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हद हो गई हैवानियत की
रमेश झा

nepal police murderइन्सान जब अपनी इन्सानियत को छोडÞकर हैवानियत पर उतर जाता है तो वह हैवानियत की भी सारी हदें पार कर जाय तो कोई अचरज की बात नहीं । सशस्त्र प्रहरी -नेपाल आर्म्ड पुलिस) के डीआइजी रञ्जन कोइराला ने इस बात को अपने काले करतूतों से प्रमाणित कर दिया है । कोइराला अभी अपनी श्रीमती गीता ढकाल की हत्या के जर्ुम में महानगरीय प्रहरी परिसर में न्यायिक हिरासत में नजरबन्द हैं । गत पौष २७ गते बुढानिलकण्ठ स्थित अपने ही निवास से गुम हर्ुइ गीता ढकाल की हत्या निवास में ही सिरानी से मुँह दबाकर पति ने की थी और मकवापुर जिले में पालुङ नामक जगह में शव को जलाया गया था, प्रारम्भिक अनुसन्धान में प्रहरी ने बताया है ।
वि.स. २०५० साल में, जब गीता ढकाल की उमर बीस साल थी, दोनों की शादी परम्परागत ढंग से हर्ुइ थी । नेपाल वायुसेवा निगम के पर्ूव निर्देशक रह चुके हरेराम ढकाल कहते है, अपने परिचित लोग हीं लडÞकी का हाथ माँगने आए, बात तय हो गई । कोइराला उस समय इन्सपेक्टर थे । लडÞके के विषय में हम लोगों ने ज्यादा खोजखबर नहीं की । लडÞका निकला महा बदमाश ।
गीता की माँ हरिप्रिया ढकाल कहती है, शादी के कुछ दिनों के बाद ही दामाद साहब हमारी बेटी को मारने पीटने लगे । राजकुमारी की तरह जिस बेटी को पाला पोसा था, वह एक कर्साई के हाथो. पडÞ गई । अब पछाए हो त क्या चीडिÞया चुग गई खेत !
रञ्जन की डायरी से पता चलता है कि उस का ‘लभ अफेयर’ किसी और से विवाह पर्ूव ही था । रञ्जन चीन स्थित नेशनल डिफेन्स कोर्स करते हुए छुट्टी में नेपाल आए थे । दाम्पत्य कलह ने गीता और रञ्जन को नदी के दो किनारों की तरह सदा के लिए दूर कर दिया था । पत्नी गीता ६ वर्षों से अलग ही बूढानीलकण्ठ स्थित चपली में अपने छोटे बेटे के साथ रहती थी । पत्नी गीता ने अपने भरण पोषण के लिए जिल्ला अदालत काठमांडू में मुकदमा दायर किया था । अदालत ने रञ्जन के मासिक बेतन में से आधा बेतन पत्नी गीता को देने को आदेश दिया ।
क्रिमिनल साइकोलोजी में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त डिआईजी ने पत्नी की हत्या करके लाश को कुशलतापर्ूवक गाडÞी में छुपाकर मकवानपुर जिला पालुङ के पास जलाने के बाद, समझा कि मामला रफा दफा हो गया । मगर उन के क्रिमिनल साइकोलोजी में कहीं भी नहीं होगा- पाप सर पर चढके बोलता है । शंकास्पद आवस्था में डिआईजी को देखकर कुछ स्थानीय लोगों ने प्रहरी को सूचना दी और वे लौटते वक्त पकडÞे गए । उच्च पदस्थ होने के रसूख से रञ्जन के केस में कैस्ो-कैसे परिवर्तन आते है, यह देखना बाँकी है । इस हत्याकाण्ड में प्रहरी विभाग की अग्निपरीक्षा भी हो जाएगी । ±±±

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