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संसोधन का समर्थन मधेसी मोर्चा के नियत पर शंका : डा. मुकेश झा

 

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डा. मुकेश झा, जनकपुर,११ दिसिम्बर | जिस संसोधन प्रस्ताव से उत्पीड़ित समुदाय को कुछ नही मिल रहा हो उस संसोधन प्रस्ताव में सहमति जनाना और समर्थन करना मधेसी मोर्चा के नियत पर शंका उत्पन्न कर रही है। मोर्चा को यह बात स्पष्ट करना होगा की संसोधन के ७ बूंदा में से किस बूंदा ने मधेसी के मांग को सम्बोधन किया है। सिर्फ संसोधन के लिए और एमाले ने जो विरोध किया है उस के लिए ही होने वाली संसोधन का समर्थन करना उपयुक्त नहीं कहा जा सकता। मोर्चा का यह पहली गलती नही है। वह पहले भी ऐसा कई भीषण गलतियां कर चुकी है जिस से मधेस और मधेसी के अधिकार संघर्ष पर काफी गहरा प्रभाव पड़ा है।

पिछली बार जब प्रधान मंत्री के लिए चुनाव हुवा तो मोर्चा ने मधेसी जनभावना के विरुद्ध उसमे भाग लिया और कांग्रेस को मतदान किया। जब चौतर्फी उस घटना का विरोध किया गया तब ऐसा उसने एमाले के खिलाफ मतदान करने वाली हास्यास्पद वक्तव्य दिया। मोर्चा के नेतृत्व को क्या यह भी नही पता कि जहाँ सारे जनता अधिकार के लिए संघर्षरत हो वहां नेतृत्व को जनमत के साथ रहना चाहिए या सत्ता साझेदारी में अपना मत देना चाहिए ? अगर सही से देखा जाए तो मोर्चा ने ही जन आंदोलन को हाइजैक करके सत्ता के गोद में दे दिया, जनता कहती रह गई एक झंडा में आ कर आंदोलन करो वह नही हुवा, मोर्चा के नेतृत्व में पिछले समझौता का क्या हुवा वह पूछने तक की औकात नही है और लम्बी लम्बी डिंग मार रहा है। काठमांडू से ये लोग जनांदोलन को हाईजैक करने ही आये थे जब वह काम हो गया तो जा कर एसी में बैठ गए। आर पार की लड़ाई की दुहाई देने वालों को पूछना चाहता हूँ की क्या ऐसे ही संविधान और संसोधन के लिए (54+60) 104 लोगों ने क़ुरबानी दी ? क्या उनका यही कहना था की मोर्चा वाले एमाले जो करे उसका उल्टा करना ? मोर्चा का ढंग देख कर अब तो ऐसा लगने लगा है कि जैसा संघियता के लिए मधेसिओं ने जान दिया है और जो सम्झौता में लिखा गया है अगर वैसा संघियता आता है तो ठीक नही तो ऐसी खिचड़ी संघियता से मधेसी हमेशा अल्पमत में रहेगा, ऐसा संघियता का कोई औचित्य नही। जब पिछले साल आंदोलन चल रहा था, जब नाकाबंदी था तब ऐसा ही नाटक, आंदोलन के समय भी मधेस में नहीं टिके, आज तक सरकार के साथ किये हुए एक भी सम्झौता लागू नही करवा पाए, और सही पर सही घिसने में मजा आता है। क्या सिर्फ सही घिसने के लिए यह बैठे हैं? हद तो अब हुई जब मोर्चा कह रहा है कि एमाले इस संविधान संसोधन का विरोध कर रहा है इसिलिए हम इसका समर्थन करेंगे! पता नही किस मिटटी से खुदा ने इनको बनाया है, क्यों की भगवान के द्वारा सही से बनाया गया राजनेता तो ऐसा होता ही नही।अब तो ऐसा लग रहा है मधेस को सत्ता से ज्यादा मोर्चा बर्बाद कर रहा है और यह सब कुछ सत्यानाश कर के ही छोडेगा।मोर्चा ने जो मधेसी को कुछ नही मिलने वाला संसोधन जो की सिर्फ दुनिया को दिखाने के लिए किया जाने वाला ससोधन है उसमे सहमति जना कर साफ़ साफ़ शंका के घेरे में है और मोर्चा या तो पतित हुवा या मधेसी के साथ धोखा कर रहा है।

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