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दरबार हत्याकाण्ड के आज १५ वर्ष बीत गए, इतिहास के गर्भ में अभी भी दफन है रहस्य

 

विजेता चौधरी, जेठ १९
नेपाल के इतिहास में जेठ १९ गते की रात कभी न भुला पाने बाली काली रात बन के आई । जेठ १९ की रात को नेपाल के राजा विरेन्द्र शाह के बंश का विनाश करने बाली दरबार हत्या काण्ड को आज १५ वर्ष पूरे हो चुके हैं । इस विभत्स हत्याकांड के कई परत आज भी खुलने बाकी हैं। राज परिवार के सदस्यों की पारिवारिक रात्री भोज कार्यक्रम के वक्त हुई हत्याकाण्ड में तत्कालीन राजा विरेन्द्र, रानी ऐश्वर्या, युवराज दीपेन्द्र, अधिराज कुमारी श्रुति, अधिराज कुमार निराजन सहित परिवार के अन्य १० लोगों की असामयिक मृत्यु हुई थी ।

raja birendra
उस रात की घटना अभी भी रहस्यमय बनी हुई है । वि. सं. २०५८ साल जेठ १९ की रात दरबार के भीतर हुई गोली काण्ड में राजा विरेन्द्र का वंश ही समाप्त हो गया । बहरहाल दरबार हत्याकाण्ड घटना के बाद तत्कालीन सरकार द्वारा गठित जाँच समिति ने जाँच पडताल के बाद तैयार किए गए प्रतिवेदन में कहा गया कि यह घटना तत्कालीन युवराज दीपेन्द्र द्वारा किया गया था उन्होंने ही इस कार्य को अंजाम दिया ।
यद्यपि दीपेन्द्र ने अपनी प्रेमिका देवयानी राणा के साथ विवाह करने को परिवार से अनुमति न मिलने के आवेश में उक्त काण्ड करने की बाते अब तक की जा रही है । लेकिन अभी भी कई प्रश्न अनसुलझे है्र । कई तथ्य रहस्य बना हुआ है । उस से भी अधिक आज तक नेपाली जनता इस बात को मानने को कतई तैयार नही है कि उक्त काण्ड युवराज ने किया होगा ।
गौरतलब है– राजा के हत्या के बाद उन के छोटे भाई ज्ञानेन्द्र शाह का शासन प्रारम्भ हुआ । जनता की नजर में निरंकुश शासक ज्ञानेन्द्र के विरुद्ध जनआन्दोलन २०६२–६३ के सफलता के साथ ही ज्ञानेन्द्र का शासन पतन हुआ व नेपाल से राज संस्था का ही अन्त हो गया ।
स्वागतयोग्य बात ये है कि राज परिवार हत्याकाण्ड के १५ वर्ष वाद अचानक फिर से उक्त घटना के रहस्य के प्रति मीडिया बोल रही है । फिर से जनता संवेदित हो चली है । अब ये तो वक्त ही बताएगा कि राज दरबार के अन्य काण्ड की तरह इस घटना का रहस्य भी क्या कभी नही खुलेगा ? या फिर सत्य खुद इतिहास के गर्भ से बाहर आ जाएगी । कुछ कहना असंभव है । क्योंकि इस काण्ड के रहस्योदघाटन के साथ ही वहुत सारे रहस्य बेनकाब होने की संभावना है ।
यद्यपि नारायण हिटी राजदरबार अभी संग्रहालय बना दिया गया है । दरबार हत्याकाण्ड हुए महल को उसी बक्त तोड दिया गया था । ये भी एक रहस्य ही है कि आखिर इतनी जल्दी क्यों थी महल को तोडने की क्या यह सबूत मिटाने के लिए किया गया था ? इस बात को लेकर जनता में अभी भी आक्रोश है । गोली काण्ड हुए उस स्थान पर फिर से नई संरचना बनायी जा रही है । प्रश्न उत्तरहीन है क्या नई संरचना रहस्य को दबाने की नई साजिश है…?

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