ओलीजी सावधान ! कहीं अपनी ही कब्र पर ना रोना पड़े
गंगेश मिश्र , कपिलवस्तु, 23 नोभम्बर ।
अपराधियों के हाथों में सत्ता, लोकतन्त्र की हत्या हो रही है; इस देश में।”
“ जहाँ शैन्यतन्त्र हो, मूलमन्त्र , तिल-तिल कर, मरता लोकतन्त्र ।।”

जब निरपराध लोगों के खून से सने, अपराधियों के हाथों में सत्ता होगी; तो लोकतन्त्र की हत्या होनी ही है। हो भी रही है। माओवादियों के जनयुद्ध के दौरान, शैन्य कमाण्डर रह चुके ; शक्ति बस्नेत सेना का नेतृत्व संभाल रहे हों। उस देश में शान्तिपूर्ण आन्दोलन करना, आत्महत्या के ही समान है ; इन्हें गोली और गोलों की ही भाषा समझ में आयेगी। ये जंगली नरपिशाच, मानवता को तार-तार कर ही देंगे।
शनिवार की रात दिल दहला देने वाला,जो मौत का ताण्डव सप्तरी में देखने को मिला। ऐसा नहीं होना चाहिए था । पूर्व घोषित कार्यक्रम अनुसार, संयुक्त लोकतांत्रिक मधेशी मोर्चा के कार्यकर्ता भारी संख्या में रुपनी और भारदह में पूर्व- पश्चिम राजमार्ग अवरुद्ध करने के लिए एकत्रित हुए थे। ऐसे में प्रहरी और सेना द्वारा बल पूर्वक हस्तक्षेप करना, बिना सोचे समझे अन्धा- धुन्ध गोली चलाना । क्या यही जनता द्वारा, जनता के लिए ; चुनी गई लोकतान्त्रिक सरकार का चरित्र है। इस गोली काण्ड में सप्तरी के दो युवा नागेश्वर यादव तथा वीरेन्द्रराम शहीद हो गए। उनके परिवार वालों पर क्या बीत रही है, क्या सरकार कभी समझ पाएगी ?
इस पर भी जब संतोष नहीं मिला, तो सेना के जवान सगरभाथा अन्चल अस्पताल परिसर में घुस गए और उपचार के लिए आए ; घायल आन्दोलनकारियों, मधेशी समुदाय के मरीजों तथा पैथोलॉजिष्ट डा. विश्वनाथ मण्डल को बेरहमी से पीटा। ऐसे ही राजविराज में, सेना द्वारा चलाई गई गोली ,मधेशी मोर्चा के कार्यकर्ता एवं स्थानीय प्रदर्शनकारी दिलीप साह के सर में लगी। जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
अनपढ़ो की पूरी फौज तैयार कर, देश को जंगल की ओर ले जाने को तत्पर है, सरकार। अमर्यादित भाषा का प्रयोग, कर करके -कर करके, जनमानस को भड़काने का कार्य, लगातार सरकार पक्ष के द्वारा किया जा रहा है ।नफरत की भट्टी सुलगा कर, थोथा राष्ट्रवाद का तोता रटन्त करा कर किसका भला हुआ है; भला। अभी भी समय है, संभल जाओ ; नहीं तो एक समय ऐसा आएगा ; अपनी ही कब्र पर चिल्ला-चिल्ला कर रोओगे। तब अन्दर से आवाज़ आएगी,◆◆◆◆ ” अब पछताए होत का, जब चिड़िया चुग गई खेत।”
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