मुझे नींद आ रही है…… : पूजा गुप्ता
मुझे नींद आ रही है मै सोना चाहती हुँ
मैने जिन्दगी भर सिर्फ पाने की कोशीश की , सपने सच कर दिखाने की कोशीश की ,
दर्द से कराह रहे थे मेरे होठ फिर भी मैने मुस्कुराने की कोशीश की ,
मैंने हमेशा मुस्कुराने की कोशिश की , अब बेवजह रोना चाहती हुँ
मुझे नींद आ रही है मै सोना चाहती हुँ।
अपनों को सींचने के लिए मैने खुद को सुखाया ,उनके जीवन को हरा=भरा करने के मेरी ख्वाइस
ने मुझे दुखो के धुप में जलाया ,फिर भी मेरे आँचल में सिर्फ मेरे अपनों ने अपजश का दाग लगाया ,बहुत दाग लगा चूँकि ,इन सारी दागो को धोना चाहती हुँ,हाँ मै अपनों से ही दूर होना चाहती हुँ
मुझे नींद आ रही है मै सोना चाहती हुँ।
जीवन के पथ के संग्राम में मैने हमेशा दौर लगाया ,पर केवल संघर्ष और हार ही मेरे हिस्से में आया ,
फिर भी मैने बिना रुके बिना थके खुद को हमेशा आगे बढ़ाया,बहुत लड़ चूँकि अब मै हारना चाहती हुँ।
शायद बहुत बोल चूंकि ,अब खामोश होना चाहती हुँ।
मुझे नींद आ रही है मै सोना चाहती हुँ।


