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हर-हर महादेव से गूंजे शिवालय, की पूजा-अर्चना

 

 मोतिहारी  11 जुलाई// पहली सोमवारी के साथ आरंभ हुए सावन का स्वागत लोगोंं ने भगवान शिवशंकर पर जलाभिषेक कर किया। पहली सोमवारी को लेकर नगर के शिवालयों में सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। सर्वाधिक भीड़ नगर के पंचमंदिर, जानपुल चौक शिवमंदिर, मीना बाजार मंदिर, बेलही देवी मंदिर, छतौनी बस स्टैंड स्थित मृत्यंजय महादेव मंदिर, भवानीपुर जिरात के कुड़िया देवी मंदिर स्थित शिवालय, बरियारपुर शिवमंदिर, कचहरी चौक स्थित जगदम्बा आनंद धाम मंदिर, बलुआ चौक शिवमंदिर,चांटी माई मंदिर ,अम्बिका नगर स्थित पराम्बा शक्तिपीठ तथा दारोगा टोला स्थित प्राचीन शिवमंदिर में बड़ी संख्या में पुरुषों व महिलाओं ने जल,बेलपत्र व फूलों से जलाभिषेक कर पूजा अर्चना की। पहली सोमवारी को लेकर रविवार की देर रात से ही डीजे की धुन पर नाचते -गाते महिलाओं व पुरुषों का जत्था बूढ़ी गंडक नदी के बरनावंा घाट की ओर जाता रहा। घाट पर स्नान कर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं जलबोझी किया और नाचते-गाते नगर के विभिन्न मंदिरों में जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की। नगर के पंचमंदिर,छतौनी बस स्टैंड स्थित मृत्युंजय महादेव मंदिर तथा बरियारपुर शिवमंदिर में जलाभिषेक करने वालों की भीड़ को देखते हुए एक के बाद एक श्रद्धालु को ही जाने दिया जाता था। वहीं दारोगा टोला के प्राचीन शिवमंदिर में नगर के श्रद्धालुअेां के साथ ही दूर-दराज के अनेक ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में पूजा अर्चना की । वहीं मुफस्सिल थाना क्षेत्र स्थित रुपडीह शिवमंदिर में भी ग्रामीणों ने जलाभिषेक कर पूजा अर्चना की। भजन-कीर्त्तन का हुआ आयोजन: सुबह से शाम तक शिवालयों में चले जलाभिषेक के दौर के बाद संध्या समय पंचमंदिर, कचहरी चौक स्थित जगदम्बा आनंद धाम ,देवराहा बाबा गुरुकुल आश्रम तथा अम्बिका नगर के पराम्बा शक्तिपीठ में संध्या समय विशेष पूजा व भजन-कीर्त्तन का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। बाबा विज्ञानेश्वर महादेव मंदिर बना आस्था का केंद्र: संग्रामपुर। नारायणी (गंडक )नदी के किनारे प्रखण्ड मुख्यालय स्थित लगभग सतर साल पुराना मंदिर का इतिहास है। इस मंदिर में जलाभिषेक करने से मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है । बाबा को चावल और गुड ़से बनायी गयी सिरनी और रोटी का लड्डू का भोग लगाया जाता है । पुत्र प्राप्ति के लिए दूर दूर से लोग आते हैं । आचार्य पं. मुकुल मनोहर पाण्डेय ने बताया कि इस मंदिर की स्थापना नेपाल से भारत भ्रमण पर आये संत स्वामी व प्रसिद्ध योग गुरु बाबा विज्ञानानंद सरस्वती ने ग्रामीणों के सहयोग से करायी। महंत हरदेवानंद सरस्वती द्वारा आने वाले भक्तों का विशेष ख्याल रखा जाता है। रामगढ़वा: प्रथम सोमवारी पर शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। रिमझिम बारिश होने के बावजूद महिला श्रद्धालुओं ने जलेश्वर नाथ मंदिर,शंकर मन्दिर में जल चढ़ाए। पहली सोमवारी पर महिला व्रतियों ने व्रत रख कर भोले भंडारी की आराधना की। रक्सौल: प्रथम सोमवारी को मंदिरों में अहले सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। सूर्य मंदिर,काली मंदिर, मनोकमना माई मंदिर, कोईिरया टोला,स्टेशन परिसर,मौजे माई स्थान, कौड़ीहार चौक,आश्रम रोड स्थित मंदिर, नागा बाबामठ,राजदूतावास आदि मंदिरों में जलाभिषेक किया। लखौरा: लखौरा स्थित शिव मंदिर में सावन की पहली सोमवारी को हजारों श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। कांवरियों का जत्था सिकरहना नदी से जलबोझी कर आये थे।

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