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भारत-नेपाल सीमा पर दुर्लभ प्रजाति के रेड सेंड बोआ सांप समेत तस्कर को एसएसबी ने दबोचा

 

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*मोतिहारी.मधुरेश*- अन्तर्राष्ट्रीय सांप तस्कर गिरोह का एक सदस्य दुर्लभ प्रजाति के बेशकीमती सांप के साथ एसएसबी की टीम के हत्थे चढ़ गया है। एसएसबी ने तस्कर को गिरफ्तार करके उनके पास से प्रतिबंधित सांप सेंड बोआ (दो मुंहा सांप) बरामद किया है ।47वीं बटालियन एसएसबी के कमाण्डेन्ट सोनम छेरिंग ने बताया क़ि तस्कर पश्चिम चंपारण के काली बाग़ बेतिया नगर थाना क्षेत्र का निवासी बताया गया है। जिसकी पहचान महम्मद अली ( 35)के रूप में की गई है। उसे नेपाल जाते वक्त एसएसबी बेलदरवा मठ पोस्ट अंतर्गत मूर्तिया टोला की टीम ने इस्लामपुर से दबोचा है। बरामद दो मुंहे सांप की अनुमानित कीमत भारतीय बाजार में लगभग 10 लाख रुपए बताई गई है। जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में 2 करोड़ रुपए आंकी गई है। यानी एक किलो का यह सांप करीब एक करोड़ रुपए में बिकता है। इस सांप का उपयोग सेक्स पावर बढ़ाने वाली दवाएं बनाने में होता है।
इस दुर्लभ सर्प को एक लकड़ी के बॉक्स में सफेद थैले में छुपा रखा गया था। गुप्त सूचना के आधार पर विशेष अभियान में यह बरामदगी हुई। जब एसएसबी टीम ने तस्कर को रोका तो वह भागने लगा। उसे खदेड़ कर पकड़ लिया गया। कुछ दिनों से बिहार-नेपाल सीमा पर प्रतिबंधित वन्य जीव दो मुंहा सांप (सेंड बोआ) की तस्करी की सूचना मिल रही थी। इससे पहले सीतामढ़ी रेंज में भी सर्प तस्करी के मामले का उद्भेदन हुआ था। इसी बीच एसएसबी टीम को मुखबिर से सूचना मिली कि एक युवक एक लकड़ी के बॉक्स में कुछ छुपा कर ले जा रहा है। जांच में सफेद थैले में दो मुंहा सांप बरामद हुआ। ऐसी सुचना है क़ि पकड़े गए युवक ने सांप का सौदा किसी बड़े तस्कर से 25 लाख रुपए में तय किया था। सुचना यह भी है कि बिचौलिए के जरिए इस सांप को विदेशी तस्कर को बेचा जाना था।
इंडोनेशिया, चीन और अरब देशों में जानवरों से दवा बनाने का चलन काफी पुराना है। कथित तौर पर दो मुंहा सांप से सेक्स पावर बढ़ाने की दवा बनाई जाती है। इसके अलावा अंधविश्वासी लोग तंत्र-मंत्र की ओट में भी इस सांप की बलि चढ़ा देते हैं। इसके चलते सांप की इस प्रजाति के अस्तित्व पर संकट पैदा हो गया है।
जानकारों के मुताबिक,सांपों की तस्करी का यह रैकेट मुख्य रूप से बिहार,बंगाल,मध्य प्रदेश, उत्तरप्रदेश और हरियाणा के बीच संचालित है।तस्कर इन दो मुंहे सांपों को जिंदा या फिर इनके शरीर के अलग-अलग हिस्से अरब देशों को भेजते हैं। इन सांपों की बिक्री वजन के हिसाब से होती है। यदि यह दो किलो से अधिक का होता है, तो इसकी कीमत दो से तीन लाख रुपए तक बाजार में मिल जाती है। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सांपों की तस्करी जारी रहने से दुर्लभ प्रजाति के दो मुंहे सांप विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गये हैं।

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