चुनाव की तैयारी पूरी, लेकिन संशय बरकरार – प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने दलों से की अपील: “अब जेन–जी और दल साथ बैठें”
काठमांडू, 22 अक्टूबर 2025 । नेपाल की प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने कल मंगलवार को सर्वदलीय बैठक बुलाकर राजनीतिक दलों से पहली बार औपचारिक संवाद किया। यह बैठक उनके सरकारी आवास बालुवाटार में करीब साढ़े चार घंटे चली। इसमें प्रमुख दलों ने चुनावी माहौल, सुरक्षा स्थिति और निर्धारित समय पर चुनाव कराने की तैयारी पर अपने विचार रखे।
प्रधानमंत्री कार्की ने स्पष्ट कहा —
“सरकार निर्धारित समय पर भयमुक्त वातावरण में चुनाव कराने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। इसके लिए मंत्रिपरिषद और सुरक्षा निकाय चौबीसों घंटे सक्रिय हैं।”
पृष्ठभूमि: संशय और भरोसे की राजनीति
प्रधानमंत्री कार्की को २७ भदौ (13 सितंबर) को राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने आगामी फागुन २१ (मार्च ५, २०२६) को चुनाव कराने की जिम्मेदारी देते हुए नियुक्त किया था।
प्रधानमंत्री बनने के ४० दिन बाद, उन्होंने पहली बार सभी दलों को औपचारिक रूप से आमंत्रित किया।
हालाँकि, कुछ दलों — विशेष रूप से नेकपा एमाले (UML) — ने चुनाव की प्रक्रिया पर संशय जताया है, लेकिन विरोध नहीं किया।
एमाले नेता शंकर पोखरेल ने कहा, “चुनाव कराने का वातावरण अभी नहीं बना है। सुरक्षा और शांति की स्थिति पर प्रश्न हैं, लेकिन हम विरोध में नहीं हैं।”
प्रधानमंत्री का रुख: “संवाद और सहयोग ही रास्ता”
प्रधानमंत्री कार्की ने कहा कि सरकार ने जेन–जी आन्दोलनकारियों की आवाज सुनने, घायल और शहीद परिवारों की सहायता करने, और शांति बहाली में समय दिया।
अब आगे का लक्ष्य है —
“स्थिति सामान्य करें, सब मिलकर चुनाव की ओर बढ़ें। सरकार सबकी चिंता सुनने और समाधान के लिए तैयार है।”
उन्होंने यह भी जोड़ा —
“जेन–जी युवाओं और दलों को अब साथ बैठकर आगे का रास्ता तय करना चाहिए।”
दल–सरकार के बीच दूरी घटाने की कोशिश
बैठक में कांग्रेस, एमाले, माओवादी, रास्वपा, राप्रपा, जसपा, लोसपा, जनमत पार्टी और समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
नेताओं ने प्रधानमंत्री के कदम को “सकारात्मक शुरुआत” बताया।
कांग्रेस महामंत्री गगन थापा ने कहा —
“संविधान को फिर से पटरी पर लाने के लिए अब चुनाव जरूरी है। सरकार और दलों में टकराव नहीं दिखना चाहिए।”
माओवादी नेता वर्षमान पुन ने भदौ २३–२४ की घटनाओं की जांच की मांग की, जबकि रास्वपा के डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने चेतावनी दी
“सत्ता का शांति पूर्ण हस्तांतरण होना चाहिए। यदि सरकार पथभ्रष्ट हुई तो हम चुप नहीं बैठेंगे।”
सुरक्षा, शंका और भरोसे का सवाल
लगभग सभी दलों ने सरकार से चुनावी सुरक्षा, पुलिस मनोबल और अपराधिक गतिविधियों पर गंभीरता से ध्यान देने की मांग की।
एमाले के उपमहासचिव प्रदीप ज्ञवाली ने कहा —
“प्रहरी (पुलिस) को धमकाया जा रहा है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि वह जेन–जी आन्दोलन और आपराधिक गतिविधियों में फर्क कर पाएगी।”
गृहमंत्री अर्याल ने जवाब दिया कि सरकार “व्यवहारिक रूप से दलों की चिंताओं को दूर करेगी”।
राष्ट्रपति, आयोग और अब प्रधानमंत्री – संवाद की कड़ी जारी
इससे पहले राष्ट्रपति पौडेल और निर्वाचन आयोग दोनों ने सर्वदलीय बैठकें की थीं, जिनमें चुनावी सुरक्षा और भरोसे का मुद्दा प्रमुख रहा।
प्रधानमंत्री कार्की की यह बैठक उस संवाद श्रृंखला का अगला कदम मानी जा रही है।
उनका संदेश था —
“निर्वाचन की आवश्यकता पर किसी की असहमति नहीं है। सभी पक्षों की चिंता और अपेक्षाओं को समेटते हुए तय समय पर चुनाव कराना सरकार की जिम्मेदारी है।”
राजनीतिक माहौल: सहमति के बीच संशय बरकरार
हालाँकि, सर्वदलीय संवाद ने सरकार और दलों के बीच दूरी घटाई है, लेकिन चुनावी प्रक्रिया को लेकर संशय अभी भी बना हुआ है।
एमाले सहित कुछ दलों का मानना है कि सरकार “चुनाव कराने की स्थिति” में नहीं है।
फिर भी, अधिकांश नेताओं ने यह माना कि —
“अब देश को चुनाव की ओर ही बढ़ना चाहिए, और यही राजनीतिक स्थिरता का एकमात्र रास्ता है।”
प्रधानमंत्री का संदेश जनता के नाम
बैठक के बाद प्रधानमंत्री कार्की ने सोशल मीडिया पर लिखा —
“निर्वाचन की आवश्यकता पर कोई मतभेद नहीं। सभी दलों के चासो र चिन्ताहरु सम्बोधन गर्दै तोकिएको समयमा चुनाव सम्पन्न गर्न सरकार कटिबद्ध छ। सबैले आ–आफ्नो ठाउँबाट जुटौँ।”
उन्होंने सर्वदलीय बैठक में उपस्थित सभी दलों और संवाद को कवर करने वाले पत्रकारों का धन्यवाद भी किया।
निष्कर्ष:
नेपाल की राजनीति फिलहाल संवाद और संशय के दोराहे पर खड़ी है।
प्रधानमंत्री कार्की की पहल से राजनीतिक माहौल में संवाद की शुरुआत तो हुई है, लेकिन विश्वास बहाली और शांति–सुरक्षा की गारंटी अब भी सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।



