एनडीटीवी वर्ल्ड आगामी 27 को भारत और नेपाल वैश्विक संवाद श्रृंखला शुरू करने जा रहा है।
भारतीय टेलीविजन चैनल एनडीटीवी वर्ल्ड आगामी 27 अगस्त यानी 11 भदौ को भारत और नेपाल के विभिन्न क्षेत्रों की प्रभावशाली हस्तियों को एक ही मंच पर लाकर वैश्विक संवाद श्रृंखला शुरू करने जा रहा है।
‘एनडीटीवी अन्वीक्षा : सीमापार विचार’ नामक यह संवाद श्रृंखला नेपाल की राजधानी काठमांडू से शुरू होगी। याक एंड यति में सुबह 9 बजे से होने वाले कार्यक्रम में सत्तारूढ़ रास्वपा के सभापति रवि लामिछाने से लेकर प्रमुख विपक्षी कांग्रेस के सभापति गगन थापा तक के नेता शामिल होंगे।
कार्यक्रम की प्रचार सामग्री के अनुसार रवि और गगन के साथ अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले, विदेश मंत्री शिशिर खनाल, अंतरराष्ट्रीय संबंध समिति की सभापति सुम्निमा उदास, अभिनेता राजेश हमाल और अभिनेत्री मनीषा कोइराला सहित कई प्रमुख व्यक्तित्व संवाद में भाग लेंगे।
एनडीटीवी ऑनलाइन की एक खबर के अनुसार, व्यापार एवं उद्योग क्षेत्र से नेपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष कमलेश अग्रवाल, कन्फेडरेशन ऑफ नेप्लिज इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष वीरेन्द्रराज पांडे तथा नेपाल-भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के उपाध्यक्ष एवं सूर्य नेपाल प्रालि के प्रबंध निदेशक गौरव तयाल भी इसमें शामिल होंगे।
खेल क्षेत्र से नेपाल के पूर्व क्रिकेटर और क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ नेपाल (कैन) के महासचिव पारस खड्का नेपाली खेल क्षेत्र का दृष्टिकोण प्रस्तुत करेंगे।
इसी तरह भारत की ओर से इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. राम माधव, विजय चौथाइवाले, भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य डॉ. विनय सहस्रबुद्धे, भाजपा के विदेश मामलों के विभाग के प्रमुख डॉ. विजय चौथाइवाले, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं कांग्रेस नेता शशि थरूर तथा नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव सहित कई लोग संवाद में शामिल होंगे।
किन-किन विषयों पर होगी चर्चा?
कार्यक्रम में नेपाल की बदलती राजनीति, अर्थव्यवस्था और समाज के साथ-साथ भारत के साथ उसके संबंध तथा क्षेत्रीय राजनीति में नेपाल की भूमिका पर चर्चा होगी।
चर्चा में नेपाल की आर्थिक विकास योजनाओं, कारोबार संचालन के अवसरों, लोकतांत्रिक व्यवस्था में आए बदलावों तथा युवाओं की अपेक्षाओं पर भी विचार-विमर्श होगा।
इसके अलावा प्रौद्योगिकी, पर्यटन, बुनियादी ढांचा, पर्यावरण, व्यापार और क्षेत्रीय सहयोग जैसे विषय भी चर्चा में शामिल किए जाएंगे।
बदलती दुनिया में नेपाल खुद को किस तरह आगे ले जाने की कोशिश कर रहा है तथा उसकी प्राथमिकताएं और चुनौतियां क्या हैं, इस विषय पर भी संवाद केंद्रित रहेगा।
एनडीटीवी ने अपनी खबर में कहा है कि ‘अन्वीक्षा’ नामक यह विशेष कार्यक्रम भारत-नेपाल संबंधों पर होने वाली पारंपरिक चर्चाओं तक सीमित नहीं रहेगा। नेपाल की अपनी आवाज, विचार, सपनों और भविष्य की योजनाओं को केंद्र में रखकर नेपाल को समझने का प्रयास किया जाएगा।
‘अन्वीक्षा’ का अर्थ क्या है? शुरुआत नेपाल से ही क्यों?
एनडीटीवी के अनुसार, ‘अन्वीक्षा’ नाम प्राचीन भारतीय परंपरा के ‘आन्वीक्षिकी’ शब्द से लिया गया है। इसका अर्थ तर्क, विचार-विमर्श और परीक्षण के माध्यम से किसी विषय को समझना है।
खबर में कहा गया है, “इस पहल का उद्देश्य परिचित विषयों और कथाओं को भी नए दृष्टिकोण से देखना है।” प्रत्येक कार्यक्रम में किसी देश के इतिहास, पहचान, वहां के नागरिकों के वास्तविक जीवन और उनकी महत्वाकांक्षाओं को समझने का प्रयास किया जाएगा।
साथ ही इन विषयों को विश्व राजनीति और अर्थव्यवस्था से जुड़े बड़े सवालों के संदर्भ में भी देखा जाएगा।
इस पहल के बारे में एनडीटीवी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रधान संपादक राहुल कंवल ने कहा है कि देशों के बीच बेहतर संवाद तब शुरू हो सकता है, जब लोग अपनी पूर्वधारणाओं से ऊपर उठकर यह सुनने के लिए तैयार हों कि कोई देश खुद को किस तरह देखता है।
उनके अनुसार, इस यात्रा की शुरुआत के लिए नेपाल एक स्वाभाविक और महत्वपूर्ण गंतव्य है।
इसी तरह एनडीटीवी वर्ल्ड के संपादक नवीन कपूर ने कहा है कि यह पहल भारत को दुनिया से जोड़ने के प्रयास को और आगे बढ़ाएगी। उनके अनुसार, ‘अन्वीक्षा’ के माध्यम से विभिन्न देशों को उनकी अपनी दृष्टि, प्राथमिकताओं और अपेक्षाओं के आधार पर समझने का प्रयास किया जाएगा।
अन्य देशों में भी होंगे ऐसे कार्यक्रम
काठमांडू में होने वाला भारत-नेपाल संवाद ‘अन्वीक्षा’ की व्यापक योजना का पहला कदम होगा। यह संवाद श्रृंखला दुनिया के विभिन्न देशों और महाद्वीपों तक पहुंचने वाली है।
इस दौरान विभिन्न देशों की पहचान, उनकी महत्वाकांक्षाओं और उनके भविष्य को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर संवाद किया जाएगा।
एनडीटीवी के अनुसार, “इसलिए काठमांडू में होने वाला कार्यक्रम केवल भारत-नेपाल संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा।” कार्यक्रम में क्षेत्रीय और विश्व राजनीति में नेपाल की स्थिति, बदलती दुनिया में नेपाल की भूमिका तथा नेपाली समाज के आगामी सपनों और महत्वाकांक्षाओं से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल भी उठाए जाएंगे।

