Mon. Oct 5th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

100 साल के बुजुर्ग ने सुंदरकांड का अंग्रेजी में किया अनुवाद, 10 साल में पूरी हुई किताब

 

काठमांडू, 16 सैप्टेम्बर । अंग्रेजी पाठकों के लिए अच्छी खबर है, अब वे सुंदरकांड को संस्कृत ही नहीं बल्कि अंग्रेजी में भी पढ़ सकेंगे। पुणे के एक प्रकाशन ने वाल्मिकी रामायण के सुंदरकांड का अंग्रेजी वर्जन पब्लिश किया है। इसका अनुवाद टेक्सास में रहने वाले भारतीय 100 वर्षीय रामालिंगम सर्मा ने किया था।

कहते हैं कि इच्छाशक्ति हो तो किसी भी काम को मुमकिन बनाया जा सकता है। 100 वर्षीय रामालिंगम सर्मा ने अंग्रेजी में सुंदरकांड का अनुवाद किया है।
कहते हैं कि इच्छाशक्ति हो तो किसी भी काम को मुमकिन बनाया जा सकता है। 100 वर्षीय रामालिंगम सर्मा ने अंग्रेजी में सुंदरकांड का अनुवाद किया है।

दो संस्करण में है यह किताब

90 साल की उम्र में सर्मा ने सुंदरकांड का अनुवाद करना शुरू कर दिया था। इसे पूरा होने में दस साल का समय लगा। पुणे में रहने वाली अवाती ने ही शर्मा के अनुवाद को प्रूफरीड भी किया है। यह किताब दो संस्क्रणों में है जिसमें से प्रत्येक में 650 पेज है। इसका उपयोग रिसर्च और शैक्षिक संस्थाओं, विश्वविद्यालयों के संस्कृत विभागों में किया जाएगा।

यह भी पढें   आज का पंचांग: आज दिनांक 4 अक्टुबर 2026 रविवार शुभसंवत् 2083

श्लोक के साथ उसका अर्थ भी

टेक्सास के फ्रिस्को में रहने वाले शर्मा ने हर श्लोक को अंग्रेजी में फिर से लिखा है और साथ में संस्कृत के हर शब्द का अर्थ भी किताब में दिया गया है। उन्होंने अंग्रेजी में श्लोक के बारे में अलग से भी बताया है। अंग्रेजी पाठकों के लिए उन्होंने यह प्रयास किया है ताकि वे सुंदरकांड को आराम से समझ सकें और संस्कृत भाषा का आनंद ले सकें। हर श्लोक का मतलब आसान, समझने लायक और स्पष्ट अंग्रेजी में समझाया गया है। हर छंद को एक शब्द के वाक्यांश में तोड़ा गया है। ट्रांसलिट्रेशन में हर संस्कृत शब्द और उसके मतलब का ध्यान रखा गया है।

यह भी पढें   आज का पंचांग: आज दिनांक 5 अक्टुबर 2026 सोमवार शुभसंवत् 2083

यहां से मिली प्रेरणा

अमेरिका में टेक्सास के क्रिस्को गांव में रह रहे सरमा ने पहले तमिल में सुंदकांड को पढ़ा था तभी उन्हें यह आइडिया आया। रामलिंगम ने बताया, ‘बचपन में मां सुंदरकांड करतीं थी वह कर्णप्रिय था हालांकि उस वक्त अर्थ नहीं समझ आता था। पर बड़े होने पर 35 साल की उम्र में सुंदरकांड पढ़ने का अवसर मिला। लेकिन संस्कृत में नहीं पढ़ पाया क्योंकि यह भाषा नहीं आती थी। बाद में इंटरनेट की मदद से संस्कृत सीखा। 88 साल की उम्र में टाइपिंग स्कूल में एडमिशन ले लिया।

यह भी पढें   आज का पंचांग: आज दिनांक 3 अक्टुबर 2026 शनिवार शुभसंवत् 2083

बेचने के बारे में सोचा नहीं

रिटायर होने के बाद वे भारत में पत्नी के साथ रहते थे। पत्नी की मौत के बाद बेटे के पास अमेरिका आ गए। इसके बाद अपने सपने को साकार किया। रामलिंगम अपने दस साल की मेहनत वाले इस किताब को बेचना नहीं चाहते। वे इसे पुस्तकालयों और संस्कृत के रिसर्चर्स को गिफ्ट करेंगे। इसी साल 6 फरवरी को अपने 100 वें जन्मदिन पर उन्होंने पुस्तक का विमोचन किया है। ( jagaran )

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com