शीतलहर के कारण सामुदायिक स्कुल बन्द , निजी स्कुलों को पैसे की गर्मी
मनोज बनैता, सिरहा, 7 जनवरी ।
ठंड और शीतलहर के कारण अधिकांश हिस्सों में लोग मौसम के विपरीत स्थितियों को झेलने के लिये विवश हैं. इस कठाेर ठंड की वजह से मधेस लगायत पूरे देशबासियो का जनजीवन त्रस्त है. इसके लिए कोई ग्लोबल वार्मिंग को दोषी ठहराता है, तो कोई इसे प्राकृतिक आपदा कहता है. सप्तरी जिले मे ७, सिरहा मे ३ लगायत मधेस भर मे दर्जनौं लाेगाें की माैत हाे गयी । कड़ाके की ठंड और शीतलहर ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है. सामुदायिक स्कूलों को बंद कर दिया गया है. घना कोहरा से हुए हादसों में दर्जनो लोगों की मौत हो गयी. मौसम विभाग के सूत्रों के अनुसार, ये जानलेवा ठंड करीब एक सप्ताह और कायम रहने का अनुमान है । लेकिन, मधेस मे चलरहे नीजि स्कुलाें की जाे अगर बात करें ताे लगता है इन संचालकाें की ईंसानियत घास चरने चली गई है । अधिकांश निजी स्कुलें खुली है । निजी स्कुलाें मे हरेक ३ महिना के उपरान्त त्रैमासिक परीक्षा लिया जाता है । ये परीक्षा ईसलिए भी अहम मानाजाता है क्युकि ईसमे पैसे वसुल होते है । कई अभिभावक का ये भी कहना है कि उनके बच्चे सिर्फ स्वेटर मे ही स्कुल जाते है क्युकी यह स्कुलका अचार संहिता के भीतर पडता है । अगर ऐसी जानलेवा ठंड मे मासुम छात्र छात्राअाें काे अगर कुछ हुवा ताे इसका जिम्मेवार हाेगा काैन ?



