“राजधोव दिवस मनाया गया सप्तरी भारदह मे”!!
रोशन झा भारदह, १ फरवरी | विभिन्न जात-जाति की सामुहिक बसोवास के रुप मे रहें आधुनिक समाज में सभी का अपना-अपना जातिय पहचान और ईतिहास है । जाति वर्ग और सम्प्रदाय को बहुत सारे लोग मानव निर्मित मानते हैं, तो बहुत सारे लोग देव निर्मित, ईस पर बहस ना करते हुए हर एक व्यक्ति में मानवता की भावना होनी चाहिए यही मेरा है अभिप्राय है।
नेपाल तथा भारत दोनों स्थान में रहे ईस जाती का सैकड़ों वर्ष पुराना ईतिहास है । वैज्ञानिक डाॅ. सि. के. राउत भू. पु. मन्त्री सत्य ना. मण्डल जैसे अन्य महान हस्ति भी ईस जाति के व्यक्ति है । लोकतन्त्र स्थापना के पश्चात हर एक जाति को पहिचान और आरक्षण दिया गया । किन्तु नेपाल मे कुल 18000(अठारह हजार) से अधिक बसोवास रहे ईस जाति को आज भी राष्ट्र स्तर पर अपेक्षाकृत पहिचान नही मिल पाया है । सप्तरी जिल्ला मे अधिक बसोवास रहे ईस जाति ने अपनी पहिचान और अस्तित्व को स्थापना करने के लिए वसन्त पञ्चमी तिथी को दिवस के रुपमे काठमाॅण्डों मे मनाते आए है । परन्तु ईसवार यह दिवस सप्तरी के भारदह में भी मनाया गया । समान सहभागिता समान पहुँच और पहिचान एवं अधिकार स्थापना के लिए यह महोत्सव आयोजना किया गया ।


