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एमाले में नेतृत्व संघर्ष : ओली बनाम पोखरेल,

 

काठमांडू। नेपाल की प्रमुख कम्युनिस्ट पार्टी, एमाले (नेकपा एमाले) के आगामी 11वें राष्ट्रीय महाधिवेशन में अध्यक्ष पद के लिए दो वरिष्ठ नेताओं के बीच सीधी टक्कर होने जा रही है। मौजूदा अध्यक्ष केपी शर्मा ओली और वरिष्ठ उपाध्यक्ष ईश्वर पोखरेल अपने-अपने पैनल (टीम) बनाकर चुनावी मैदान में उतरे हैं।

दो धड़ों में बंटी तैयारी

· ओली पक्ष: संस्थापक धड़े के प्रतिनिधि हैं। पार्टी विधान में 15 पदाधिकारियों की सीमा के कारण उनके लिए सीमित पदों पर अनेक आकांक्षी नेताओं को संतुलित करना एक बड़ी चुनौती है।
· पोखरेल पक्ष: ‘संस्थापक-इतर’ धड़े का नेतृत्व कर रहे हैं। उनकी रणनीति है कि पहले ओली अपना पैनल घोषित करें, उसके बाद ही वे अपनी पूरी टीम का ऐलान करेंगे।

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पदों को लेकर होड़

· संस्थापक धड़े से महासचिव पद पर शंकर पोखरेल के दोबारा उम्मीदवार बनने की संभावना है, हालांकि प्रदीप ज्ञवाली भी इस पद के इच्छुक हैं।
· पोखरेल धड़े से महासचिव पद के लिए सुरेंद्र पांडे या योगेश भट्टराई उतर सकते हैं।
· सचिव रघुवीर महासेठ अभी तक किसी भी धड़े के साथ स्पष्ट रूप से नहीं जुड़े हैं और दोनों ओर से आकर्षक प्रस्ताव की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

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आरोप-प्रत्यारोप
पोखरेल पक्ष नेधनकुटा, दांग, ओखलढुंगा सहित कई जिलों में महाधिवेशन प्रतिनिधियों के चयन को लेकर निष्पक्षता के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए अध्यक्ष ओली से शिकायत की है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
ईश्वर पोखरेल नेअतीत में संस्थापक धड़े में रहते हुए अहम भूमिका निभाई थी। वर्ष 2008 के महाधिवेशन में उन्होंने झलनाथ खनाल को जिताने में मदद की थी, जबकि 2014 के महाधिवेशन में उनकी भूमिका केपी ओली की जीत में महत्वपूर्ण रही थी। अब वह ओली के प्रतिद्वंद्वी के रूप में खड़े हैं।

अहम बिंदु

· महाधिवेशन 27-29 मंसिर (दिसंबर के पहले सप्ताह) में काठमांडू में होना है।
· पार्टी विधान से 70 वर्ष की उम्र सीमा और दो कार्यकाल की शर्त हटाए जाने के बाद ही ओली तीसरे कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ पा रहे हैं।
· पूर्व राष्ट्रपति विद्या भंडारी का पोखरेल को समर्थन प्राप्त है, हालांकि भंडारी की स्वयं की सदस्यता नवीनीकरण में रुकावट है।

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यह महाधिवेशन एमाले के भविष्य की दिशा तय करने वाला साबित होगा, जहां पार्टी के भीतर ही दो मजबूत धड़ों के बीच सत्ता का संघर्ष देखने को मिल रहा है।

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