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निर्मली से सीतामढ़ी तक रेलवे खंड का मिली स्वीकृति,

 

जनकपुरधाम/मिश्री लाल मधुकर निर्मली-जयनगर-सीतामढ़ी रेलखंड को हरी झंडी मिलना पूरे मिथिलांचल और भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए एक ऐतिहासिक और गेम-चेंजर फैसला है। लंबे समय से इस क्षेत्र के लोग एक सीधी और सुगम रेल कनेक्टिविटी की मांग कर रहे थे, जिसे अब रेलवे बोर्ड और रेल मंत्रालय से अंतिम मंजूरी मिल गई है। इसके बनाने में 2400 करोड़ की लागत लगेगी।इसकी कुल लंबाई 188किलोमीटर है।
इस नए रेलखंड की मंजूरी से मिथिलांचल के रेल नेटवर्क और स्थानीय विकास पर निम्नलिखित सकारात्मक प्रभाव पड़ेंगे:
1. सीमावर्ती और ग्रामीण क्षेत्रों को सीधा जुड़ाव
यह रेलखंड सुपौल के निर्मली, मधुबनी के जयनगर और सीतामढ़ी को आपस में सीधे जोड़ेगा। वर्तमान में इन शहरों के बीच यात्रा करने के लिए काफी लंबा रास्ता तय करना पड़ता है या सड़क मार्ग पर निर्भर रहना पड़ता है। इस लाइन के बनने से यह दूरी और समय दोनों बेहद कम हो जाएंगे।
2. भारत-नेपाल व्यापार और सुरक्षा को मजबूती
यह पूरा रूट भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा के समानांतर चलता है। जयनगर पहले से ही नेपाल (कुर्था/जनकपुरधाम) के लिए अंतरराष्ट्रीय रेल सेवा का मुख्य केंद्र है। इस नए रेलखंड के जुड़ने से सीमा सुरक्षा बलों की आवाजाही आसान होगी और दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों को भारी बढ़ावा मिलेगा।
3. सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन का विकास
सीतामढ़ी (पुनौराधाम): माता सीता की जन्मस्थली।
जनकपुरधाम (नेपाल): जयनगर के रास्ते माता जानकी का मुख्य मंदिर।
निर्मली/कोसी क्षेत्र: कोसी और मिथिला के अन्य सांस्कृतिक केंद्र।
इस रेलखंड के शुरू होने से श्रद्धालुओं के लिए रामायण सर्किट और मिथिला सांस्कृतिक पर्यटन के तहत यात्रा करना बेहद आसान हो जाएगा।
4. कोसी और महासेतु का पूरा फायदा
कोसी रेल महासेतु बनने के बाद निर्मली और सहरसा-सुपौल का क्षेत्र पहले ही मुख्य रेल नेटवर्क से जुड़ चुका था। अब निर्मली को जयनगर और सीतामढ़ी से जोड़ देने के बाद, पूर्वोत्तर भारत (असम/बंगाल) से आने वाली ट्रेनें सीधे इस रूट का उपयोग करके उत्तर बिहार और उत्तर प्रदेश (गोरखपुर/लखनऊ) की तरफ कम समय में जा सकेंगी।
अगला चरण क्या होगा?
हरी मंजूरी (आधिकारिक स्वीकृति) मिलने के बाद अब रेलवे इस परियोजना के लिए:
विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को अंतिम रूप देगा।
भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) और बजट आवंटन की प्रक्रिया शुरू होगी।
इसके बाद बहुत जल्द धरातल पर टेंडर निकालकर सिविल निर्माण और ट्रैक बिछाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।

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