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साम चके साम चके अबिह हे,अबिह हे,जोतला खेत मे बैसिह हे बैसिह हे

 


जनकपुरधाम/मिश्री लाल मधुकर । रविवार की संध्या जानकी मंदिर में मैथिली विकास कोष द्वारा सामा चकेबा महोत्सव आयोजित किया गया।इस सामा चकेबा महोत्सव में 14टीमोंने भाग लिया। मिथिलानी पहिरन में महिलाओं ने एक साथ डाला में सामा चकेवा लेकर कोने भैया जेता गंगा रे जमुनवा,कोन भैया लेता चिकनी माटि गीत मंच से गूंजा तो जानकी मंदिर प्रांगण में उपस्थित हजारों दर्शकों ने कर्तल ध्वनि से स्वागत किया। इस अवसर पर मैथिली विकास कोष के अध्यक्ष जीव नाथ चौधरी ने कहा कि सामा चकेवा मिथिलांचल का भाई बहन का पर्व है। यह छठ खरना से शुरू होता है और कार्तिक पूर्णिमा को विसर्जन किया जाता है।लेकिन आधुनिक समय में चामा चकेबा लुप्त प्राय हो चुका है।इस लुप्त प्राय सामा चकेवा का जीवंत करना मैथिली विकास कोष का उद्देश्य है।टेरा कोटा कलाकृतियों में त्याहारो के सभी चरित्रो-सामा चकेबा, चौकीदार, छोटे पक्षी,सतभैया,चुगला,खिडलीच और वृदांवन को कुम्हार विशिष्ट शैली में निर्माण करता है।आंखों,नाक और होंठों पर की गयी बारीकियां उनकी भावनाओं को जीवंत कर देता है। सभी टीमों ने सामा चकेबा परंपरागत तरीके से खेले। चुगला को गालियां से लेकर वृंदावन में आग जैसी बिधा प्रस्तुति की गयी। गायक सुनील मल्लिक, संगीता देव की युगल जोड़ी के साथ नवीन मिश्र द्वारा सामा चकेवा के तरह तरह गीत से दर्शकों ने खूब मनोरंजन का लुत्फ उठाया।
सामा चकेबा महोत्सव में जानकी मंदिर के महंत राम तपेश्वर दास वैष्णव, पूर्व मंत्री तथा बिधायक राम सरोज यादव, साहित्यकार धीरेन्द्र प्रेमर्षि, जनकपुरधाम उद्योग वाणिज्य संघ के पूर्व अध्यक्ष ई. प्रकाश चन्द्र साह,प्रेस स्वतंत्रता सेनानी राम भरत साह, नेपाली कांग्रेस के नेता मनोज कुमार चौधरी, प्रमोद चौधरी, सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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