छाउपडी ने एक और जान ली
काठमान्डौ, पूस ४ गते
मंगलसेनः मासिक होने पर छाउपडी गोठ में सोई हुई किशोरी की जान गई । महिला तथा बालबालिका कार्यालय द्वारा सेभ दी चिल्ड्रेन के सहयोग में सञ्चालन छाउपडी निवारण परियोजना के अन्तर्गत एक वर्ष पहले छाउपडी गोठमुक्त गाउँ घोषित गाज्रा में ही छाउपडी गोठ में किशोरी की मृत्यु हुई है ।
मासिक होने की अवस्था में छाउपडी गोठ में गाज्रा–७ की १५ वर्षीया रोशनी तिरुवा ने शनिवार अपनी जान गवाई है । इससे पहले तिमिल्सेन–७ की डम्बरा उपाध्याय कुछ ही सप्ताह पहले छाउपडी गोठ में अपनी जान गंवाई थी ।घटनास्थल में पहुँचे प्रहरी निरीक्षक बद्रीप्रसाद ढकाल के अनुसार घर से २० फिट दूर संकरे गोठ में जहाँ दरवाजे के अलावा और कोइृ जगह नहीं थी हवा आने के लिए जिसमें आग जलाकर सोने की वजह से दम घुटने के कारण मृत्यु हुई है ।अछाम मे पिछले एक दशक में १० महिला तथा किशोरी ने महिनाबारी की अवस्था में छाउपडी गोठ में अपनी जान गँवाई है ।


