प्रचण्ड और ओली के वक्तव्य का संदेश, क्या नेपाल की बनावट में कोई गडबडी है ? कैलाश महतो

कैलाश महतो, परासी |
‘हाम्रो तालमेल कांग्रेसविरुद्ध छैन । म प्रस्ट पार्छु यो जनता र राष्ट्रको पक्षमा छ ।’ –प्रचण्ड
‘हाम्रो सहमति कसैका विरुद्ध छैन, यो जनताको चाहना हो । देश बनाउने कुराबाट कोही पनि नझस्के हुन्छ ।’–ओली
प्रचण्ड और ओली के उपरोक्त वक्तव्य में सन्देश क्या हो सकता है ? उन दोनों का कहना है कि उनका मिलन किसी के विरुद्ध नहीं, देश और जनता के पक्ष में है ।
उनके वक्तव्य का विश्लेषण गहन रुप से होना जरुरी है । वे नेपाली काँग्रेस के विरोध में हैं नहीं तो फिर किसके विरुद्ध एक हो रहे हैं ? नेपाल, नेपाली शासन पद्धति तथा नीति और उसके नियत के विरोध में कौन हो सकते हैं ? देश बनाने के लिए उनका मिलन अपरिहार्य है तो वे कौन सा देश बनाना चाहते हैं ? क्या कोई और भी नेपाल बनाने की योजना है ? क्या नेपाल की बनावट में कोई गडबडी रह गयी है ? उनका मिलन जनता की आवश्यकता है तो फिर किस जनता की… ? वो जनता नेपाली होने का गर्व महशुश कब कर सकता है ?
अगर मधेशी जनता भी उनके परिभाषा में नेपाली है तो फिर मधेशी मक्खी कैसे हो सकता है ? मधेश आन्दोलन के क्रम मे झापा से कंचनपुरतक मधेशियों द्वारा आयोजित मानव श्रृंखला को “माखे साँङ्गलो” कैसे कहा जा सकता है ? मधेश को बिहार और यूपी में कहाँ खोजा जा सकता है ?
मधेश जब अपना पहचान, अधिकार और सम्मान के लिए राज्य से अपिल करता है, उसके गलत नीतियों के विरुद्ध आवाज उठाता है तो माओवादी सेना सम्मिलित नेपाली सेना समेत को उनके विरुद्ध उतारने की सोंच कैसे बन सकता है ?
मधेश के हित में बात करने बाले मातृका यादव को मन्त्री पद से हटने को बाध्य कैसे किया जा सकता है ? मधेशी जनता को अधिकार सम्पन्न बनाने के लिए राज्य को सुझाव देने बाले शरदसिंह भण्डारी का मन्त्री पद छिन लेने की आवश्यकता कहाँ से आ गयी ? मधेश को काठमाण्डौ से नेक दिल से जोडने के लिए नेपाल सरकार को आग्रह करने बाले जयप्रकाश गुप्ता को मंत्री पद पर रहते हुए जेल क्यों चलान की गयी ?
अखण्ड सुदुर पशिचम के नामपर मधेश की भूमियों पर कब्जा कर रखे शेर बहादुर देउवाओं ने मधेश आन्दोलन को नेपाल विरुद्ध का आन्दोलन कहते हुए कैलाली और कंचनपुर का एक इञ्च भी जमीन मधेशियों को नहीं देने की बात क्यों की जाती है ?
मधेशियों के विरुद्ध बनाये गये संविधान को मधेश द्वारा अस्वीकार किये जाने पर उसे संसार का उत्कृष्ट संविधान कैसे कहा जा सकता है ? उस संविधान के स्वागत में नेपाली समुदाय दीपावली मनाती हैं, वहीं मधेश में काला दिवस क्यों मनाया जाता है ? क्या मधेश और नेपाल अलग होने का राजनीतिक, सांस्कृतिक, स्वीकृतिक और मानसिक प्रमाण नहीं है ?
