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फेसबुक जिन्दावाद !

 

बिम्मी शर्मा:फेसबुक के पितामह मार्क जुकर वर्ग ने जबसे इसका आविष्कार किया है । यह फेसबुक फलते–फूलते हुए पूरी दुनिया को अपने Facebook-Logo-Cartoonमें समेट रहा है । फेसबुक का मतलब आपको अपना और अपने काम का प्रचार करने के लिए एक मुफ्त की जगह । जहां आप रो सकते हैं, हंस सकते हैं और बंदर, कबुतर और सुअर की शक्ल में अपना सेल्फी फोटो खींच सकते हैं ।

फेसबुक में किसी की शवयात्रा में जाने पर वहाँ का सेल्फी लेना और मृतक के पास खडेÞ हो कर फोटो ऐसे खिचवातें है जैसे वह कोई लाश नहीं शादी के लिए बना संवरा दूल्हा हो । किसी होटल में खाना खाने जाएँगें तो पहले मेन्यू का फोटो खीचेंगे और उसके बाद अर्डर किए गए खाने का । अब फेसबुक में दिखना चाहिए न कि उन्होंने कहां और क्या–क्या खाया । समुन्दर में नहा रहे हैं तो वहां की अधनंगी फोटो भी रखना जरुरी है । अब तो बस सुबह–सुबह कमोड में बैठकर पोटी करते हुए सेल्फी लेना और फेसबुक में डालना ही बांकी रह गया है । किसी दिन यह शुभ काम भी कोेई न कोई कर ही लेगा ।
माशाअल्लाह फेसबुक जो न करवाए वो कम है । आपका बच्चा आप के साथ ही रहता है । खाता, पिता और सोता आप के साथ ही है । पर जब उस के जन्मदिन या परीक्षा के रिजल्ट के दिन आप उसको ऐसे बधाई देते हैं जैसे वो आप से बहुत दूर सात समुन्दर पार हो । आप ने नंया मोबाइल, ल्यापटप, घड़ी, ट्याब या और कुछ खरीदा हो और उसकी तस्वीर खींच कर फेसबुक में न रखें ऐसा हो ही नहीं सकता ।
वह जमाना गया जब घर में कुछ नंया खरीदा जाता तो पड़ोसी को सबसे पहले पता चलता था  और पड़ोसी ईष्र्या से जलभुन कर खाक हो जाते थे । अब पड़ोसी और रिश्तेदारों को बाद में पता चलता है उससे पहले फेसबुक में फोटो अपलोड कर सभी को उस की झांकी दिखाई जाती है । फेसबुक में आप कितने चर्चित हैं वह आप के दोस्तों की संख्या पर निर्भर है । आप के जितने ज्यादा दोस्त होगें उतने ही  ज्यादा आप के फोटो पर लाइकस् और कमेन्ट आएँगे ।
आपका टाइम टेबल अब फेसबुक तय करता है । आप कितने बजे उठे, सुबह कितने बजे ब्रश किया और कितने बजे चाय और कॉफी लिया । आप ने सुबह क्या नाश्ता खाया और लंच के लिए कौन से होटल में गए यह सब आप फेसबुक पर ऐसे शान से डालते हैं जैसे आप ने कोई बड़ा पहाड़ फोड़ दिया हो । आपकौन से शैम्पु से नहाते हैं, कौन से ब्राण्ड का सिगरेट पीते हैं । यह सब जानकारी आप जब तक फेसबुक में नहीं डालिएगा, उस दिन आपको लगेगा आज का दिन व्यर्थ गया ।
किसी के पास भले ही नोकिया का साधारण सा मोबाइल और साधारण ब्राण्ड का ल्यापटप हो । पर वह फोटो एप्पल का और आइफोन सिक्स का ही रखेगा । किसी की रास्ते में खड़ी महँगी कार के आगे खड़े हो कर शान से फोटो खींचाना और उस कार को अपना बताने में किसी फेसबुकियन को थोड़ी सी भी शर्म नहीं आती ।
आप भले अपने अड़ोसी, पड़ोसी से बात नहीं करते हो । अपने रिश्तेदारो के यहाँ मिलने भी नहीं जाते हो । पर फेसबुक में किसी अजनबी को फ्रेण्ड रिक्वेष्ट भेज उसको अपना दोस्त बनाने ने थोड़ा सा भी नहीं हिचकते हैं । और मजे की बात यह है की उस अजनबी को दोस्त बनाने के बाद उसको मैसेज भेज कर आत्मीयता जताना । जब उधर से कोई सहृदयी प्रति उत्तर देगा तो उसका इन्टरभ्यू लेने में भी नहीं हिचकेंगे । पहले पूछेंगे चाय पिया ? उधर से हां में जवाब आया तो उस के बाद फिर पूछेंगे खाना खाया ? अगर फिर हां में जवाब आया तो फिर पूछेंगे कौन सी सब्जी और अचार खाया ?
