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बिराटनगर में उमेश यादव की हार नही, हार तो उपेन्द्र यादव की हुई है : आज का चिन्तन

 

बिराटनगर, ९ जुलाई | बिराटनगर के मत परिणाम सामने है | कांग्रेस ने मेयर और उपमेयर के पद पर जीत हांसिल कर ली है | दुसरे स्थान पर  एमाले ने अपना वर्चस्व कायम रखा है | वहीं संघीय समाजवादी फोरम नेपाल के उमेश यादव अपेक्षा से कहीं अधिक मत प्राप्त किया है | मेयर में विजय प्राप्त किये भीम पराजुली ने २३०३१ मत प्राप्त किया उनके निकटतम प्रतिद्वन्दी एमाले के विनोद ढकाल ने  १७३२१ मत पाया है। वहीं संघीय समाजवादी फोरम के उमेश यादव ने १४९५८ मत के साथ तीसरे स्थान पर बिराजमान हुयें हैं । देखाजाय तो उमेश यादव ने १४९५८ मत कम नहीं है | एक समय तो ऐसा लग रहा था कि उमेश यादव जित की ओर बढ़ रहें है | लेकिन ऐसा नही हुआ जो भी हो उनके और उनके साथियों का मेहनत ने उन्हें बिराटनगर में उनका रुतवा जरुर दिखा दिया है | जरूरत थी कुछ और मेहनत की जो कि नही हो पाया | इसे हार नही उमेश यादव की जीत ही माननी पड़ेगी | अगर हार हुई है तो इनके नेता उपेन्द्र यादव की | वैसे कहा जा सकता है कि कुछ और भी कारण हो सकता है | हाँ भारी संख्या में मत बदर होने की भी खबर है यह कितना मत है यह जानकारी समय पर ही दी जानी चहिये लेकिन निर्वाचन आयोग ने ऐसा नही किया | खबर के अनुसार बदर मत ज्यादातर उमेश यादव के ही है |

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जिस तरह उपेन्द्र यादव ने वुलेट का जवाव बैलेट से देने की घोषणा की थी उसीतरह किसी भी हालत में उन्हें बिराटनगर का यह पद जीत कर दिखाना चाहिए था | बिराटनगर उनका गृह शहर है इस पर कब्जा करना उनका फर्ज बनता था लेकिन उन्होंने ध्यान नही दिया | यहाँ उनकी पार्टी का हारना मधेश के अन्य जगहों पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा | इसका सीधा असर अब बीरगंज पर पड़ेगा जहाँ से इनके कार्यकर्ता मेयर का पद जितने का दावा क्र्र्हें हैं | अब इनका शाख बचना मुश्किल हो जेयेगा | अब प्रश्न यह उठता है कि उपेंद्र्जी बिराटनगर में कितना समय दिए अपने कार्यकर्ता को जितने के लिए | यहाँ यह बात स्पस्ट करदूं कि कांग्रेश के शेखर कोइराला ने अपने कार्यकर्ता के मदत में नोमिनेशन से लेकर आज तक बिराटनगर में ही वैठे हैं | उपेंद्र्जी अब इमानदारी से सोंचे और इस हार की जिम्मेदारी अपने उपर लें | इतना ही नही अब उन्हें आगे की रणनीति भी बदलनी होगी | अगर समय पर सही निर्णय नहीं लिए तो केवल इतना ही कह सकते हैं कि आप भी डूबे देश भी डूबे और कार्यकर्ता को भी ले डूबे ….|

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आज का चिन्तन

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