सरकार के विरुद्ध देश के सबसे संवेदनशिल शहर देश की राजधानी में उत्पात मचाने बाले सशस्त्र आन्दोलनकारियों पर नेपाली सुरक्षाकर्मी पानी का फोहारा और राजधानी से मिलों दूर मधेश में शान्तिपपूर्ण मधेशी आन्दोलनकारियों के शिर और छातियों पर गोलियाँ क्या नेपाली समझकर मारी जाती है ?
आश्विन १८ गते के दिन निर्वाचन आयोग द्वारा अगहन १० के प्रादेशिक निर्वाचन के लिए तोके गये १६५ निर्वाचन अधिकृतों में कपिलवस्तु के एक बूथ के लिए मधेशी समुदाय से केवल शिवशंकर चौधरी कोे चयन किया गया है । नेपाल सरकार के जनगणक अनुसार ही देश में चालीस प्रतिशत मधेशियों की आवादी है । उसमें ०.६० प्रतिशत प्रतिनिधित्व ही क्यों ? क्या यही समानुपातिक प्रतिनिधित्व है ? क्या होने बाले चुनावों में मधेशी विरोधी रहे नेपाल सरकार के कर्मचारी और न्यायमूर्ति तक के लोग स्वच्छ परिणाम देंगे ?
तर्क अगर यही है कि मधेश में लोग पढेलिखे ही नहीं है तो लाखों के संख्या में उच्च शिक्षा प्राप्त मधेशी यूवा खाडी मूल्कों में पसिना कैसे बहा रहे हैं ? लाखों के संख्या में मधेशी आज भी नेपाल सरकार के तलबे चाटने को तैयार कैसे हैं ? अगर मधेशी सही में राज्य के काविल नहीं है तो मधेश का दाना पानी, मेहनत और राजस्वों पर राज कर रही नेपाली राज्य उसे शदियोंतक में भी काबिल नहीं बनाया । क्यों ?
जंगली जीवन बसर करने बाले, दीशा के बाद मलद्वार भी धोने का विवेक नहीं रखने बालों का इतना विकास चन्द दशकों में कैसे हो जाता है ? लेकिन वैदिक सभ्यताओं से परिपूर्ण मधेशियों को अशिक्षित, नाकाम और कमजोर बनाने का काम नेपाली राज्य ने क्यों किया ? मधेश के ही भूमियों पर मधेशी को दयाभाव पर जिने को बाध्य क्यों किया गया ?
क्या ओली, प्रचण्ड और बाबुराम जी पार्टी एकता के ही अभियान में हैं ?
कुछ सूत्रों के अनुसार माके तथा प्रचण्ड दोनों की राजनीतिक हैसियत ही समाप्त करने के लिए ओली, नारायणकाजी तथा टोप बहादुर जी द्वारा राष्ट्रियता तथा राष्ट्रिय अखण्डता का जामा पहनाकर प्रचण्ड से वाम एकता करवाने की साजिश हो रही है । राजनीतिक दावपेचों को इंकार कतई किया नहीं जा सकता । दूसरी तरफ नेपाली काँग्रेस भी प्रजातान्त्रिक शक्ति के नामपर मधेश में राजनीतिक व्यापार कर रहे पार्टिंयों को अपने साथ जोडने या उनके साथ मोर्चा बनाकर उन्हें मटियामेट करने के फिराक में है । मगर क्या इन एकताओं की नाटक तब नहीं रची जा रही है जब इराक के कुर्दिस्तान और स्पेन के क्याटेलोनिया में नये राष्ट्र निर्माण के लिए वहाँ की जनता इराक और स्पेन की सरकारों तथा अन्तर्राष्ट्रिय कुछ विरोध एवं दखलअन्दाजियों के बावजुद ९० और ९२ प्रतिशत के बहुमत से स्वतन्त्रता के पक्ष में खडी हंै ? खास में उन्हीं जनमत संग्रह के परिणामों से हत्प्रभ और त्रसित होकर एक तरफ कम्यूष्टि तथा दूसरे तरफ प्रजातान्त्रिक पार्टियों द्वारा अपने अपने सिद्धान्तों के नजदिक माने जाने बाले संगठनों से एक होने या मोर्चाबन्दी करने की कोशिश की जा रही है ।
