भारत में खुलेंगे विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस, योजना को नीति आयोग की हरी झंडी…
*नई दिल्ली*मधुरेश,१४ जनवरी | भारतीय छात्र अब अपने ही देश में विदेशी विश्वविद्यालयों से शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। नीतिगत मामलों में केंद्र सरकार को सुझाव देने वाले नीति आयोग ने इस मामले में महत्वपूर्ण सिफारिश की है। इसके मुताबिक सरकार देश में विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस खोलने की दिशा में आगे बढ़ सकती है। आयोग ने इसके लिए तीन विकल्प भी सुझाए हैं। आयोग के द्वारा सुझाए गये विकल्पों में पहला यह है कि विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस खोलने और उनके काम पर निगरानी रखने के लिए नया कानून बनाया जाए। उसके मुताबिक निगरानी रखने का काम विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के जरिये हो सकता है।
दूसरा सुझाव यह है कि इसके लिए सन् 1956 के यूजीसी कानून में संशोधन किया जा सकता है, और देश में विदेशी विश्वविद्यालयों को डीम्ड यूनिवर्सिटी की तरह चलाने की मंजूरी दी जा सकती है। तीसरा विकल्य यह है कि यूजीसी और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के मौजूदा प्रावधानों को ही इधर-उधर कर के ऐसा बंदोबस्त कर दिया जाए जिससे विदेशी विश्वविद्यालयों के अध्ययन केंद्र खुल सकें। आधिकारिक सूत्रों के हवाले से आई खबर के मुताबिक आयोग के सुझाव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मंजूरी दे चुके हैं। अब इस मामले में आगे कार्रवाई करने का काम मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्रालय का है। भारत में अभी ऐसा कोई कानून नहीं है जिसके तहत विदेशी संस्थानों को देश में स्वतंत्र अध्ययन केंद्र खोलने की इजाजत दी जा सके। अभी तक विदेशी शिक्षण संस्थान देश के संस्थानों के साथ मिलकर संयुक्त रूप से ही अपने शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित कर पाते हैं। करीब 600 विदेशी संस्थान ऐसा कर भी रहे हैं। पहली बार इस दिशा में पहल 1995 में प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हाराव की सरकार के वक्त की गई थी। लेकिन यह परवान नहीं चढ़ी। इसके बाद यूपीए (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) सरकार के पहले कार्यकाल में 2005-06 में एक और कोशिश की गई। लेकिन तब केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ही इसे मंजूरी नहीं दी। यूपीए के दूसरे कार्यकाल में जब कपिल सिब्बल ने एचआरडी मंत्रालय संभाला तो एक बार फिर यह मामला आगे बढ़ा। उन्होंने विदेशी शिक्षण संस्थान कानून-2010 संसद में पेश किया, लेकिन यह पारित नहीं हो सका।


