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साहित्य को आगे बढ़ाने में दूत का काम करती है पत्रकारिता : डॉ.रीता चौधरी

 

{हिमालिनी के लिए मधुरेश प्रियदर्शी की रिपोर्ट}

नई दिल्ली {भारत}:– राष्ट्रीय पुस्तक न्यास की निदेशक और साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त लेखिका डॉ. रीता चौधरी ने कहा है कि साहित्य एवं पत्रकारिता एक दूसरे के पूरक हैं। पत्रकारिता साहित्य को आगे बढ़ाने में दूत का काम करता है।

डॉ. रीता चौधरी देश की राजधानी नई दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित विश्व पुस्तक मेले में साहित्य मंच पर शुक्रवार को आयोजित परिचर्चा में अपना विचार व्यक्त कर रही थीं। परिचर्चा का विषय था ‘साहित्य और पत्रकारिता : कितने दूर, कितने पास।‘ परिचर्चा का आयोजन राष्ट्रीय साहित्य संगम के निमित्त ‘उड़ान’ एवं राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के तत्वावधान में किया गया था।

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अपने वक्तव्य में डॉ. चौधरी ने इस बात पर चिंता भी जताई कि पत्रकारिता में भाषा का स्तर कमजोर होता जा रहा है।

वरिष्ठ पत्रकार एवं समीक्षक अनंत विजय ने अपने वक्तव्य में देश में साहित्यकार पत्रकारों की एक लंबी और समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि साहित्य और पत्रकारिता में गंभीर संबंध है परंतु आज इन दोनों को अलग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि खांचे में बांटने से साहित्य को काफी नुकसान पहुंचा है, इसी प्रकार पत्रकारिता को खांचे में बांटने से भी नुकसान हो रहा है।

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सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार डॉ. आलोक पुराणिक ने कहा कि पहले पत्रकारिता में साहित्यिक होना आवश्यक माना जाता था परंतु आज स्थिति ठीक इसके उल्टी हो गई है। अस्सी के दशक तक साहित्य और पत्रकारिता एक दूसरे के बेहद करीब थे लेकिन उसके बाद से कलेवर बदल गए हैं। आज साहित्यिक होना पत्रकारिता में अयोग्यता मान ली जाती है जबकि सभी विषयों में साहित्य का पढ़ाया जाना अनिवार्य होना चाहिए तभी सही समझ बन सकती है।

चर्चित उपन्यासकार राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि पत्रकारिता देश में आंचलिक, प्रदेश और राष्ट्रीय तीनों अलग-अलग स्तर पर चलती है। तीनों में कोई तालमेल नहीं है। आंचलिक चिंताएं राष्ट्रीय चर्चा का विषय नहीं बन रहीं हैं। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि पत्रकारिता में आज सकारात्मक तथ्य गायब दिखते हैं।

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इस कार्यक्रम में भारत प्रकाशन के प्रबंध निदेशक विजय कुमार, पांचजन्य-ऑरगेनाइजर के समूह संपादक जगदीश उपासने, पांचजन्य के संपादक हितेश शंकर, सुप्रसिद्ध साहित्यकार विनोद बब्बर, वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल, अनुरंजन झा सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार एवं पत्रकार उपस्थित थे।

कार्यक्रम का सफल संचालन लोकसभा टीवी के जानेमाने एंकर अनुराग पुनेठा ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन इस सत्र के संयोजक संजीव सिन्हा ने किया।

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