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दिपावली की रौनक से जीवन्त काठमांडू : विजेता चौधरी

 

dipabali

विजेता चौधरी, कार्तिक ११ । बाटो भरी तिहार बनेर सयपत्री फूली रहेछ… लेखिका शारदा शर्मा ने अपनी यात्रा वृतान्त में पति राजनीतिज्ञ नरहरी आचार्य द्वारा बोलेगएं इन पंक्ति के विषय में लिखा है कि रास्ते भर गेन्दा के फूलों ने हमे देश में पर्व आने का आभाष कराता रहा ।        
यूँ तो राजधानी शहर हमेशा झिलमिलता रहता है । पर त्योहारो में काठमांडू की सजीवता कुछ खास बढ जाती है । बिजुलीबजार के अच्युत बराल बताते हैं– गेन्दा फूल की कियारियों में झुलती पिली फूल वैसे भी नेपाल में दिपावली अर्थात तिहार के आगमन का संकेत मानाजाता है । मिठाइ, प्रसाद, भाइबहनो के लिए उपहार, त्योहारो के लिए खानपिन के इन्तजाम में जुटे लोगों की वजह से अभी से बाजार में काफी भीड बढ रही है । बराल बताते हैं इस वर्ष खाद्य सामान कुछ ज्यादा ही महंगा हो गया है । सरकार अपने जनता को त्योहारों के समय मे भी राहत नहीं पुहँचा पाति है ।
सडक किनारे बेचने को रखा रंगविरंगी दिप, गेन्दाफूल की लडियां और सुपारी फूल की मालाओं से सजी दुकान बता रही है कि रोश्नी का त्योहार आया है । हर तरफ पर्वमय बना हुआ है ।
रुद्रमति मार्ग, बुद्धनगर १० के व्यापारी दिनेश जयसवाल ने बताया अभी दिपावली, भाइदूज और छठ जैसी बडे पर्व–त्योहारों का रौनक है, इसी लिए सामान का बिक्री बढ गया है । पूजा की हरतरह का सामान बेचनेवाले जयसवाल बताते हैं पूजा का सामान तो कुछ खास महंगा नहीं हुआ है । यद्यपि मूर्ति, कौडी, शंख पित्तल के दिये के भाउ में थाडी बढोतरी हुइ है । एक प्रश्न पर जयसवाल कहते हंै कुछ व्यापारी पर्व के मौके पर मनमानी दाम असुलता है ।
राजधानी के प्रायः सभी मुख्य बाजार में पूजा व त्योहारों के सामान खरीदनेवालों की भीड देखने को मिलती है । व्यापारियों ने भी आर्कषक वस्तुओं से बजार की माग को जैसे और बढा दिया हो ।
वहीं स्कुलो कालजों में होने लगी छुटिटयों व तैयारियों से बच्चों में भी त्योहारों को लेकर उमंग देखने को मिलती है ।
इतना ही नहीं माता लक्ष्मी के आगमन हेतु घर, दुकान, आफिस को कलर करवाना, साफसफाइ का कार्य भी उतने ही जोरशोर से चल रही है । बडे व्यापारीक भवन, बैंक, घर, दुकान, कार्यालयों में रंगवीरंगी बिजली की झिलमिm बल्ब बलने शुरु होगएं हैं ।
संस्कृतिवि डा. रेवतीरमण लाल का मानना है पर्व हमारी धरोहर है, इसे सांस्कृतिक रुप से व संयमता से निभाते हुए जिवन्त रखें पर विकृति बढाते हुए पर्व को मोर्डन बनाते हुए उन्हें लोप न होने दें । उनकी चिन्ता थीं आज हमने पर्व को भडकिला कर दिया तो कल हमारे बच्चे उन्हें और बढावा देगें या थक के छोड देगें । इसी लिए वर्ष दिन के पर्व में संयत बरतकर हुल्लास के साथ मनाने को आग्रह करते हैं लाल ।

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