अंतहीन सफर : डा.श्वेता दीप्ति
अंतहीन सफर

डा.श्वेता दीप्ति
कविता
कहाँ खत्म होगी जिन्दगी
ये तो मालूम नहीं ।
पर उसे कई रूपों में देखा है मैंने ।
कभी उथली सी, तो कभी गहरी ।
कभी सीधी सपाट सड़कों सी
तो कभी पहाड़ी नदियों सी ।
कई मोड़, कई उतार चढ़ाव
उसका हर रूप सबक था मेरे लिए,
हर पल कई अनुभवों से
रुबरु कराती रही वो मुझे ।
पर, न तो नदियों की तरह
मुझे बहना आया, और न ही
सड़कों की तरह अंतहीन
यात्रा तय करना ।
एक अव्यक्त चाह पलती रही
मुझमें, न चाहते हुए भी ।
और मैं अपने हासिल को
हासिल नहीं समझ पाई ।
झेलती रही असह्य पीड़ा,
हर पल, हर क्षण
पर, कब तक ???
परिचय – कवियत्री केन्द्रीय हिन्दी विभाग कीर्तिपुर, काठमान्डौ, नेपाल में विभागाध्यक्ष के पद पर आसीन है ।
From
http://www.phanishwarnathrenu.com/more.php?readmore=10000123


