Mon. Jul 27th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

कपिलबस्तु प्रदेश नम्बर ५ के राजधानी के लिए सर्बोत्तम क्यों ?

 

कपिलबस्तु भगवान गौतम बुद्ध के पिता शुद्धोधन के राजधानी तिलौराकोट का ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व बिश्व में प्रसिद्ध है ।
भानु चतुर्वेदी/कपिलबस्तु ।

नेपाल के पश्चिमाञ्चल बिकास क्षेत्र के ह्दय में अवस्थित कपिलबस्तु जिला प्राचीनकाल से ही अपना अलग पहचान कायम करने में सफल रहे जिले के रुप में जाना जाता है । लुम्बिनी अञ्चल के ६ जिलो में एक जिला है कपिलबस्तु । किवदन्ती मुताबिक बाणगंगा नदी के तट पर तप किए कपिल मुनि के आज्ञानुसार बस्ती बनाए गए इस जिले का नाम कपिलबस्तु पडा है । नेपाल के मानचित्र में इस जिले के पूरब में रुपन्देही, उत्तर में अर्घाखांची, दक्षिण में भारत का उत्तर प्रदेश तथा पश्चिम में दाङ जिला बिद्यमान है । आर्थिक सामाजिक तथा भौगोलिक रुप में अपने आप में सबल कपिलबस्तु जिला विश्व में प्रसिद्ध है ।
तत्काल ही में देश में प्रतिनिधि सभा तथा प्रदेश सभा का निर्वाचन समाप्त हुआ है जिसके बाद प्रान्तीय सरकार निर्माण तथा प्रदेशीय राजधानी बनाने की चर्चा जोराें पर है । जिसमें प्रदेश नम्बर ५ की राजधानी कपिलबस्तु होने की बात भी चर्चा में होने की बात सर्वविदित है । किसी भी देश में प्रान्त की राजधानी तय करने से पहले उस जगह की भौगोलिक, सामाजिक, आर्थिक तथा शैक्षिक अवस्था जैसी जरुरी चीजे उपयुक्त हैं या नही ? तथा सर्वसाधारण उस जगह को महत्व दे रहे हैं या नही ? इन सब बातों पर सरकार तथा सम्बन्धित निकाय का ध्यानाकर्षण होना नितान्त आवश्यक है । प्रदेश नम्बर ५ की राजधानी कपिलबस्तु होना समग्र नेपाली के लिए गर्व की बात है । वैसे तो ५ नम्बर प्रदेश के राजधानी के रुप में अपने अपने करीबी तथा सुगम स्थान का मांग एवं तर्क बारम्बार उठ रहा है ।
जिसमे दाङ के तुलसीपुर, बुटवल आदि जगह चर्चे मे हैं पर बर्दिया जिले के पश्चिम से लेकर नवलपरासी के पुर्वी सीमा तक महेन्द्र राजमार्ग के हिसाब से मध्य में कपिलबस्तु ही स्थित है । नवलपरासी, गुल्मी, पाल्पा, अर्घाखाची, प्युठान व रोल्पा के आवागमन के सुगमता को ध्यान में रखते हुए केन्द्रविन्दु में बिद्यमान कपिलबस्तु ही उचित स्थान है । साथ ही तुलसीपुर बडा शहर बनने पर २० साल पश्चात् पेयजल, आवागमन से शहर व्यवस्थापन में कडिनाई होने का सम्भावना भी है । इसी तरह बुटवल में भी भू—स्खलन और पेयजल व्यवस्थापन में कठिनाई उत्पन्न होने का प्रबल सम्भावना दिख रही है ।
