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विश्वास, संस्कार और धैर्य ही जीवन की सबसे बड़ी पूँजी हैं : बिमल सर्राफ

 

बिमल सर्राफ, रक्सौल,भारत, 8 अगस्त 026। जीवन एक ऐसी पाठशाला है जहाँ हर दिन एक नया पाठ पढ़ाया जाता है और हर परिस्थिति एक नई परीक्षा लेकर आती है। वास्तव में ज़िंदगी एक प्रश्नपत्र की तरह है, जिसे जैसा है वैसा ही स्वीकार करना पड़ता है। इसमें कोई प्रश्न वैकल्पिक नहीं होता, हर प्रश्न का उत्तर देना ही पड़ता है। यही जीवन का सबसे बड़ा सत्य है।

आज हर व्यक्ति आनंद की तलाश में भटक रहा है। कोई धन में सुख खोज रहा है, कोई पद में और कोई प्रसिद्धि में। लेकिन सच्चाई यह है कि आनंद केवल एक अनुभूति है, जबकि दुःख एक ऐसा अनुभव है जो लगभग हर व्यक्ति के जीवन का हिस्सा बनता है। फिर भी वही व्यक्ति जीवन में सफल कहलाता है, जिसे स्वयं पर अटूट विश्वास होता है। आत्मविश्वास ही वह शक्ति है जो कठिन से कठिन परिस्थितियों को भी अवसर में बदल देती है।

जीवन में सम्मान मिले तो विनम्र रहना चाहिए और अपमान मिले तो धैर्य नहीं खोना चाहिए। परिस्थितियाँ चाहे जितनी भी विपरीत क्यों न हों, मनुष्य का स्वभाव कठोर नहीं होना चाहिए। वास्तविक जीत उसी की होती है जिसके शब्द मर्यादित हों, व्यवहार मधुर हो और हृदय विशाल हो।

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विडंबना यह है कि हम अक्सर उन चीज़ों के पीछे भागते रहते हैं जो हमें स्थायी सुकून नहीं दे सकतीं। इसके विपरीत जो चीज़ें हमें वास्तविक शांति देती हैं—परिवार, रिश्ते, समय, स्वास्थ्य, संतोष और ईश्वर का स्मरण—उन्हें हम हल्के में ले लेते हैं। तब जीवन हमें बार-बार उसी मोड़ पर लाकर खड़ा कर देता है, जहाँ से हमने अपने सच्चे सुख की अनदेखी करना शुरू किया था।

जीवन का एक और महत्वपूर्ण नियम है—कभी हार मत मानिए। इतिहास गवाह है कि अनेक लोगों ने अंतिम प्रयास में अपनी पूरी कहानी बदल दी। इसलिए असफलता को अंत नहीं, बल्कि सफलता की तैयारी समझना चाहिए।

रिश्ते भी किसी विशाल वृक्ष की तरह होते हैं। उन्हें एक दिन में न तो बनाया जा सकता है और न ही मजबूत किया जा सकता है। सबसे पहले विश्वास का बीज बोना पड़ता है, फिर साहस और धैर्य की खाद डालनी पड़ती है तथा प्रेम, त्याग और परिश्रम के जल से उन्हें निरंतर सींचना पड़ता है। तब वर्षों बाद वे रिश्ते फल देते हैं और जीवन को आनंद से भर देते हैं।

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हर परिस्थिति में विश्वास बनाए रखना आवश्यक है, क्योंकि जहाँ विश्वास जीवित रहता है, वहीं से नए मार्ग निकलते हैं। जिनकी सोच में आत्मविश्वास की सुगंध होती है, जिनके इरादों में साहस की मिठास होती है और जिनकी नीयत में सच्चाई का स्वाद होता है, उनका सम्पूर्ण जीवन एक महकते हुए गुलाब की तरह बन जाता है।

महान बनने की शिक्षा किसी विद्यालय में नहीं मिलती। मनुष्य का व्यवहार, उसकी वाणी, उसके संस्कार, उसका आचरण और उसके कर्म ही उसकी महानता का निर्माण करते हैं। डिग्रियाँ ज्ञान दे सकती हैं, लेकिन चरित्र नहीं। चरित्र का निर्माण अच्छे विचारों, श्रेष्ठ कर्मों और निरंतर आत्मचिंतन से होता है।

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समस्याएँ कभी बड़ी या छोटी नहीं होतीं। उनका आकार हमारी सोच और उन्हें हल करने की क्षमता पर निर्भर करता है। जिस दिन मनुष्य चुनौतियों से डरना छोड़ देता है, उसी दिन समस्याएँ भी छोटी लगने लगती हैं।

अंततः जीवन का सार यही है कि परिस्थितियों से नहीं, अपने दृष्टिकोण से जीवन बदलता है। यदि विश्वास अडिग हो, कर्म श्रेष्ठ हों, व्यवहार विनम्र हो और संस्कार मजबूत हों, तो कोई भी कठिनाई मनुष्य की सफलता का मार्ग नहीं रोक सकती।

आइए, हम जीवन को शिकायत नहीं, अवसर समझें; कठिनाइयों को बाधा नहीं, शिक्षक मानें; और अपने व्यक्तित्व को ऐसा बनाएँ कि हमारे कर्म ही हमारी सबसे बड़ी पहचान बन जाएँ। यही सफल, सार्थक और प्रेरणादायी जीवन का सच्चा मार्ग है।

बिमल सर्राफ
रक्सौल, पूर्वी चंपारण।

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