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चार महीने में क्षेत्र का कायापलट नहीं कर सकते।“वोट वापस ले जाइए”: मंत्री गुरुङ

 

१ भाद्र, काठमांडू।

गोरखा के शहीद लखन गाउँपालिका–9 के स्थानीय निवासियों ने चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करने की मांग गृहमंत्री सुधन गुरुङ से की। लेकिन मंत्री गुरुङ ने कहा कि वे अभी चार महीने में क्षेत्र का कायापलट नहीं कर सकते। उन्होंने यहां तक कह दिया कि यदि मतदाता उन पर भरोसा नहीं करते, तो “वोट वापस ले जाइए।”

गोरखा क्षेत्र नंबर 1 से प्रतिनिधिसभा सदस्य निर्वाचित गुरुङ ने मतदाताओं के साथ बातचीत के दौरान यह टिप्पणी की।

हर महीने अपने गृह जिले जाने के पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत वे शनिवार को भीमसेन थापा गाउँपालिका और रविवार को शहीद लखन गाउँपालिका के मतदाताओं से मिले। रविवार शाम गृहमंत्री गुरुङ शहीद लखन गाउँपालिका–9 के स्थानीय लोगों के साथ बातचीत कर रहे थे। बैठक में वार्ड अध्यक्ष रामकुमार श्रेष्ठ, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के वार्ड सचिव खोपेन्द्र लामिछाने सहित अन्य लोग मौजूद थे।

रास्वपा वार्ड सचिव लामिछाने ने गुरुङ को चुनाव के समय गांव आने पर लैब के लिए बजट उपलब्ध कराने के अपने वादे की याद दिलाई। गुरुङ ने भी इस बात पर सहमति जताई।

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लेकिन जब उनसे पूछा गया कि वादे के मुताबिक बजट क्यों नहीं दिया गया, तो गृहमंत्री गुरुङ ने कहा कि केवल चार महीने में परिणाम की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। उन्होंने जवाब में कहा कि जरूरत हो तो “वोट वापस ले जाइए।”

गृहमंत्री गुरुङ का यह बयान वाला वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

कार्यक्रम में टोपी पहने एक व्यक्ति ने ‘एक छोटी-सी बात’ कहते हुए लैब के लिए बजट के बारे में सवाल किया। चुनाव के दौरान किए गए वादे की याद दिलाते हुए उसने कहा—

“आप चुनाव के समय यहां आए थे और लैब के लिए बजट देने की बात कहकर गए थे। आपने यहीं से मंत्रालय के सचिव को फोन भी किया था। आपने कहा था कि आप लोग निश्चिंत रहें, आने वाले बजट में आपकी जरूरत के अनुसार व्यवस्था कर दूंगा। लेकिन वह बजट में कहीं दिखाई नहीं दे रहा है।”

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इसके जवाब में गृहमंत्री गुरुङ ने कहा—

“आपके ये इतने छोटे-छोटे बजट हैं कि अगर इन्हें इस तरह किताब में लिखते जाएं तो महाभारत और रामायण को मिलाकर भी किताब पूरी नहीं होगी।”

उन्होंने आगे कहा कि मंत्रालय ने स्थानीय स्तर से योजनाओं की सूची मांगी है और उसी सूची के आधार पर यह तय किया जाएगा कि क्या-क्या शामिल किया जाए।

इसके बाद सवाल पूछने वाले व्यक्ति ने गृहमंत्री के बगल में बैठे व्यक्ति से पूछा कि “तुमने सूची नहीं भेजी?” इस पर उन्होंने सूची भेजे जाने की जानकारी दी।

इसके बाद बगल में बैठे एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि अभी एक-दो दिन पहले ही मंत्रालय के सचिव से इन विषयों पर बातचीत हुई है और उन्होंने सवाल पूछने वाले व्यक्ति को समझाने की कोशिश की।

लेकिन सवाल पूछने वाला व्यक्ति फिर भी संतुष्ट नहीं हुआ। उसने स्थानीय लोगों के दबाव का हवाला देते हुए गृहमंत्री से कहा—

“यहां गांव के लोग तो हमें मारने पर उतारू हो गए हैं। कल ही सुधन गुरुङ बोलकर गए थे, अब कहते हैं कि पता नहीं।”

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इस पर गृहमंत्री सुधन गुरुङ ने कहा—

“चार महीने में अभी हमारा पहला बजट आया है। … आपको काम हो जाए, इतना ही तो चाहिए, है ना? चार महीने में मैं कायापलट तो नहीं कर सकता। वोट लेकर जाइए।”

गृहमंत्री के इस जवाब के बाद वहां मौजूद लोग हंसते हुए दिखाई देते हैं। इसी दौरान एक व्यक्ति कहता है—

“जिताकर तो भेज ही दिया, यह बात पहले कहनी चाहिए थी।”

इसके बाद गृहमंत्री गुरुङ ने कहा—

“नहीं, मैंने तो कहा था। मैं स्पष्ट बात करने वाला आदमी हूं। अगर आप लोग मुझ पर विश्वास नहीं कर सकते तो मुझे मत जिताइए। मुझे पांच साल देखिए। कम से कम मैंने इतनी हिम्मत तो की है।”

गृहमंत्री गुरुङ ने आगे कहा—

“चार महीने में अभी 15–20 दिन ही हुए हैं। अभी चाहिए कहते ही तो मिल नहीं जाएगा।”

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