यह कलम नही तलवार है : पुनीत कुमार
( कविता–यह कलम नही तलवार है। )
यह कलम नही तलवार है,
लेखक का हथियार है।
लेखक कर प्रहार उस पर ,
जो तुझको दिखता मक्कार है।
यह कलम नही तलवार है,
लेखक का हथियार है ।
बज उठी है रणभेरी ,
अब क्षणिक ना हो देरी ।
ये हथियार अन्याय के विरूद्ध है ,
फिर क्यों पडा तू सोच मे गहरी ।
उठा कर कलम हाथ मे
देख अत्याचारी किस तरफ,
करता ललकार है।
यह कलम नही तलवार है,
लेखक का हथियार है ।
उठाकर यह कलम रूपी तलवार ,
इसकी भी कभी तू परख ले धार।
तलवार करती है तन को घायल ,
और कलम करती मन पर वार है।
यह कलम नही तलवार है,
लेखक का हथियार है ।

( पुनीत कुमार )
लुधियाना ( पंजाब )
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