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मारवाड़ी समुदाय से दूसरा अध्यक्ष हैं मुरारका, कार्यक्रम की जमकर आलोचना की : कविता दास

 
कविता दास
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कविता दास, काठमांडू, १० जुलाई | नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ में कुछ महिनो से  उथल पुथल चल रहा था | महासंघ के पूरब अध्यक्ष प्रदीपजंग पाण्डे भष्ट्राचार के आरोप में  जेल भेज दिए गयें | उसके बाद  महासंघ में  बाँकी कार्यकाल के लिए  अध्यक्ष का निर्वाचन कराया गया  । पहले तो अध्यक्ष पद के लिये तीन नामांकन दाखिल किये गये | बादमें पशुपति मुरारका को  भाष्करराज कर्णिकार और भवानी राणा का समर्थन मिलनेके बाद अध्यक्ष के लिए निर्विरोध चयन कर लिया गया |  ३ जुलाई २०१५  शुक्रबार को विषेश साधारणसभा में अध्यक्ष में मुरारका को चयन किया जाना नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ में सकारात्मक कदम माना जाता है | ५० बर्षीय मुरारका,  मुरारका अर्गनाइजेशन के  प्रबन्ध निर्देशक है | मारवाड़ी समुदाय से  मुरारका दूसरा व्यक्ति हैं जो नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ के अध्यक्ष बने हैं | इससे पहल उधोगपति बिनोद कुमार चौधरी महासंघ के अध्यक्ष रहचुके है |

अभी सरकार ने जो नीति तथा कार्यक्रम प्रस्तुत किया है  वह  पुरानी कार्यक्रम का ही दस्तावेज़ तथा  निरन्तरता देने का आरोप निजी क्षेत्रों ने लगाया है | यह नीति तथा कार्यक्रम पूरी तरह से पुरानी नीति पर ही आधारित होने से निजी क्षेत्र इससे अशाबादी नहीं दीखते है | महासंघ के अध्यक्ष पशुपति मुरारका के अनुसार यह नीति तथा कार्यक्रम औद्योगिक क्षेत्र को प्राथमिकता देकर नहीं बनाइ गयी है |  मुरारका के अनुसार देश के ब्यपार में  घाटा  ज्यादा हो रहा है | अभी तो सरकार को निजी क्षेत्र को साथ में लेकर चलेने की जरूत है | महासंग ने पुर्ननिर्माण  में साझेदारी करके आगे बढ़ने की सल्लाह दी थी इसीलिए सरकार ने  भूकम्प के बाद का पुननिर्माण में निजी क्षेत्र से मिलकर आगे बढ़नेका योजना  बनायी है उससे   कुछ हद तक खुश  है अध्यक्ष मुरारका | देखा जाए तो सरकार के पास जो भी दस्तावेज़ है उसे पहले  कार्यान्वयन नहीं हो राहा है | pashupati murarkaस्वदेशी चीज़ें का उपयोग , में लाने  का  बिषय भी उठाया गया पर क्या यह पूरा हो पायेगा  सरकार के और से ? महासंघ पहल से ही इस पर जोड़ देती आई है | अगर कार्यान्वयन में आता है तो फिर औद्योगिक क्षेत्र की बहुत ही महवपूर्ण भूमिका हो सकती है इस क्षेत्र में | सरकार को अभी  टैक्स पे ध्यान देना की जरुरत है | ज्यादा टैक्स ना लगे  तो अच्छा होगा ब्यपार जगत में , निर्माण सामग्री पे टैक्स नहीं बड़े  . भूकम्पसे जो  प्रभावित क्षेत्रसब है  उसमे रहे छोटा या थोड़ा बड़ा उद्योगको  राहत होनेवाले  बजेट होने की जरुरत है . भ्याटमें  ‘थ्रेसहोल्ड’सब बढ़ाना पड़ा.  लगानी की  वातावरण बनाने के लिए  ‘इन्भेष्टमेण्ट क्याम्पेन’  चलने पर जोड़ देते हैं मुरारका । लगानी मैत्री वातावरण बनाने के लिए  एक-द्वार प्रणाली से  पारित होने वाले  ऐन लेन की जरूरत बताते हैं  अध्यक्ष पशुपति मुरारका ।
 अध्यक्ष पशुपति मुरारका ने विभिन्न विषयों पर अपनी धारणा रखें हैं | उनके अनुसार  देश का मुख्य स्रोत कृषि क्षेत्र है बिकाश की  दृस्टिकोण  से इसपर बिशेष योजना नहीं बनायी गयी है |  व्यवसायिक कृषि  आगे बढ़ना चाहते है लेकिन नगरपालिका  कर उठाकर प्रेषण करने लगता है इससे  कृषि जगत परेशानी में है |  सरकार की और से कोई सुनबाई नहीं हो रही है |
महासंघ के बिभिन्न पदाधिकारी के मुताबिक माननीय ‘राष्ट्रपतिजी ने  संसद में  जो बात कही वह  बहुत अच्छी थी | पर इसका कार्यान्वन पर शंका हो रहा है| ऐसा  खाका तयार होना चहिये कि किस निकाय व्दारा कितना समय में  कितना खर्च करे तब कार्यान्वन आसन होगा |  सब कुछ स्पस्ट होना चहिये बजेट में तब ही भ्रष्टाचार भी नियंत्रण हो सकता है |  सरकार जो भी नीति या कार्यक्रम लाती  है उसे समय पर कार्यान्वयन करने की  जरुरत  है |

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