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अगर कोई विडियो मोहना अंसारी पर बना है तो इतनी आपत्ति क्यों ? – श्वेता दीप्ति

 

अभिनय कला क्या निकृष्ट कला है जिसके लिए इतनी वितृष्णा से लेखक ने उल्लेख किया है ? अगर अभिनय करना बुरा है तो क्या लेखक ये बताएँगे कि राजनीति में जो अभिनेता या अभिनेत्रियाँ आ रही हैं उनके बारे में उनकी क्या धारणा है

श्वेता दीप्ति, काठमांडू | मोहना अंसारी का व्यक्तित्व नेपाल के परिप्रेक्ष्य में अपरिचित नहीं है । मुस्लिम समुदाय के बन्दिशों को तोड़ कर आई हुई मोहना ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है जो महिलाओं के लिए एक उदाहरण है । कोषराज न्योपाने द्वारा लिखा गया आलेख जिसे सजिलो खबर ने प्रकाशित किया है अनायास ही बेवजह मोहना अँसारी को चर्चा में ला दिया है । आलेख का शीर्षक और कोषराज न्योपाने, जो स्वयं अधिवक्ता और अधिकार कर्मी हैं बावजूद इसके उनकी लेखन शैली ने निश्चय ही एक स्थापित व्यक्तित्व का चरित्र हनन किया है । जिसकी अनुमति किसी को भी नहीं है । आलेख का एक एक शब्द अगर देखा जाय तो सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए लिखा गया है । अक्सर यह माना जाता है कि एकाएक अगर चर्चित होना है तो कुछ ऐसा विवादास्पद लिखो कि न चाह कर भी तुम्हें लोग पढे या तुम्हारी चर्चा करे और शायद इसी सस्ती चर्चा की आवश्यकता सजिलो खबर को भी चाहिए होगी, तभी इसे प्रकाशित किया गया है ।

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जिस विडियो की चर्चा उक्त आलेख में की गई है मैंने उसे जिज्ञासावश देखा और अंत में अफसोस हो रहा है एक बुद्धिजीवी लेखक की सोच पर । आखिर किस नजर से उन्होंने इस विडियो को देखा है ? और अचानक उस विडियो पर उनकी तीक्ष्ण नजर कैसे चली गई जिस विडियो के लिए उन्होंने खुद माना है कि वो काफी पुराना है । अर्थात् कहीं ना कहीं इस आलेख के पीछे कोई और मंशा है जो सीधी तरह मोहना अंसारी जी के व्यक्तित्व पर आक्षेप करता है । लेखक को विदेशी खर्च में बने इस विडियो पर इसलिए एतराज है कि इसमें मोहना अन्सारी को महिमा मंडित किया गया है हालाँकि विडियों में ऐसी कोई खास बात नजर नहीं आती और इतना तो लेखक को भी समझना चाहिए कि अगर किसी व्यक्ति विशेष पर डाक्यूमेंट्री तैयार होती है तो केन्द्र में उसे ही रखा जाता है और यह कोई नई बात नहीं है प्रायः जानी मानी हस्तियों पर उनके निजी जीवन पर ऐसी डाक्यूमेंट्री बनती हैं । भूकम्प पर आधारित डाक्यूमेंट्री की कमी नहीं है और यह तो लेखक को भी पता ही होगा कि सबमें मोहना अंसारी को नहीं दिखाया गया है । तो अगर कोई एक विडियो किसी मोहना अंसारी पर बना है तो लेखक को इसमें अचानक इतनी आपत्ति क्यों हो गई और इस संदर्भ में चर्तीकला जैसे निम्न शब्द का प्रयोग उन्होंने क्यों किया ? अभिनय कला क्या निकृष्ट कला है जिसके लिए इतनी वितृष्णा से लेखक ने उल्लेख किया है ? अगर अभिनय करना बुरा है तो क्या लेखक ये बताएँगे कि राजनीति में जो अभिनेता या अभिनेत्रियाँ आ रही हैं उनके बारे में उनकी क्या धारणा है ? और हाँ हमारे पूर्व प्रधानमंत्री ओली जी स्वयं पर आधारित बनने वाली फिल्म में अभिनय करने वाले हैं जैसा कि कुछ महीने पहले समाचार में आया था उसके बारे में लेखक क्या सोचते हैं ?

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ताज्जुब तो यह है कि लेखक ने पूरी की पूरी संवैधानिक निकाय पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है जिसके तहत मोहना अँसारी जी की नियुक्ति हुई है । आखिर इन सबके पीछे कोई तो वजह है जिसे सामने आना ही चाहिए । इतना ही नहीं लेखक को शायद यह भी खल रहा है कि मधेश आन्दोलन के उस दृश्य को इस विडियो में छायांकित किया गया है जिसमें प्रहरी की निर्दयता साफ दिख रही है, जहाँ लेखक की एक समुदाय विशेष से जुड़ी कुढ़न ही दिख रही है । मोहना अंसारी उस वक्त भी चर्चा में आई थी जब उन्होंने मधेश आन्दोलन पर अपना नजरिया व्यक्त किया था और इसके लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री ओली ने उन्हें अपने कार्यालय में तलब किया था और उनके साथ मर्यादाहीन अनपेक्षित व्यवहार किया था । वीडियो देखने के क्रम में ही एवीन्यूज का एक विडियो भी मैंने देखा स–शक्ति जिसमें उद्घोषिका ने मुक्त कंठ से मोहना अंसारी के व्यक्तित्व की तारीफ की है पर आश्चर्य है कि लेखक की दृष्टि वहाँ क्यों नहीं गई ? उन्हें तो वहाँ भी एतराज होना चाहिए था ? जहाँ सचमुच उनका प्रशस्तिगान किया जा रहा है और सराहा जा रहा है । उक्त आलेख पूरी तरह एक सोची समझी नीति के तहत लिखा गया है यह तो स्पष्ट है पर इसे क्यों लिखा गया है यह सामने आना आवश्यक है ।

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