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गोली बैंक

 

गोली बैंक
व्यग्ंय(बिम्मीशर्मा
gun2 111हमारे देश में इतने सारे बैंक खुल चूक हंै पर गोली रखने के काम आने वाला बैंक अभी तक किसी ने नहीं खोला । इसी लिए एमाओवादी के नेता और बौद्ध दर्शन को मानने वाले लार क्याललामा ने इसका श्री गणेश बैंक के लकर में बन्दुक की चौध गोली रख कर कर दिया है । आखिर में लामा दूरदर्शी हैं, घर में गोली रखने से भगवान बुद्ध कहीं नाराज न हो जाएं, यही सोच कर बैंक के लकर मे रखवा दिया । पर हो गया उल्टा बैंक के लकर से उसी गोली को पुलिस ने वरामद कर लिया ।
यह अचरज की बात है नेपाल के पुलिस ने बैंक के लकर से जो गोली वरामद की वहयंहा तक पहुंची कैसे । गोली सीधा बन्दुक से निकल कर तो वहां गई नहीं होगी ? आज जब बैंक के लकर में गोली मिली है, हो सकता है कुछ दिनों बाद बैंक के लकर में ए. के. ४७ भी मिले । अब घर में तो इस को रखने पर आतकंवादी का ट्याग लगा दिया जाएगा । इसी लिए अब गोली, बन्दुक और अन्य घातक हथियार रखने के लिए भी नए, नए बैंक खुलने चाहिए । ताकि अपराधियों को अपना अपराध छुपाना नहीं पडेÞ और वह धड़ल्ले से लाईसेंस ले कर अपने अपराध और हथियार को बैंक में सुरक्षित रख सकें । आखिर इस देश में बोलबाला ही अपराधी और कालाबजारी करनें वालों का हैं ।
जब देश में आर्थिक कारोवार से ज्यादा बैंक और फाईनान्स कंपनी खुले हुए हों, वहां पर यह संस्थाए बाट जोहते होगें कि कौन क्या ले कर आएगा रखने के लिए ? अबलामा जैसे ”साधु“आदमी के पास क्या होगा जो वह बैंक में रखेगा ? साधु क्या धोएगा और क्या पहनेगा ? बेचारे लामा ने अपने पास जो था वहीं बैंक में रख दिया । महात्मा बुद्ध नें भी कहा है जिस के पास जो होता है वह उसी का प्रदर्शन करता है और औरों को भी वही देता है । अब बार बार विवादों में फंस चुके बौद्धमार्गी लामा के पास भी देनें और दिखानें के लिए यही बन्दुक की गोली ही बची थी सो दिखा दिया ।
जब बैंक अपने और पराए में भेद करते हैं, बैंक से लोन लेने के लिए किसी अपरिचित को जितने पापड़ बेलने पड़ते है । उतने बैंक के अधिकारियों को खिलापिला कर खुश कर देने पर उतने पापड़ बेलने नहीं पड़ते । दोया दर्जे के जमीन को भी अव्वल बता कर बैंक के अधिकारी अपने बैंक को ही लूटते है और अपना और अपने संबधियों का बेड़ा पार करते हैं । कालीदास की तरह बैठे हुए अपने ही शाखा को कुल्हाड़ी से काटना बैंकरो का जन्मसिद्ध अधिकार है । आए दिन बैंकों में होने वाले ठगी और लुटपाट की खबर से तो यह बैंक नहीं डाकुओं का पनाहगाह है । फिर लामा जैसे अपराधी नें बैंक के लकर में बन्दुक की गोली रख कर कौन सा बड़ा अपराध कर दिया ? यह तो लामा के लिए बाएं हाथ का खेल है । वह चाहे तो ए.कें ४७ या हाथी भी बैंक के लकर में रख सकते हैं ।
