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मैं वही हूँ, जो मैं जानती हूँ, मैं वही हूँ जो मैं चाहती हूँ, हाँ मैं नारी हूँ ।

 

२ सितम्बर

 

मैं हूँ जो मैं सोचती हूँ कि मैं हूँ।

समाज के द्वारा दिए जाने वाले दबावों से मैं नहीं रूकती

समाज में पीड़ित होने का दबाव, बुरी माँ कहलाने का दबाव

डायन कहलाने का दबाव, आलोचनात्मक होने का दबाव,

तुम मुझे नहीं समझते तो ना सही,मैं उत्तर दाई नहीं हूँ।

मैं फैसले कर सकती हूँ, मैं चुन सकती हूँ,

मैं कमा सकती हूँ, और खिला भी सकती हूँ,

मैं हूँ मैडोना, मैं हूँ मैरी,

मैं हूँ कॉम और मैं हूँ केट,

मैं वही हूँ, जो मैं जानती हूँ, मैं वही हूँ जो मैं चाहती हूँ।

 

आज के जमाने में महिला को अबला नारी नहीं माना जा सकता। जीवन के हर क्षेत्र में वे अपना दायित्व स्फूर्ति से निभाती हैं, और समाज में सर ऊंचा करके चलती हैं।

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वह दिन गए जब हमें इतिहास के पन्नो में नारी के उपलब्धि की दास्ताँ ढूंढ़नी पड़ती थी। और इतिहास हमें केवल फ़ुटनोट में रख कर ठगता था।

आज हम अपना इतिहास खुद लिखते हैं।

अपनी दृढ़ता से, अपने काम से, महिला आज ऊंचाइयों को नाप रहीं हैं।

2015 में भी  महिलाओं नें गिनीस में अपना नाम दर्ज कराया ।

मलाला योसाफ्ज़ाई Malala Yousafzai जिन्हे सबसे कम उम्र में नोबेल प्राइज मिला है।

जुलिआना बुहरिंग Juliana Buhring जो सबसे कम समय में साइकिल पर 24000 मील कवर कर चुकी हैं।

 

आज ये साबित हो चुका है कि महिलाएं सारे काम बेहतर ढंग से कर सकती हैं। उसके कई कारण हैं।

  • उन में संगठन में कार्य करने की क्षमता है। सब का मत सुन कर वे फैसला लेती हैं, और खुद के ज्ञान को भी बाँटती हैं।
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  • छोटे विषय पर भी महिलाएं निपुणता से विचार करती हैं।

 

  • मुश्किल वक़्त में महिलाएं शांत रहती हैं, इस लिए वे बेहतर सोच पाती है, काम के क्षेत्र में ख़ास कर।

 

  • महिलाएं अपने काम के बारे में खुले विचार और ईमानदारी का भाव रखती हैं।

 

  • दूसरों के प्रति सहानुभूति उन में ज्यादा है, तो वे किसी भी व्यक्ति से जल्द जुड़ जाती हैं, और उनकी बात समझ पाती हैं।

 

इसी लिए आज महिला सब से बेहतर नेता और इंटरप्रेन्योर Entrepreneur मानी जाती हैं।

 

पर और भी कई काम हैं जो सिर्फ महिला ही कर सकती है:

  • मातृत्व धारण करना: पुरुष और महिला का बराबर योगदान होता है इंसान के जन्म में, लेकिन गर्भ धारण का विशेषाधिकार महिला का है।
  • महिला मल्टीटास्किंग करने में माहिर है। खाना बनाने के साथ साथ वह फ़ोन पर बात भी करती है । इसी गुण की वजह से वे घर और बाहर दोनों जगह बराबर ईमानदारी से काम कर पाती है ।
  • महिला अपने सूरत के साथ कई एक्सपेरिमेंट्स कर सकती हैं। वे स्कर्ट और पैंट दोनों को अच्छे से पहन सकती हैं।
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अगर सोचें, तो ऐसा कोई क्षेत्र  नहीं, जहाँ महिलाओं ने अपनी छाप न छोड़ी हो।

अपनी लगन, मेहनत, और दृढ़ता से महिला खुद में साफ़ सोच लाती हैं, जिससे वह फैसला ले पाती है।

तभी आज हमारे बीच इंद्रा नूई (सी इ ओ पेप्सिको),  हेलेन केलर, और बुला चौधरी जैसी महान महिलाएं हैं ।

अाइन्देरला बासु

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