कपिलबस्तु भगवान गौतम बुद्ध के पिता शुद्धोधन के राजधानी तिलौराकोट का ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व बिश्व में प्रसिद्ध है । तिलौराकोट के पास से बह रही बाणगंगा नदी से पेयजल तथा सिचाई एवं अन्य जलीयआवश्यकताओं की पुर्ती होेने की सम्भावना है । साथ ही चेतरादेई के पास रहे जंगल का कुछ हिस्सा काटकर खाली जगह बनाकर कई कार्यालयों के लिए भवन निर्माण भी किया जा सकता है जिससे इस क्षेत्र को राजधानी बनाने में कोई कठिनाई उत्पन्न नही होगी साथ ही सरकारको मुआब्जा भी नही देना पडेगा । महेन्द्र राजमार्ग तथा भैरहवा एयरपोर्ट के समीप एवं २२ किलोमिटर के दुरी पर रेलमार्ग के सुबिधा से सुसम्पन्न कपिलबस्तु राजधानी के लिए सर्वोत्तम स्थान के रुपमें दिख रहा है ।
कपिलबस्तु में राजा शुद्धोधन का राज्य तिलौराकोट प्राचीन कपिलबस्तु न्यायालय के रुप में विद्यमान कुदान भारतीय सम्राट अशोक द्वारा निर्मित गोटियहवा और निग्लिहवा के अशोक स्तम्भ ७७,००० शाक्यों का बौद्ध स्थल सगरहवा जैसे स्थान महत्व पूर्ण पर्यटकीय स्थल कनक मुनि बुद्ध का शहर अरौराकोट राजा शुद्धोधन और रानी मायादेवी की समाधि स्थल धमनिहवा तथा सिसहनियाकोट जैसे १०० से अधिक बौद्ध स्थान हैं । कपिलबस्तु विश्व में बुद्ध के राज्य के नाम से सुप्रसिद्ध है । विश्वभर से हरसाल लाखो पर्यटक बुद्ध के राज्य कपिलबस्तु का भ्रमण करने आते हैं । इसी तरह विश्व सिमशार क्षेत्र में सुचीकृत जगदीशपुर ताल, तौलेश्वर नाथ, शिवगढी मन्दिर, सोनगढवा मन्दिर जैसे और कई पर्यटकीय एवं पुरातात्विक धरोहर के रुप में भरीपूर्ण यह जिला उचित संरक्षण सम्बद्र्धन तथा प्रचार प्रसार के कमी के कारण अंधेरे में है पर अगर यह स्थान प्रदेश नम्बर ५ का राजधानी कायम हो जाय तो इन स्थानों का विकास तथा संरक्षण होने में बिल्कुल सन्देह नही रहेगा । समथर खेतीयोग्य जमीन अन्न उत्पादन के दृष्टि से भी अग्र स्थानपर है साथ ही शिक्षा क्षेत्र में भी यह जिला अग्र पंक्ति मे बिद्यमान है । राजधानी के लिए पर्याप्त जगह तथा आवश्यक पुर्वाधार के लिए अनूकुल भौगोलिक अवस्था वाले कपिलबस्तु को राजधानी बनाने पर किसी द्वारा आपत्ती या विरोध भी न जताये जाने की बात भी सर्वविदित है ।
एक खुला संग्रहालय के रुप में रहे इस जिले में व्यवसायिक एवं पर्यटकीय विकासका सम्भावना भी प्रचुर मात्रा में होने तथा आवश्यक भौतिक पूर्वाधार और निर्माण कार्य के लिए पर्याप्त समतल भू—भाग उपलब्ध होने, यातायात, पेयजल तथा बिजुली का पर्याप्त सुबिधा होने, औद्योगिक विकास एवं कृषिजन्य उत्पादन की अच्छी सम्भावना होने, राजश्व संकलन कार्य में आन्तरिक राजश्व कार्यालय मार्फत् देश के लिए राजश्व संकलन करने में सहजता होने तथा एकदम बडे व्यापारिक केन्द्र के रुप में स्थापित होने में सहजता से सफल होनेवाले इस कपिलबस्तु जिले को प्रदेश नम्बर ५ की राजधानी बनाया जाना सबके लिए उपयुक्त तथा हर तरह से उचित है ।

यह भी पढें   नेपाल के दार्चुला में भारतीय सहयोग से नए स्कूल भवन का शिलान्यास, लागत 7.5 करोड़ रुपये

 

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *