, तब उन्होंने स्थिति को लोकतांत्रिक तरीके से सुलझाने के लिए सिफारिश की थी।
“मैंने पत्र में लिखा था कि असहज और असाधारण परिस्थिति को शांतिपूर्ण ढंग से सामान्य स्थिति में लाने के लिए राष्ट्रपति को आवश्यक कदम लोकतांत्रिक प्रणाली के भीतर उठाने चाहिए,” ओली ने बताया।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उस पत्र में कहीं भी सुशीला कार्की का नाम नहीं था, और वह पत्र उन्होंने प्रधानसेनापति की उपस्थिति में लिखा था, जिसकी प्रति उनके पास नहीं है।
संसद् और संवैधानिक प्रक्रिया पर सवाल
ओली ने कहा कि उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि संसद् के बाहर से प्रधानमंत्री नहीं बनाया जा सकता, बल्कि यह सुझाव दिया था कि संसद् की बैठक बुलाकर ऐसा किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि संविधान की धारा ७६ में संशोधन कर संसद् के भीतर से वैधानिक रूप से प्रधानमंत्री चयन का रास्ता बनाया जा सकता था।
“संविधान के भीतर रहते हुए प्रधानमंत्री न बनाकर संसद के प्रति वैरभाव दिखाया गया है। जेन-जी के नाम पर असंवैधानिक ढंग से यह सरकार बनी है,” ओली ने कहा।
“यह सरकार संविधान के रास्ते होते हुए भी असंवैधानिक तरीके से बनी है। सवाल यह है — इसे किसने और कैसे बनाया?”
संसद् विघटन पर स्पष्टीकरण
ओली ने कहा कि वे अभी भी उस समय को याद करते हैं जब उन्होंने दो बार संसद् विघटन किया था। उनका कहना था कि दो-तिहाई बहुमत के बावजूद सरकार नहीं चल पा रही थी, इसलिए उन्होंने संविधान के अनुरूप संसद् विघटन का निर्णय लिया।
उन्होंने तंज कसा कि जो लोग उस समय चुनाव से भाग रहे थे, वे आज चुनाव कराने की बात कर रहे हैं — यह आश्चर्यजनक है।