आज भी मधेशी जनता को इतने बेवकूफ समझे जा रहे हैं कि हालसाल ही परगमन कर चुके किसी नेता पर जब लोगों से नाराजगी जाहेर हो रही है तो जनता को उल्लू बनाकर अपना अभिष्ट पूरा करने के लिए “हामी पार्टी प्रवेश गरेका हैनौं, सूर्य चिन्ह लिएर चुनाव लड्ने भनेका हौं” कहता है ।
“आपका सन्देश क्या है अपने जीवन में ?” के जवाब में गाँधी ने कहा था, “मेरा जीवन ही मेरा सन्देश है ।”
गाँधी ने अपने जनता को अपने त्यागपूर्ण जीवन को ही सन्देश समझने को अनुरोध किया था । गाँधी के उसी जीवन से प्रेरित होकर लाखों लागों ने अनेकानेक कुर्बानियाँ दी । लोगों ने गाँधी पर विश्वास की और गाँधी ने भारतीयों को भारत दी । उनके जीवन के सादगी से अंग्रेजतक ने उनसे हार मान ली और गाँधी को सलाम करते हुए भारत छोड दी ।
है कोई मधेशी नेता जिनके जीवनी से नेपालियों को कोई त्रास हो ?, उनके नजर में किसी का सम्मान हो ?
पार्टी मिलन कार्यों को चिरफार किया जाय तो तस्वीर सामने यही आने बाला है कि वह कोई पार्टी मिलन नहीं, मधेश के स्वतन्त्रता विरोधी साजिश है । मधेश को तोडने का षड्यन्त्र है । लेकिन अब स्वतन्त्रता का पारा मधेश में इतना चढ गया है कि मधेश आजादी ही अब अन्तिम विकल्प रह जाता है जिसमें सही कहा जाय तो नेपाली शासन का बहुत सकारात्मक सहयोग है । मधेश के नये पुस्ते को अब नेतृत्व में आ जाना लाभदायक है ।
नेपाली पार्टिंयों में हो रहे एकता के कारण ः
१. मधेशियों में हो रहे एकता से त्रसित होकर ।
२. प्रदेश नं.२ में आये मधेशी जनमत से घबराकर ।
३. कोठली के बाहर पडे मधेशी मतों के प्रतिशत से परेशान होकर ।
४. थारु समूदाय में दशकों बाद आने बाले विद्रोही शक्ति के त्रास के कारण ।
५. राजपा और उपेन्द्र यादव के बीच हो सकने बाली एकीकरण के कारण ।
६. स्वच्छ पुकार से उठने बाली स्वतन्त्र मधेश के संभावित आन्दोलन के घबराहट के कारण ।
७. कुर्दिस्तान और क्याटेलोनिया में स्वतन्त्रता के लिए हुए जनमत संग्रह की हावा मधेश में आने देने से रोकने के लिए ।
८. मिलजुलकर बनाये गये संविधान को यथास्थिती में ही रखने के लिए ।
९. भारत के कारण हरेक छह और नौ महीने में हो रहे सरकार परिवर्तन कार्य को चुनौती देने के लिए ।
१०. अपहरण के मामले में भारत विरुद्ध लडे देवनारायण यादव के भारत द्वारा हुए गिरफ्तारी विरुद्ध एकता बनाने के लिए ।
११. मधेशियों द्वारा हमेशा होने बाले कचकच के आन्दोलनों को निष्तेज करने के लिए ।
१२. नेताओं में पल रहे स्थायी सत्ता की उन्मादों को पूरा करने के लिए ।
१३. किसी के विरुद्ध एकता नहीं होने का जिक्र कर भारत और मधेश दोनों के विरुद्ध खडा होने के लिए ।
१४. मधेशी दलों को मिटियामेट करने के लिए ।

