राेटी,कपडा मकान छाेड कर जात धर्म की राजनीति मधेश में
अब्दुल खान,नेपालगंज ।
मधेश की राजनीति दिन प्रति दिन नीच अाैर तुच्छ साेच में बदलती नजर अा रही है। लाेग सत्ता की प्राप्ति हेतु काेई भी हद पार करने में कसर बांकी न रखने की काेशिश में चुनावी माहाैल बना रहे है,जिससे समाज की रचना न हाेकर अापसी मतभेद समाज के अन्दर जडे जमा रही है,यही हमारे समाज की मुख्य कमजाेरी बन रही है। सत्ता पाने के लिए लाेग अाजकल जात धर्म काे अपना घाेषणा पत्र बना कर भरपर प्रचार प्रसार मे डट के लगे हुए है।नेताअाें काे जनता के राेटी,कपडा अाैर मकान की परवाह नही है।बाकें जिला के क्षेत्र नं. दाे मे यह राेग जाेराे पर चल रहा है।इस ईलाके मे नेताअाें के ईशाराें पर बार बार धार्मिक द्वन्द कराया गया अाज उसी का फायदा उठाने मे अपने अपने गणित गण रहे है।इस क्षेत्र मे जात पात अाैर धार्मिक झांसे मे लाेग बुरी तरह फंस चुके है। लाेग पार्टीयाें का घाेषणा पत्र पढने के बजाय काैन से जात धर्म के लाेग है पुछते हैं। यहाँ पर हिन्दुअाें का कहना है यदि मुस्लिम जीतेगा ताे माँस , मछली की दुकाने बढा देगा,मुसलमानाे का पक्ष पाेषण करेगा,मुसलमानाे का अाराेप है यदि हिन्दु जीतेगा ताे कर्वला पे कब्जा,दाहा मे मारपीट अाैर माेहम्द डे पे पाबन्दी करेगा इसी कशमकश में लाेगाे काे फंसाया जा रहा है। रहने का घर बच्चाें के लिए अच्छी शिक्षा,किसानाे के लिए खाद,बीज, सिचाई का प्रबन्ध अच्छी हस्पिटल का व्यवस्था काैन करेगा यह साेच जनता में नही,केवल मजहब के बटवारे की गन्दी राजनीति का फिकर कर रहे हैं ।यह अाने वाले भविष्य के लिऐ दुर्भाग्य है। इस जहरीली हवा से अानेवाले भविष्य काे बचाना हाेगा।