यह तो हद हो गई भई ? ‘मान न मान मैं तेरा मेहमान’ जैसा गले पड़ जाते हैं और पीछा छुड़ाना मुश्किल  । कोई फेसबुक में अच्छा लिखता है तो उसी को जरिया बना कर बात करने का रास्ता ढूंढ लेते है । झूठी तारीफ कर के महिलाओं को बरगलाना और उनसे मेलजोल बढ़ाना बस यही रहती है किसी, किसी की आदत । इन्हें लगता है फेसबुक में अनलाइन दिखने वाली हर लड़की सड़कछाप है या कोई डस्टवीन है । जिसे प्रयोग में लाना उनका जन्मसिद्ध अधिकार है ।
दुनिया ४२ वीं शताब्दी में भले ही चली जाए । पर लड़कियों के लिए मर्दों की सोच आज से दो सौ वर्ष पहले जैसी थी आज भी वैसा ही है । वह फेसबुक में साधिकार दिखता है जब कोई लड़का या मर्द किसी लड़की या औरत को हद से परेशान करते हैं अनलाइन में मैसेज भेज कर । कब कौन सी लड़की अनलाइन हो कर ग्रीन सिग्नल दिखाएगी और उसको मुर्गा बनाकर फाँसने के चक्कर में लड़कों का दिन गुजरता है । कुछ काम न करना और ख्याली पुलाव पकाने वाले इन्हीं लोगों के कारण फेसबुक दिन–प्रतिदिन बदनाम हो रहा है ।
कभी–कभी लगता है मार्क जुकरवर्ग ने फेसबुक बनाकर बहुत गलत किया । फिर लगता है इसी फेसबुक के जरिए दुनियाभर की जानकारी हमें तुरन्त पता चल जाता है । फेसबुक इक लाइलाज बीमारी की तरह फैल रहा है । पढ़े लिखे, अनपढ़, बुद्धिमान, मुर्ख, धनी और गरीब सभी वर्ग के लोग फेसबुक में हाजिर हैं । फेसबुक चलाना तो नहीं आता पर जब एकाउण्ट खोल लिया है तो किसी न किसी को परेशान करके ही छोड़ेंगे ।
फेसबुक को सब से ज्यादा रद्दी  की टोकड़ी बनाया है वैदेशिक रोजगार में खाडी के देशों में गए लोगों ने । दिनभर तो यह ऊंट जैसा काम करते हंै और सुबह, शाम जब फ्री होते हंै बोलने, बतियाने के लिए अपना कोई रिश्तेदार साथ में नहीं होता । तो बेचारे और करेगें क्या ? अपनी सारी भड़ास फेसबुक पर निकालते हंै । इन के लिए फेसबुक ही दोस्त, प्रेमिका और रिश्तेदार है । फेसबुक पर ही अपनी सारी चिन्ता और देशभक्ति को उढ़ेल कर खुद को सच्चा देशभक्त होने की दावी करने में भी इनको कोई परहेज नहीं । अगर सच में इनको देश से इतना ज्यादाप् यार है तो छोड़कर गए ही क्यों ? यहीं बैठकर खेत, खलिहान में काम करते और गोबर पाथते और आंसू बहाते न ।
इन्हीं वैदेशिक रोजगारी में गए लोगों ने फेसबुक में अनाप, शनाप लिखकर दूसरों का दिमाग खराब करते हैं और पंगा लेते हैं । लिखना ठीक से आता नही पर इन में लिखने और लेखक बनने का भूत सवार है । न भाषा शुद्ध है, न ह्स्व, दीर्घ ही आता है पर लिखना है तो बस लिखना ही है । शुरुआत फेसबुक में लिखकर करेंगे और उसके बाद अनलाइन मीडिया में  लेखक बनकर खुद के नाम और अनलाइन का सत्यानाश करेंगें । पर इन्हें समझाए कौन ?
फेसबुक में किसी की शवयात्रा में जाने पर वहाँ का सेल्फी लेना और मृतक के पास खडेÞ हो कर फोटो ऐसे खिचवातें है जैसे वह कोई लाश नहीं शादी के लिए बना संवरा दूल्हा हो । किसी होटल में खाना खाने जाएँगें तो पहले मेन्यू का फोटो खीचेंगे और उसके बाद अर्डर किए गए खाने का । अब फेसबुक में दिखना चाहिए न कि उन्होंने कहां और क्या–क्या खाया । समुन्दर में नहा रहे हैं तो वहां की अधनंगी  फोटो भी रखना जरुरी है । अब तो बस सुबह–सुबह कमोड में बैठकर पोटी करते हुए सेल्फी लेना और फेसबुक में डालना ही बांकी रह गया है । किसी दिन यह शुभ काम  भी कोेई न कोई कर ही लेगा ।
अगर आप फेसबुक चलाना जानते हैं तो आपको और कुछ आए न आए नेताओं को गाली देना देना और मन की भड़ास निकालना जरुर आना चाहिए । अगर आपको नेता और अपने दुश्मन को गाली देना नहीं  आया तो आपका फेसबुक चलाना बेकार है । फेसबुक इसीलिए तो मजेदार है की आप किसी के बारे में अच्छी बातें न लिखें । किसी की प्रशंसा में कोई गीत भले ही न गाएं । पर उस आदमी के विरोध में उसको कोसते हुए अपने मन की भड़ास निकालना आपको जरुर आना चाहिए । इसीलिए तो फेसबुक जिन्दावाद है !

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