बिरगंज के ब्यापारी जो अन्यत्र पलायन हुए है उन्हे पुनःस्थापित किया जायेगा : सी डी ओ
वीरगंज ,२७ सेप्टेम्बर// देश की आर्थिक नगरी बिरगंज, मधेश आंदोलन से पहले तक रौनक की चकाचोंध में डूबी थी। हर दुकान, फैक्ट्री में चहल-पहल दिखती थी, आज दुकानें खाली पड़ी है, अब ग्राहकों का नामोनिशान तक नहीं है, दुकानदारों को किराया देना मुश्किल पड़ रहा है। पहले बिरगंज से रक्सौल जाने में घंटो लगते थे, आज सड़के भी खाली पड़ी है। आखिर इस मंदी का कारण क्या है ? क्यो अचानक उपभोक्ता की क्रयशक्ति क्षीण हो गई ? क्योँ रोज दिन बिरगँज के उपभोत्ता ठगे जा रहे है ? इसके गर्भ में कई सवाल और भविष्य की कई आशंकाओ की खोज जरूरी है । इसलिए बिरगंज के कई प्रभावशाली ब्यवसायी से बातचित कर उनके समस्या को खंगालने और समाधानके लिए पर्सा के प्रमुख जिल्ला अधिकारी ‘केशव राज घिमिरे’ से ‘हिमालनी’ संवादाता धनजिव मिश्रा से बातचीप के मुख्य अंश।
(१) बिरगँज के ब्यापारीक क्षेत्र मे आपका अनुभव कैसा रहा है ?
अभी भी देश मे राजनितिक अस्थिरता होने के कारण समय-समय पर कुछ समस्या होते रहता है। फिलहाल बिरगँज का ब्यापार ठिक-ठाक चल रहा है। मधेश आन्दोलन के कारण ब्यापार क्षेत्र अस्त-ब्यस्त हुआ था,लेकिन अभी क्रमिक रुप से सुधार होते जा रहा है । बिरगँज देश का मुख्य प्रवेश द्वार है और देश का आर्थीक नगरी हाने के कारण चौतरफी सहयोग की आवश्यक्त्ता है ।
(२) बिरगँज के ब्यापारी अन्यत्र पलायन हो रहे है ?
अब बिरगँज मे बहुत दिन तक आन्दोलन चलता रहा, नाका भी बन्द रहा जिसके कारण ब्यापारीयो मे लगानी डुबने का डर दिखने लगा, जिसके कारण कुछ लगानीकर्ता आन्दोलन के समय ही अपना कारोबार सिफ्ट किए है, फिर भी नेपाल सरकार के गृह मन्त्री,तिनो सुरक्षा निकाय के प्रमुख, गृह सचिव लगायत के टोली बिरगँज आकर यहा के ब्यापारी एवम लगानीकर्ता से अन्तरकृया किया है और प्रतिबध्ता जताए है की आपलोगो का सुरक्षा के पूर्ण ग्याराण्टी हम लेते है और अगामी दिनमे इस तरह का समस्या नही आने दिया जाएगा ।
(३) आपने सुरक्षा देने की वादा किया है, आन्दोलनकारी फिर आन्दोलनके चेतावनी दे रहे है दोनो एक साथ कैसे सम्भव है ?
सही बात कही आँपने, वास्तव मे दोनो मे से किसी एक के बिना बिरगँज के विकास एवम प्रगति सम्भव नही है। हम लोग पटक पटक समय अनुसार राजनितिक दल के ब्यत्तियो से भी परामर्श करते आ रहे है। राजनितिक दल के जितने भी एजेण्डे है वह सब एक राजनितिक मुद्धा है और हम उसमे किसी भी तरह के बाधा अडचन भी नही करना चाहते है हम उन्हे यह समझाने के कोशिश करते है की आप लोग बिरोध करीए लेकिन इस तरह से की ब्यापारी को अलगपन महसुस न हो,क्यो की जब ब्यापार ही नही रहा तो समृद्ध बिरगँज नही रहेगा और जब बिरगँज ही नही रहा तो आँप किसके लिए लडीएगा।
(४)अनुमानित लक्ष्य अनुसार राजश्व सँकलन हुआ है की नही ?
अब आन्दोलन से पहले तो यही बिरगँज भन्सार अपना अनुमानित लक्ष्य से डेढ गुणा ज्यादा राजश्व सँकलन किया था, लेकिन पिछले आ.व.०७२-०७३ के शुरुवात में ही आन्दोन शुरु हो गया और लगभग लगभग पुरे वर्ष ही चलता रहा जिसके कारण राजश्व सँकलन के कार्य बुरी तरह से बिगड गया अन्तिम समय में माहोल शान्त होने के बाद आर्थीक वर्ष के अन्तिम तिन माह मे राजश्व सँकलन हुआ पर प्रभावकारी नही हुआ अब क्रमिक रुपसे सुधार हो रहा है ।
(५) रोज दिन बिरगंज के उपभोत्ता ठगे जा रहे है इसके लिए क्या कहेँगे ?
देखिए यह एक बहुत ही गंभीर बिषय है और इस पर सिर्फ सरकार और प्रशासन ही नही बल्कि उपभोत्ताओ को भी उतना ही जिम्मेवार बनना होगा, हालाकी जिल्ला प्रशासन कार्यालय ने अनुगमन टोलि गठन किया है और निरन्तर बजार मे अनुगम भी करते आ रहा है और गलती करने वाले को कार्यवाही भी किया है लेकिन उपभोत्ता यदि हमे निरन्तर सुचना दे तो यह कार्य और प्रभावकारी होगा और उपभोत्ता को ठगी से बचाया जा सकता है ।
(६) मधेश आन्दोलन को लेकर यहा के ब्यापारियो को प्रशासन परेशान करते है और विभेद पूर्ण अनुगमन भी करते है ?
आन्दोलन से हमारा सरोकार नही है यह लोगो मे एक भ्रम है क्यो की बिरगँज मे पहले भी अनुगमन होता था और आज भी हो रहा है। जहा तक विभेद की बात है तो यह एक निराधार आरोप है वैसा कुछ नही है हम चार्ट बनाते है और चार्ट मुताबिक ही आज एक सेक्टर मे तो कल दुसरे सेक्टरमे अनुगम होता है ।
(७) बिरगंज के ब्यापारी जो अन्यत्र पलायन हुए है उन्हे पुनःस्थापित करने के लिए कैसा कदम उठाएगेँ ?
देखिए ऐसा भी होता है की ब्यापारी सिर्फ एक जगह ही नही वल्कि जगह बदल के भी ब्यापार करना पसँद करते होँगे जिसका हम लोग पहले नोटीस नही किए होँगे और अभी लग रहा है की आन्दोलन और सुँरक्षा के कारण ब्यापारी सिफ्ट हो गए है फिर भी जो ब्यापारी सुरक्षाके कारण यदि कारोबार सिफ्ट किए है उन्हे मै आग्रह करुगाँ की वे वापस आएं, सुरक्षा हम देँगे, आँपलोग निश्चिन्त होकर अपना काम किजिए ।