हमारे देश में खुले अनेक बैंकों के नाम सुन कर किसी को भी हंसी आएगी । एक बैंक है छिमेकी (पडोसी) विकास बैंक, इसका मतलब है यह बैंक आप के घर के बगल मे खुला तो आपका आर्थिक विकास निश्चित हैं । और दूसरा बैंक हैं सानिमा (छोटी मौसी) बैंक, अब जब प्राईवेट बैंक भी मौंसी हो गई तो सरकारी मातहत का नेपाल राष्ट्र बैंक तो हम सब के लिए मामाघर ही हुआ न ?फिर तो मामाघर से दक्षिणा में मुफ्त में पैसे मिलने चाहिए न ? तीसरा बैंक है प्रभु बैंक, अब इस बैंक में प्रभु विराजते हैं कि उनके भक्त यह तो वही बताएगा जिसका खाता इस बैंक में होगा ।
देश में वाणिज्य और विकास बैंक मिला कर करीब दो सौ की संख्या में है । फाईनान्स कंपनी और सहकारी अलग से है । फिर भी देश और जनता की गरीबी मिटती नहीं । देश में अर्थतंत्र को बढावा देने के लिए खुले इन बैंको ने गरीबी हटाने के नाम पर गरीबों को ही मिटा दिया और खुद आर्थिक रूप से संपन्न हो गए । इन बैंको नें गरीब जनता के पैसे और आंसु दोनो का डिपोजिट मे रखवा कर खुद फरार हो गए और खाताधार को कंगाल बना दिया ।
इस देश मे जिस के पास पैसा है वह कानून को अपनी जेब में रख कर चलता है । अब लामा भी माहिर खिलाड़ी है, वह एक तो पकड़े नहीं जाएगे, पकड़े भी गए तो जल्दी ही छूट जाएगें । जैसे आज वह रिहा हो गए, लगता है कमजोर आंखवाली नेपाल पुलिस ने मोती की माला को बन्दुक की गोली समझ लिया शायद । इसी लिए उपर से आदेश आते ही लारक्याललामा को उसी बन्दुक की गोली की माला पहनाते हुए बाइज्जत बरी कर दिया ।
जैसे हम घर में बार बार चुहा पकड़ते हैं और चुहेदानी में रख कर बाहर छोड़ आते हैं । उसी तरह नेपाल पुलिस भी लामा को विभिन्न अपराध में पकड़ती है और चुहे की तरह बाहर छोड़ आती है । चुहा तो मरा नहीं होता है इसी लिए लौट आता है । उसी तरह लामा भी पुलिस के पास लौट आते हैं और पुलिस उनको लाकअप में रख कर खूब आवभगत करती हैं । अकलामा एमाओवादी के नेता है कोई मधेशी दल थोड़े ही हैं । इसी लिए लामा को छूने से पुलिस को ही ४४० वोल्ट का करेंट लगता है ।
इ स देश में कोई सुरक्षितनहीं हैं, महंगी और कालाबजारी तो जनता की कमर तोड़ ही रही है । और कहां पर कौन किस की गोली निशाने में आ जाए कोई नहीं जानता । इसी लिए बन्दुक, गोली और अन्य हतियारों को घर में न सही बैंक में ही सही रखने के लिए सरकार को अनूमति दे देनी चाहिए । सर्वसाधारण कें हित का ख्याल रखते हुए सरकार और नेपाल राष्ट्र बैंक को निजी क्षेत्र को बन्दुक या गोली लकर में रखने या पैसे की जगह पर डिपोजिट में उसी को रख काम चलाने के लिए“गोली बैंक”खोलने के लिए इजाजत दे देनी चाहिए । इस देश में १७हजार नागरिकों के खून से लथपथ बन्दुक और अन्य हतियार बेकार मे जगं खा कर कोने में पड़ी हैं । इसी लिए गोली बैंक खोलने के लिए हमारे महान बौद्ध धर्मावलम्बी और उनके दर्शन को मानने वाले लारक्याललामा ने गोली बैंक खोलने का महान आइडिया इस देश को दिया है । क्या यह छोटी बात है ? लामा का शुक्रिया अदा कीजिए ।

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