Sat. Jul 25th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

खबरदार मधेशी मोर्चा ! शिकारी आएगा, जाल बिछायेगा, जाल मे फसना मत : बीरेन्द्र केएम

 

बीरेन्द्र केएम, काठमांडू , ५ मई |

समय ने एक बार फिर करवट ली है । राष्ट्रवादी और स्वाधिन्तावादी के देखावटी नारा दे के मधेशीयों को नरसंहार करने के लिये खड्ग चलाने बाले खड्गप्रसाद ओलि सहेब की सरकार अभी कोमा मे जा पहुची है । और नए सरकार को लेकर फिर से गृहकार्य सुरु हो गइ है । एसे मे मधेसी मोर्चा एकबार फिर निर्णयक चाभी बन्ने जारही है और सरकार परिवर्तन करके अपनी माग को पूरा करवाने कि जिम्मेदारी भी मोर्चा के काध मे आ गइ है ।

mahagathbandhan

एसे मे मधेसी मोर्चा को लोभ-लालच भी बहूत मिलनेबाली है और ये स्वाभिक भी है |  मधेसी मोर्चाको चाहिए कि किसी भी लोभ-लालच से अलग रहे  । क्योकि मधेसी जनता ने खून की होली खेल के मधेसी दलौं की गिरी हुइ साख को फिर से ताजगी करबाया है | इसलिए भी मधेशी दलों को सत्ता के खेल मे सामेल नही होना चाहिए | हां जरुरत परनेपर बिरोध समर्थन मे मतदान करने मे कोइ हर्ज नही है पर एसे मे भी एक सहमहती जरुरी है । लेकिन सरकार मे सामेल होना मन्त्री पद के लिए ब्यर्गेनिङ करना, और मधेसी का जो माग है जिसके लिए लोगो ने जान तक की कुर्वानी दिया है ।

यह भी पढें   अस्तित्वगत संकट में नेपाल

हालाकि हमेशा मधेशी दलों पर सत्ता का लोभी होने का आरोप लगाने वाले कांग्रेस, एमाले और माओवादी खुद कितनी सत्ता की लोभी है इसका नमूना आज कल सहज ही देखने को मिल जाता है। प्रधानमंत्री पद के लालच में पहले कांग्रेस फंसी और अब माओवादी भी लेकीन ये कोइ बुडा काम है ये भी नही कहा जा सकता क्यों कि राजनीति का दुसरा नाम सत्ता ही है ।

नेपाल में तीन दलीय तानाशाही को खत्म करने के लिए पहले कांग्रेस को प्रधानमंत्री का प्रलोभन देकर तीन दलीय गठबंधन को तोडा गया था। अब यही पासा फेंक कर प्रचण्ड और ओली के गठबंधन को तोडने में सफलता मिली है। और ये भी सच है कि प्रचण्ड के नेतृत्व में सरकार बनने जा रही है। जिसको कांग्रेस, राप्रपा नेपाल, राप्रपा सभी समर्थन करने को तैयार है । भले ही राप्रपा नेपाल ने नइ सरकार मे सामेल बाली बात नही बताइ हो लेकिन कल से ही उनका विशेष सक्रियता यही सकेत कररही है कि “भैया मै भी हू” और हमे भी साथ मे ले के चलो ।

यह भी पढें   सुकुम्बासियों को उनके गृह जिलों में वापस भेजने का निर्णय

हां ये भी सच है कि ऐसे मे सत्ता के इस खेल में मधेशी मोर्चा की भूमिका कुछ खास नही होगी लेकिन पहले भी केपी ओली को प्रधानमंत्री बनने से रोकने के लिए मधेशी मोर्चा को संसद में कांग्रेस का समर्थन करना पडा था और इस बार ओली को सत्ता से बाहर करने के लिए फिर से ओली के खिलाफ खडा होना होगा।
तो एसे मे हम ये तो जरुर कह सकते है सव अपनी तैयारी मे है और मधेसी मोर्चा भी तैयारी में रहे ।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.